गोरखपुर : घाघरा नदी के तट पर एक साथ जलीं पांच चिताएं
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गोरखपुर में बेलघाट के बेइली खुर्द गांव में होली के दिन खुशियों का जश्न नहीं बल्कि मातम सी उदासी छाई रहीं। घाघरा तट पर पांच छात्रों की चिताएं एक साथ जलीं तो सबकी आंखें नम हो गई। कुदरत के इस फैसले के आगे विवश सभी एक दूसरे को ढांढस बंधाते रहें।
दरअसल, बुधवार को नदी में नहाने गए गांव के पांच युवकों की डूबने से मौत हो गई। सभी चचेरे भाई थे। गोरखपुर के बेलघाट थाना क्षेत्र स्थित बेइली खुर्द गांव के समीप सरयू नदी में कृष्णमुरारी शुक्ल का 14 वर्षीय बेटा सत्यम 8वीं का छात्र था। वह गोरखपुर में पढ़ता था।
कृष्णमुरारी के भाई मदन मुरारी शुक्ला का 19 वर्षीय बेटा सौरभ गोरखपुर में ही बीएससी का छात्र था। तीन दिन पहले होली की छुट्टी पर दोनों घर गए थे। गांव के ही ध्रुव नारायण शुक्ल का 16 वर्षीय बेटा नितेश भी गोरखपुर में पढ़ता था। वह भी होली पर ही गांव गया था। ध्रुव नारायण के भाई दिनेश शुक्ल का 17 वर्षीय बेटा अमन बेलघाट में इंटरमीडिएट का छात्र था।
उरुवा थाना क्षेत्र स्थित परसा तिवारी निवासी सूर्यपति त्रिपाठी का 18 वर्षीय बेटा आदर्श मुंबई में मेडिकल छात्र था। वह गांव आया था। वह दो दिन पहले वह भी अपने ननिहाल मदन शुक्ल के घर गया था। बुधवार को तकरीबन डेढ़ बजे पांचों घर से घूमने निकले थे। देर शाम तक जब वे घर नहीं लौटे तो परिवारीजनों को चिंता हुई। परिवारीजन उनकी तलाश करने लगे। इस बीच कुछ ग्रामीण उन्हें ढूंढते हुए गांव से तकरीबन 500 मीटर दूरी पर बह रही सरयू नदी के किनारे पहुंचे।
लोगों ने किशोरों के मोबाइल नंबर पर डायल किया। मोबाइल बजता सुनाई दिया। लोग आवाज को महसूस करते हुए उधर गए तो एक स्थान पर पांचों युवकों के कपड़े पड़े थे। कपड़ों में ही उनका मोबाइल भी था। लोग परेशान हो गए। यह आशंका हुई कि सभी किशोर नदी में स्नान करने गए होंगे और डूब गए होंगे। इसके बाद लोगों ने शवों को बाहर निकाला।
ग्रामीणों ने निकाले थे शव
किशोरों के नदी में डूबने की खबर पूरे गांव में फैल गई। गांव के कुछ लोग जाल लेकर नदी में उतर गए। इस बीच सूचना पुलिस को दे दी गई। पुलिस जब तक मौके पर पहुंचती और गोताखोरों को बुलवाती इसके पहले ही ग्रामीणों ने सरयू का पानी छानकर सत्यम की लाश बरामद कर ली। देर रात तक सभी लाशें नदी में मिल गईं।
किसी घर में नहीं मनी होली
गांव के पांच बच्चों की मौत से मातम छा गया था। पूरे गांव में किसी ने भी होली का त्योहार नहीं मनाया। सभी की आंखें नम थी और मृत बच्चों के घर पर ही लोग जुटकर उन्हें ढांढस बंधाते रहें। वहीं खजनी विधायक संत प्रसाद समेत कई जनप्रतिनिधि भी घर पहुंचकर ढांढस बंधाए।
पूरी जिंदगी फीकी ही रहेगी पांच परिवारों की होली
एक साथ पांच परिवारों की होली में मातम छाया। परिवार के लोग भी इस दुख की घड़ी में फफक कर यही बोल रहे थे कि यहीं होली नहीं अब तो पूरी जिंदगी की होली ही खराब हो गई है। होली के समय इस सदमे को भूल पाना अब जीवन में संभव नहीं है। जब भी होली का त्योहार आएगा परिवार में दुख के इस दिन की याद ताजा हो जाएगी। आसपास के इलाकों में भी कुछ यही माहौल रहा। जिसने भी सुना सभी हैरान थे। कोई उनके बचपन को कोसता तो कोई अनहोनी को टाले न जाने की बात कहकर अपने मन को तसल्ली देता।