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हाईकोर्ट ने निरस्त किया संबद्धता समिति का फैसला
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
Updated Thu, 30 Jun 2016 01:45 AM IST
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न्यायालय
- फोटो : file photo
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फर्जी एनओसी से मान्यता हासिल करने के आरोप में गोरखपुर यूनिवर्सिटी से संबद्धता हासिल करने में नाकाम 29 बीएड कॉलेजों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। इनमें 14 कॉलेजों की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पिछली 22 मई को यूनिवर्सिटी की संबद्धता समिति की ओर से लिए गए संबद्धता न देने के निर्णय को निरस्त कर दिया है। सिर्फ इतना ही नहीं, हाईकोर्ट ने यूनिवर्सिटी को तीन सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश भी दिया है।
24 जून को हाईकोर्ट की ओर से लिए गए इस फैसले से कालेज प्रबंधन में खुशी की लहर दौड़ गई है। हालांकि तीन सप्ताह के समय की वजह से इन कॉलेजों का बीएड के सत्र 2016-18 की पूल काउंसिलिंग में हिस्सा लेना मुश्किल है लेकिन कॉलेज प्रबंधन इस बात को लेकर उम्मीद से हैं कि यदि फैसला पक्ष में आया है तो कोई न कोई रास्ता जरूर निकलेगा।
दरअसल फर्जी एनओसी से मान्यता हासिल करने के आरोप में घिरे 40 कॉलेजों में से एनसीटीई ने 11 को ही दोषी माना था और 29 को दोषमुक्त करार दिया था लेकिन यूनिवर्सिटी ने इसे लेकर कड़ा निर्णय लिया। यूनिवर्सिटी की संबद्धता समिति ने सभी 40 कॉलेजों को दोषी मानते हुए सम्बद्धता देने से इनकार कर दिया था। यूनिवर्सिटी के इस फैसले से दुखी होकर कॉलेज प्रबंधन ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। इस मामले में सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया था। इसी सुरक्षित फैसले का निर्णय 24 जून को हाईकोर्ट की ओर से सुनाया गया।
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24 जून को हाईकोर्ट की ओर से लिए गए इस फैसले से कालेज प्रबंधन में खुशी की लहर दौड़ गई है। हालांकि तीन सप्ताह के समय की वजह से इन कॉलेजों का बीएड के सत्र 2016-18 की पूल काउंसिलिंग में हिस्सा लेना मुश्किल है लेकिन कॉलेज प्रबंधन इस बात को लेकर उम्मीद से हैं कि यदि फैसला पक्ष में आया है तो कोई न कोई रास्ता जरूर निकलेगा।
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दरअसल फर्जी एनओसी से मान्यता हासिल करने के आरोप में घिरे 40 कॉलेजों में से एनसीटीई ने 11 को ही दोषी माना था और 29 को दोषमुक्त करार दिया था लेकिन यूनिवर्सिटी ने इसे लेकर कड़ा निर्णय लिया। यूनिवर्सिटी की संबद्धता समिति ने सभी 40 कॉलेजों को दोषी मानते हुए सम्बद्धता देने से इनकार कर दिया था। यूनिवर्सिटी के इस फैसले से दुखी होकर कॉलेज प्रबंधन ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। इस मामले में सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया था। इसी सुरक्षित फैसले का निर्णय 24 जून को हाईकोर्ट की ओर से सुनाया गया।
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