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गोरखपुरः टेलीकॉम कंपनियों से लोगों का मोह भंग, सीमावर्ती क्षेत्र में दिक्कत, नेपाल को हो रहा फायदा
Mon, 29 Jul 2019 04:25 PM IST
प्रशांत कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Mon, 29 Jul 2019 04:25 PM IST
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नेटवर्क की समस्या
भारत-नेपाल सीमावर्ती इलाकों में नेटवर्क की आवाजाही से उपभोक्ताओं का मोह भंग अब भारतीय टेलीकॉम कंपनियों से होने लगा है। किसी मोबाइल कंपनी का नेटवर्क काम न करने से लोग नेपाली सिम का लोग धडल्ले से उपयोग कर रहे हैं। जिसका फायदा नेपाल की टेलीकॉम कंपनियां उठा रही हैं। ज्यादातर लोग नेपाली कंपनियों के सीम का प्रयोग करते हैं। नेेपाली सीम से बात करने में कुछ खास नुकसान नहीं होता है। नेपाल से नेपाल में बात करने में 10 सकेंंड का 83 पैसा नेपाली लगता है। जबकि नेपाल से भारत में बात करने में एक मिनट का 3.72 पैसार नेेपाली लगता है। अगर भारत से नेपाल बात किया जाय तो 11 से 14 रुपये प्रति मिनट भारतीय रुपये लगते हैं।
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भारत नेपाल सीमा सटे होने के कारण गोरखपुर के ठूठीबारी, झुलनीपुर, भगवानपुर, बरगदवां, सोनौली, खनुआ, बहुआर, रेंगहिया, निपनियां, राजाबारी, मरचहवां, सेखुआनी, बैरियां, लक्ष्मीपुर समेत अन्य गांवों में भारतीय टेलीकॉम के किसी भी कंपनी का मोबाइल सेवा काम नहीं करने से लोगों की समस्या काफी बढ़ गई है। ठूठीबारी कस्बे में लोगों को बात करने के लिए कस्बे से एक किलोमीटर बाहर जाना पड़ता है। जबकि स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब दो साल से दिक्कतें ज्यादा हो रही है। पहले कुछ काम भी करता था, लेकिन इधर वह भी काम करना बंद कर दिया है।
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मोबाइल नेटवर्क नहीं रहने से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।जिसके कारण भारतीय मोबाइल नेटवर्क कंपनियों से मोह भंग होता जा रहा है। ऐसे में नेपाल की टेलीकॉम कंपनियों का प्रयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है। जानकारों की माने तो इससे सुरक्षा को भी खतरा है।
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भारतीय क्षेत्र में नेपाली सीमा का करने से आपराधिक कार्यो के लिए देश विरोधी तत्व नेपाली सीमा का प्रयोग करते हैं। ऐसे में उनकी हलचल की जानकारी सुरक्षा एजेंसियों को नहीं हो पाती है। बीते लोक सभा चुनाव में तो सीमावर्ती क्षेत्र में वायरलेस टीम लगानी पडी क्योंकि सीमावर्ती क्षेत्र में नेटवर्क नहीं मिल रहा था। कुछ हिस्सों को प्रशासन सैडो एरिया घोषित कर दिया है। जिलाधिकारी अमरनाथ उपाध्याय ने बताया कि भारत नेपाल के अधिकारियों की होने वाली बैठक में इस समस्या को उठाया जाएगा। दूर संचार विभाग के अधिकारियों से इस मसले पर वार्ता की जाएगी। इसके लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।