{"_id":"575ae3454f1c1b1f349c6691","slug":"gorakhpur-top-the-human-day","type":"story","status":"publish","title_hn":"मानव दिवस सृजन में जिला अव्वल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मानव दिवस सृजन में जिला अव्वल
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Fri, 10 Jun 2016 09:26 PM IST
विज्ञापन
श्रमिक
मनरेगा के तहत काम करने वाले श्रमिकों के दिवसों के सृजन में जिले ने 134 प्रतिशत की सफलता हासिल की है। इस लिहाज से विभाग वार्षिक लक्ष्य को आगामी मार्च से पहले ही पूरा कर लेगा। गांव में निवास करने वाले गरीब तबके के बेरोजगार महिलाओं और पुरुषों को सौ दिन का रोजगार उपलब्ध कराने की केंद्र सरकार की योजना मनरेगा जिले में चल रही है।
इसका मकसद है, ग्रामीणों को रोजगार के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े और रोजगार के अभाव में गांवों से शहरों की ओर हो रहे प्लायन को रोकना। इस कड़ी में विकास विभाग ने जिले में अच्छी सफलता हासिल कर लोगों को रोजगार मुहैया करवाया है। वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए विकास विभाग को वार्षिक लक्ष्य 31 लाख 28 हजार निर्धारित था। मई माह तक विभाग को दो लाख 88 हजार दिवसों का सृजन करना था। इस लक्ष्य को पीछे छोड़ते हुए विभाग ने चार लाख 62 हजार मानव दिवसों का सृजन किया है, जो पूरे जिले का 134 फीसदी है।
जानकारों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के तहत लोग काम करने के इच्छुक हैं। अभी हाल ही में पंचायत चुनाव हुए हैं और ज्यादातर ग्राम प्रधान नए चुने गए हैं। इसलिए ग्राम प्रधान पूरी ईमानदारी के साथ मनरेगा के कार्यों को अंजाम दे रहे हैं। जिला विकास अधिकारी डॉ. बब्बन उपाध्याय ने बताया कि मनरेगा के कार्यों की मानीटरिंग ऊपर स्तर से हो रही है। इसलिए इसमें विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
विज्ञापन
सभी खंड विकास अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वह स्वयं जाकर मनरेगा के कार्यों का स्थलीय निरीक्षण करें और रिपोर्ट दें। बताया कि अधिकारियों के ठीक ढंग से काम करने की वजह मई माह में लक्ष्य से अधिक सफलता हासिल की है।
विज्ञापन
इसका मकसद है, ग्रामीणों को रोजगार के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े और रोजगार के अभाव में गांवों से शहरों की ओर हो रहे प्लायन को रोकना। इस कड़ी में विकास विभाग ने जिले में अच्छी सफलता हासिल कर लोगों को रोजगार मुहैया करवाया है। वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए विकास विभाग को वार्षिक लक्ष्य 31 लाख 28 हजार निर्धारित था। मई माह तक विभाग को दो लाख 88 हजार दिवसों का सृजन करना था। इस लक्ष्य को पीछे छोड़ते हुए विभाग ने चार लाख 62 हजार मानव दिवसों का सृजन किया है, जो पूरे जिले का 134 फीसदी है।
विज्ञापन
जानकारों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के तहत लोग काम करने के इच्छुक हैं। अभी हाल ही में पंचायत चुनाव हुए हैं और ज्यादातर ग्राम प्रधान नए चुने गए हैं। इसलिए ग्राम प्रधान पूरी ईमानदारी के साथ मनरेगा के कार्यों को अंजाम दे रहे हैं। जिला विकास अधिकारी डॉ. बब्बन उपाध्याय ने बताया कि मनरेगा के कार्यों की मानीटरिंग ऊपर स्तर से हो रही है। इसलिए इसमें विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
विज्ञापन
सभी खंड विकास अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वह स्वयं जाकर मनरेगा के कार्यों का स्थलीय निरीक्षण करें और रिपोर्ट दें। बताया कि अधिकारियों के ठीक ढंग से काम करने की वजह मई माह में लक्ष्य से अधिक सफलता हासिल की है।