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गुनाहों की माफी का महीना है रमजान
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sat, 11 Jun 2016 12:42 AM IST
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रमजान के पहले जुमे पर नमाज अदा करते रोजेदार।
- फोटो : amar ujala
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रमजान के पहले जुमे की शाम अकीदतमंदों ने नमाज अताकर गुनाहों की माफी मांगी और अल्लाह के इबादत की चर्चा की। गाजी रौजा मोहल्ले में देर शाम गाजी मस्जिद के मौलाना हाफिज रियाज अहमद ने नमाज अता कराई और जायरीनों को रमजान के पहले जुमे के महत्व से अवगत करवाया।
उन्होंने कहा कि रमजान शरीफ का पहला असरा है और आज पहले असरे का पहला जुमा है। इसमें अल्लाहताला ने रहमत रखी है। बंदे को रब के रहमत का तलबगार रहना चाहिए। मौलाना की तकरीर पर गौर फरमाते हुए बीफॉर्मा के छात्र असहर उस्मानी ने अपनी जिज्ञासाओं को शांत किया और पहले जुमे के महत्व के बारे में विस्तार से जाना।
मौलाना ने सभी को बताया कि ज्यादा से ज्यादा अल्लाह की इबादत करें। अपने गुनाहों की माफी मांगे। इस माह में जो दुआ मांगेंगे, अल्लाहताला सब कुबूल करेंगे। मछली के कारोबारी अली अहमद ने रमजान माह के चौथे रोजे के बारे में वहां मौजूद एक-दूसरे से मंथन किया और अपनी बातों को साझा करते हुए सभी से दुआएं मांगने की वकालत की।
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साथ ही खान-पान पर भी चर्चा की।
जमाल साहब, सैय्यद, मुख्तार, डा. शफी आदि के साथ बच्चे भी गाजी मस्जिद में नमाज अता करने पहुंचे थे। साजिद, नादिर, असलम आदि बच्चे आपस में बातें कर रहे थे कि प्यास तो लगी है, मगर रमजान माह में अल्लाह के लिए वह हर दर्द सहने को तैयार हैं। मोहल्ले में मस्जिद से थोड़ी दूर रंग-बिरंगी रोशनियों के बीच सजी दुकानों पर चर्चा करते हुए डा. शफी रहमान, मो. रफी, मो. जकी सिद्दीकी, मुबारक आदि रमजान के पहले जुमे पर अल्लाहताला से मांगी जाने वाली दुआओं के महत्व पर एक-दूसरे से चर्चा करते हुए नजर आए।
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उन्होंने कहा कि रमजान शरीफ का पहला असरा है और आज पहले असरे का पहला जुमा है। इसमें अल्लाहताला ने रहमत रखी है। बंदे को रब के रहमत का तलबगार रहना चाहिए। मौलाना की तकरीर पर गौर फरमाते हुए बीफॉर्मा के छात्र असहर उस्मानी ने अपनी जिज्ञासाओं को शांत किया और पहले जुमे के महत्व के बारे में विस्तार से जाना।
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मौलाना ने सभी को बताया कि ज्यादा से ज्यादा अल्लाह की इबादत करें। अपने गुनाहों की माफी मांगे। इस माह में जो दुआ मांगेंगे, अल्लाहताला सब कुबूल करेंगे। मछली के कारोबारी अली अहमद ने रमजान माह के चौथे रोजे के बारे में वहां मौजूद एक-दूसरे से मंथन किया और अपनी बातों को साझा करते हुए सभी से दुआएं मांगने की वकालत की।
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साथ ही खान-पान पर भी चर्चा की।
जमाल साहब, सैय्यद, मुख्तार, डा. शफी आदि के साथ बच्चे भी गाजी मस्जिद में नमाज अता करने पहुंचे थे। साजिद, नादिर, असलम आदि बच्चे आपस में बातें कर रहे थे कि प्यास तो लगी है, मगर रमजान माह में अल्लाह के लिए वह हर दर्द सहने को तैयार हैं। मोहल्ले में मस्जिद से थोड़ी दूर रंग-बिरंगी रोशनियों के बीच सजी दुकानों पर चर्चा करते हुए डा. शफी रहमान, मो. रफी, मो. जकी सिद्दीकी, मुबारक आदि रमजान के पहले जुमे पर अल्लाहताला से मांगी जाने वाली दुआओं के महत्व पर एक-दूसरे से चर्चा करते हुए नजर आए।