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इंसेफलाइटिस वार्ड में आग से अफरा-तफरी
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 20 Dec 2015 08:51 PM IST
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के 100 बेड के इंसेफलाइटिस वार्ड में रविवार की शाम पांच बजे ऑक्सीजन सिलिंडर बदलने के दौरान आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। आसपास के मरीज और तीमारदार इधर-उधर भागने लगे। हालांकि टेक्नीशियन ने सूझबूझ का परिचय देते हुए कुछ ही देर में आग पर काबू कर लिया और बड़ा हादसा टल गया, लेकिन इस दौरान उनका हाथ बुरी तरह झुलस गया।
इंसेफलाइटिस वार्ड में ऑक्सीजन के लिए दो तरह की व्यवस्था है। एक सेंट्रल ऑक्सीजन है और दूसरा सिलिंडर के भरोसे चलता है। रविवार की शाम पांच बजे के करीब एक मरीज का ऑक्सीजन सिलिंडर खत्म हो गया। सूचना मिलते ही टेक्नीशियन बलवंत गुप्ता तत्काल सिलिंडर लेकर पहुंचे और उसे बदलने लगे। इसी दौरान अचानक सिलिंडर में आग लग गई। हादसे के बाद आसपास के मरीज और तीमारदार भागने लगे।
टेक्नीशियन ने साहस का परिचय देते हुए तत्काल आग पर काबू कर लिया, लेकिन इस दौरान उनका हाथ बुरी तरह से झुलस गया। टेक्नीशियन बलवंत का कहना है कि हर महीने सिलिंडर की सर्विस होनी चाहिए और छह महीने में नॉब बदलना चाहिए मगर ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली फर्म के जिम्मेदार लोग इस ओर ध्यान नहीं देते। यदि इस मुद्दे पर अफसर नहीं चेते तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
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इंसेफलाइटिस वार्ड में ऑक्सीजन के लिए दो तरह की व्यवस्था है। एक सेंट्रल ऑक्सीजन है और दूसरा सिलिंडर के भरोसे चलता है। रविवार की शाम पांच बजे के करीब एक मरीज का ऑक्सीजन सिलिंडर खत्म हो गया। सूचना मिलते ही टेक्नीशियन बलवंत गुप्ता तत्काल सिलिंडर लेकर पहुंचे और उसे बदलने लगे। इसी दौरान अचानक सिलिंडर में आग लग गई। हादसे के बाद आसपास के मरीज और तीमारदार भागने लगे।
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टेक्नीशियन ने साहस का परिचय देते हुए तत्काल आग पर काबू कर लिया, लेकिन इस दौरान उनका हाथ बुरी तरह से झुलस गया। टेक्नीशियन बलवंत का कहना है कि हर महीने सिलिंडर की सर्विस होनी चाहिए और छह महीने में नॉब बदलना चाहिए मगर ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली फर्म के जिम्मेदार लोग इस ओर ध्यान नहीं देते। यदि इस मुद्दे पर अफसर नहीं चेते तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
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