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बेबस नजरों से घर के कटने का इंतजार

Sun, 20 Aug 2017 02:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Sun, 20 Aug 2017 02:06 AM IST
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ground report of gorakhpur flood
घरों के बाढ़ के पानी में डूबने के बाद लोगों ने सड़क किनारे ठिकाना बना लिया है। - फोटो : Amar Ujala
करीब 19 साल पहले जब नौसड़ में बांध कटा था तो शकुंतला के घर को बाढ़ का पानी बहा ले गया था। राप्ती का जलस्तर बढ़ने से इस बार भी शकुंतला के घर में पानी लबालब है। घर के पास ही लगातार बंधे से रिसाव हो रहा है। इससे इस बार भी बाढ़ के सैलाब में घर समा जाने की आशंका है, लिहाजा शुकुंतला ने पूरे परिवार के साथ सड़क किनारे शरण ले ली है। उनके सामने अब राप्ती के लगातार बढ़ते जलस्तर के साथ डूब रहे अपने घर को बेबस नजरों से देखने की मजबूरी है।
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बेटे रामचंद्र, अजय के अलावा बहू और बेटियों के साथ सड़क किनारे रहने की इस मजबूरी में शकुंतला को कई अन्य तरह के भी डर सता रहे हैं। हालांकि बेटे बड़े हैं। शकुंतला के नाती-पोते भी हैं। फिर भी जवान बहू-बेटियों की जिम्मेदारी तो है ही। नौसड़ चौराहे के पास एक खाली दुकान में सामान रखा है। खाना पकाने के लिए प्लास्टिक का तंबु बनाया है, लेकिन उसने भी शनिवार दोपहर हुई बारिश में धोखा दे दिया। पका हुआ खाना खराब हो गया। किस्मत को कोसती शकुंतला कहती हैं, ‘पिछली बार बाढ़ से जब घर उजड़ा तो फिर से बसाने में चार साल लग गए। शासन-प्रशासन ने कोई मदद नहीं की। मजदूर वर्ग के लिए पेट भरना ज्यादा जरूरी होता है ‘साहब’। तिनका-तिनका जोड़कर बनाया आशियाना एक पल में उजड़ गया था। इस बार भी पता नहीं भगवान को क्या मंजूर है। राप्ती का बढ़ता जलस्तर इस बार भी वैसा ही खौफ पैदा कर रहा है।’ शकुंतला जैसी स्थिति इलाके के कई लोगोें की है। मंझरिया, कठउर, सेमरा समेत कई इलाकों के लोगों ने या तो बंधे पर शरण ले ली है या फोरलेन पर।
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घरों से पलायन करने लोग
राप्ती के तटबंधों से सटे गांवों के बाद नदी का जलस्तर शहर के भी कुछ इलाकों को डुबोने लगा है। राप्ती बंधे से सटे लहेसड़ी, डोहइयां, डांगीपार, नदुआ, मिर्जापुर, सनहा, अजवनियां, ऊंचगांव, नौसड़, पथरा, खिरवनिया, डोमवां ढाला, सेंदुली बेंदुली के लोगों ने राप्ती के रौद्र रूप को देखते हुए सुरक्षित स्थानों पर जाना शुरू कर दिया है। मंझरिया, सेमरा देवी प्रसाद उर्फ कठउर आदि क्षेत्र के कई गांव पानी में पूरी तरह से डूब गए हैं। कठउर के सदानंद शनिवार दोपहर पत्नी और बच्चों को पादरी बाजार स्थित अपने रिश्तेदार के घर पहुंचाने निकले। मंझरिया की सीता देवी भी परिवार के साथ रिश्तेदार के घर चली गईं। 
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कई इलाकों में पहुंचा राप्ती का पानी
हर घंटे राप्ती का जलस्तर बढ़ने के साथ शहर के कुछ इलाकों में पानी भरना शुरू हो गया है। नौसड़ से राप्ती पुल के बीच के कई गलियां पानी में पूरी तरह डूब गई हैं। गायत्री पीठ, शिव मंदिर आदि पूरी तरह जलमग्न हैं। राप्ती पुल से ट्रांसपोर्टनगर तक के बीच स्थित अघोरपीठ भी पूरा तरह से पानी में समा गया है। पीठ के लोग दूसरी मंजिल पर शरण लिए हुए हैं। लोग जुगाड़ के जरिए बाहर निकल रहे हैं। 

अफवाह के बाद नौसड़ में उमड़ी भीड़
सोशल मीडिया पर नौसड़ में कटान की सूचना के बाद उसे देखने पूरा शहर उमड़ पड़ा। शुक्रवार रात से नौसड़ बंधे के कटने की अफवाह फैलनी शुरू हुई। नेशनल हाइवे के बीच से पानी के बुलबुले निकलने के बाद अफवाह को और बल मिल गया। इस सूचना के बाद पूरे शहर में हर जुबां पर यही चर्चा थी। दहशत में रहे कई लोगों ने तो पूरी रात जागकर गुजारी। सुबह होते ही नौसड़ में लोग पहुंचने शुरू हो गए। बढ़े जलस्तर को देखकर सबकी सांसें अटक गईं, लेकिन कटान न होता देख लोगों को थोड़ी राहत मिली।


प्रशासन की सुस्ती के बाद लोगों ने संभाला मोर्चा
नौसड़ में शुक्रवार से ही कटान की अफवाह फैली हुई थी। दरअसल कटान वाली स्थिति तो नहीं थी, लेकिन जलस्तर बढ़ने से बंधे की ऊंचाई कम पड़ने लगी थी। अगर जलस्तर थोड़ा सा भी बढ़ जाता तो नदी का पानी सड़क पार करने लगता। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई भी मौके पर नहीं पहुंचा। ऐसे में आसपास के युवाओं ने खुद ही मोर्चा संभाल लिया। दीपक, संजय, राजन, अमर, सूरज, लल्लू, रामचंद्र, बघाड़ बाबू, जितेंद्र तिवारी, रामभवन निषाद समेत कई लोगों ने खुद ही मिट्टी की व्यवस्था कर बोरियां भर-भरकर कटान वाले स्थान को भरना शुरू कर दिया। संजय ने बताया कि करीब 13 ट्रैक्टर-ट्रॉली मिट्टी का इंतजाम किया गया। 
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