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जीडीए ने खत्म किया वाह्य विकास शुल्क
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Thu, 08 Jun 2017 01:53 AM IST
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जीडीए बोर्ड की बैठक करते कमिश्नर, डीएम और वीसी।
- फोटो : Amar Ujala
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शहरी क्षेत्र मेें अब मानचित्र स्वीकृत कराते समय वाह्य विकास शुल्क (एक्सटरनल डेवलपमेंट चार्ज) नहीं देना पड़ेगा। इस शुल्क के नाम पर गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) अब तक 50 पैसा प्रति वर्ग फीट की दर से चार्ज वसूल रहा था। बुधवार को कमिश्नर सभागार में हुई प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में इस शुल्क क ो न वसूलने का निर्णय किया गया।
मानचित्र स्वीकृत कराने के लिए लगने वाले शुल्क को लेकर प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई नई नियमावली को अंगीकृत किए जाने के बाद सभी शुल्क व चार्ज एक में ही समाहित करते हुए 700 रुपये प्रति वर्ग मीटर शुल्क तय किया गया था। यह राशि तो जीडीए द्वारा ली ही जा रही है, साथ में ही वाह्य विकास शुल्क भी लिया जा रहा था। सड़क, सीवर, बिजली आदि सुविधाओं के लिए यह शुल्क लिया जाता था। अब पुराना शुल्क (50 पैसे प्रति वर्ग फीट) नहीं लिया जाएगा। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू होगी।
लैंड यूज बदलने का मामला लटका
बरगदवां स्थित उद्योगपति चंद्र प्रकाश अग्रवाल की औद्योगिक जमीन का लैंड यूज बदलकर आवासीय करने के मामले में बोर्ड ने पहले जमीन के बीच पड़ने वाले जलाशय की जांच कराकर शासन को फाइल बढ़ाने का निर्णय किया। इस जमीन पर चंद्र प्रकाश अग्रवाल की प्रधानमंत्री आवास बनाने की योजना है।
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सवा एकड़ में सर्विस अपार्टमेंट
बुद्ध विहार में सर्विस अपार्टमेंट के लिए सवा एकड़ जमीन मुहैया कराने पर भी बोर्ड की सहमति बन गई।
बजट मंजूर
जीडीए के बढ़े हुए बजट को भी बोर्ड के सदस्यों ने अपनी रजामंदी दे दी। अब जीडीए की वार्षिक आय जहां 318.91 करोड़ से बढ़कर 339.91 करोड़ कर दी गई है वहीं व्यय 313.4 करोड़ से बढ़ाकर 339.14 करोड़ कर दिया गया है।
कालोनियों में बढ़ेंगी सुविधाएं
नौ अवैध कालोनियों में सड़क, बिजली, पानी, सीवर समेत सभी खामियां दुरुस्त कर उसे निगम को हैंडओवर करने के लिए जीडीए को दो महीने के भीतर ही अपना बजट बढ़ाने की जरूरत पड़ी।
मानबेला के बढ़े मुआवजे को जीडीए बोर्ड की भी मंजूरी
मानबेला के किसानों को 70 लाख प्रति हेक्टेअर के मुआवजे के प्रस्ताव पर कमिश्नर की अध्यक्षता वाली कमेटी की मुहर लगने के बाद बुधवार को जीडीए बोर्ड ने भी इसे मंजूरी दे दी। अब किसानों को 28 लाख प्रति हेक्टेअर से बढ़ाकर 70 लाख प्रति हेक्टेअर के मुआवजे की राह पूरी तरह साफ हो गई है। बोर्ड ने अब इस मामले को शासन को भेजने का निर्णय किया है। वहां से स्वीकृति मिलते ही किसानाें को बढ़ा हुआ मुआवजा वितरित किया जाने लगेगा। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री की पहल पर ही जीडीए और किसानों के बीच समझौता हुआ है, लिहाजा शासन की स्वीकृति सिर्फ औपचारिकता ही रह गई है।
14 साल पहले जीडीए ने मानबेला की करीब 225 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया था। 2005 में जब प्राधिकरण ने कब्जा लेने की कोशिश शुरू की तो किसान आंदोलनरत हो गए। उनका कहना था कि मुआवजे की राशि काफी कम है। 2008 में कब्जे को लेकर किसानों पर लाठीचार्ज हुआ तो सांसद रहते हुए योगी आदित्यनाथ किसानों के पक्ष में आ खड़े हुए। योगी के सीएम बनने के बाद से ही किसानों को उनके पक्ष में निर्णय आने की उम्मीद मजबूत हो गई। पिछले दिनों मानबेला के किसानों का प्रतिनिधिमंडल सीएम से मिला तो उन्होंने प्रति हेक्टेअर दिए जाने वाले 28 लाख के मुआवजे को बढ़ाकर 70 लाख रुपये कर दिया। जीडीए के साथ ही किसान भी इसपर राजी हो गए। बाकी बची मंडलीय समिति और जीडीए बोर्ड की औपचारिकता भी अब पूरी हो गई। सिर्फ शासन की स्वीकृति का ही अब इंतजार है।
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मानचित्र स्वीकृत कराने के लिए लगने वाले शुल्क को लेकर प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई नई नियमावली को अंगीकृत किए जाने के बाद सभी शुल्क व चार्ज एक में ही समाहित करते हुए 700 रुपये प्रति वर्ग मीटर शुल्क तय किया गया था। यह राशि तो जीडीए द्वारा ली ही जा रही है, साथ में ही वाह्य विकास शुल्क भी लिया जा रहा था। सड़क, सीवर, बिजली आदि सुविधाओं के लिए यह शुल्क लिया जाता था। अब पुराना शुल्क (50 पैसे प्रति वर्ग फीट) नहीं लिया जाएगा। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू होगी।
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लैंड यूज बदलने का मामला लटका
बरगदवां स्थित उद्योगपति चंद्र प्रकाश अग्रवाल की औद्योगिक जमीन का लैंड यूज बदलकर आवासीय करने के मामले में बोर्ड ने पहले जमीन के बीच पड़ने वाले जलाशय की जांच कराकर शासन को फाइल बढ़ाने का निर्णय किया। इस जमीन पर चंद्र प्रकाश अग्रवाल की प्रधानमंत्री आवास बनाने की योजना है।
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सवा एकड़ में सर्विस अपार्टमेंट
बुद्ध विहार में सर्विस अपार्टमेंट के लिए सवा एकड़ जमीन मुहैया कराने पर भी बोर्ड की सहमति बन गई।
बजट मंजूर
जीडीए के बढ़े हुए बजट को भी बोर्ड के सदस्यों ने अपनी रजामंदी दे दी। अब जीडीए की वार्षिक आय जहां 318.91 करोड़ से बढ़कर 339.91 करोड़ कर दी गई है वहीं व्यय 313.4 करोड़ से बढ़ाकर 339.14 करोड़ कर दिया गया है।
कालोनियों में बढ़ेंगी सुविधाएं
नौ अवैध कालोनियों में सड़क, बिजली, पानी, सीवर समेत सभी खामियां दुरुस्त कर उसे निगम को हैंडओवर करने के लिए जीडीए को दो महीने के भीतर ही अपना बजट बढ़ाने की जरूरत पड़ी।
मानबेला के बढ़े मुआवजे को जीडीए बोर्ड की भी मंजूरी
मानबेला के किसानों को 70 लाख प्रति हेक्टेअर के मुआवजे के प्रस्ताव पर कमिश्नर की अध्यक्षता वाली कमेटी की मुहर लगने के बाद बुधवार को जीडीए बोर्ड ने भी इसे मंजूरी दे दी। अब किसानों को 28 लाख प्रति हेक्टेअर से बढ़ाकर 70 लाख प्रति हेक्टेअर के मुआवजे की राह पूरी तरह साफ हो गई है। बोर्ड ने अब इस मामले को शासन को भेजने का निर्णय किया है। वहां से स्वीकृति मिलते ही किसानाें को बढ़ा हुआ मुआवजा वितरित किया जाने लगेगा। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री की पहल पर ही जीडीए और किसानों के बीच समझौता हुआ है, लिहाजा शासन की स्वीकृति सिर्फ औपचारिकता ही रह गई है।
14 साल पहले जीडीए ने मानबेला की करीब 225 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया था। 2005 में जब प्राधिकरण ने कब्जा लेने की कोशिश शुरू की तो किसान आंदोलनरत हो गए। उनका कहना था कि मुआवजे की राशि काफी कम है। 2008 में कब्जे को लेकर किसानों पर लाठीचार्ज हुआ तो सांसद रहते हुए योगी आदित्यनाथ किसानों के पक्ष में आ खड़े हुए। योगी के सीएम बनने के बाद से ही किसानों को उनके पक्ष में निर्णय आने की उम्मीद मजबूत हो गई। पिछले दिनों मानबेला के किसानों का प्रतिनिधिमंडल सीएम से मिला तो उन्होंने प्रति हेक्टेअर दिए जाने वाले 28 लाख के मुआवजे को बढ़ाकर 70 लाख रुपये कर दिया। जीडीए के साथ ही किसान भी इसपर राजी हो गए। बाकी बची मंडलीय समिति और जीडीए बोर्ड की औपचारिकता भी अब पूरी हो गई। सिर्फ शासन की स्वीकृति का ही अब इंतजार है।