{"_id":"5dea60758ebc3e1bee07fb3d","slug":"exclusive-interview-of-famlous-industrialist-chandra-prakash-aggarwal-gallantt-group","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"उद्योगपति ने गिनाई नाकामियां, बोले-अब न चेते अफसर तो यूपी में नहीं करूंगा 1100 करोड़ का निवेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उद्योगपति ने गिनाई नाकामियां, बोले-अब न चेते अफसर तो यूपी में नहीं करूंगा 1100 करोड़ का निवेश
Mon, 09 Dec 2019 10:47 AM IST
विजय जैन
संतोष कुमार सिंह, गोरखपुर।
संतोष कुमार सिंह, गोरखपुर।
Published by: विजय जैन
Updated Mon, 09 Dec 2019 10:47 AM IST
सार
- प्रमुख उद्योगपति चंद्र प्रकाश अग्रवाल उर्फ चंदू बाबू ने कहा यूपी में लाखों करोड़ का निवेश हुआ तो उसकी झलक गोरखपुर में भी दिखनी चाहिए थी
विज्ञापन
प्रतिष्ठित उद्योगपति चंद्र प्रकाश अग्रवाल उर्फ चंदू बाबू से खास बातचीत।
- फोटो : amarujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
फिक्की और गीडा के संयुक्त उद्यमी सम्मेलन के दौरान बुधवार को सर्किट हाउस में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने राज्य सरकार के अफसरों को घेरने वाले शहर के प्रतिष्ठित उद्योगपति चंद्र प्रकाश अग्रवाल उर्फ चंदू बाबू बृहस्पतिवार को और मुखर हो गए।
अमर उजाला के मुख्य संवाददाता संतोष सिंह ने कुरेदा तो उद्योगपति ने एक-एक करके अफसरों की नाकामियां गिनानी शुरू कर दीं। बोले, गोरखपुर में 1100 करोड़ रुपये का निवेश करना है। पांच और चार सितारा होटल बनाने के साथ ही गैलेंट इस्पात का विस्तार करना है।
प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 5000 लोगों को रोजगार मिलेगा, फिर भी मामला जहां का तहां फंसा है। सरकार ने कोई ठोस पहल नहीं की तो 1100 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट निरस्त करने का विकल्प ही बचेगा। एक बात और।
विज्ञापन
यूपी की नौकरशाही औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार से संबंधित जो आंकड़े दिखा रही है, उन पर मुझे संदेह है। आंकड़े अफसरों की सूचना पर आधारित हैं। यदि यूपी में लाखों करोड़ रुपये का निवेश हुआ तो उसकी झलक गोरखपुर में दिखाई देनी चाहिए। यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृह जनपद है। मेरी जानकारी के अनुसार गोरखपुर में गैलेंटइस्पात समूह ने 400 करोड़ रुपये का निवेश किया है। संभवत: 200-300 करोड़ और निवेश किए गए हैं।
यदि औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार का आंकड़ा सही होता तो गोरखपुर में 5000 करोड़ रुपये के निवेश की झलक दिखनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं है। जाने-माने उद्यमी ने सरकारी व्यवस्था और खामियों से संबंधित हर सवाल का बेबाकी से जवाब दिया। पेश है चंद्र प्रकाश अग्रवाल से बातचीत के अंश-
विज्ञापन
अमर उजाला के मुख्य संवाददाता संतोष सिंह ने कुरेदा तो उद्योगपति ने एक-एक करके अफसरों की नाकामियां गिनानी शुरू कर दीं। बोले, गोरखपुर में 1100 करोड़ रुपये का निवेश करना है। पांच और चार सितारा होटल बनाने के साथ ही गैलेंट इस्पात का विस्तार करना है।
विज्ञापन
प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 5000 लोगों को रोजगार मिलेगा, फिर भी मामला जहां का तहां फंसा है। सरकार ने कोई ठोस पहल नहीं की तो 1100 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट निरस्त करने का विकल्प ही बचेगा। एक बात और।
विज्ञापन
यूपी की नौकरशाही औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार से संबंधित जो आंकड़े दिखा रही है, उन पर मुझे संदेह है। आंकड़े अफसरों की सूचना पर आधारित हैं। यदि यूपी में लाखों करोड़ रुपये का निवेश हुआ तो उसकी झलक गोरखपुर में दिखाई देनी चाहिए। यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृह जनपद है। मेरी जानकारी के अनुसार गोरखपुर में गैलेंटइस्पात समूह ने 400 करोड़ रुपये का निवेश किया है। संभवत: 200-300 करोड़ और निवेश किए गए हैं।
यदि औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार का आंकड़ा सही होता तो गोरखपुर में 5000 करोड़ रुपये के निवेश की झलक दिखनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं है। जाने-माने उद्यमी ने सरकारी व्यवस्था और खामियों से संबंधित हर सवाल का बेबाकी से जवाब दिया। पेश है चंद्र प्रकाश अग्रवाल से बातचीत के अंश-
सवाल : अफसरों से आपकी नाराजगी ज्यादा है। दावा है कि भ्रष्टाचार कम हुआ, आप क्या कहेंगे?
जवाब : आप सही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ईमानदारी से काम रहे हैं। 16-18 घंटे काम करके यूपी के विकास की नींव मजबूत करना चाहते हैं। यह कहने में तनिक संकोच नहीं है कि उच्च स्तर पर भ्रष्टाचार नहीं है। यह भी सही है कि निचले स्तर पर भ्रष्टाचार बढ़ा है। सरकार ने भले ही पारदर्शी योजनाएं बनाईं पर क्त्रिस्यान्वयन में बड़ी खामी है। मुख्यमंत्री कहते हैं कि अफसर निर्णय लें और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करें, लेकिन इसका अनुपालन नहीं हो रहा।
ऐसा लगता है सरकार की जांच कराने की प्रवृत्ति से अफसर डरे हैं। नीति निर्माता अफसर भी कुछ नहीं कर रहे हैं। सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए कि नीति निर्माता अफसर जो फैसला करें, उसे उच्च स्तर से अनुमोदित करा लिया जाए। ऐसा हुआ तो अफसरों में कार्रवाई या फिर जांच का डर नहीं रहेगा। काम तेजी से हो सकेगा। जो अफसर काम करेंगे, उनसे गलती भी
स्वाभाविक है। एक अफसर ने व्यक्तिगत तौर पर मुझसे कहा था कि आपके प्रोजेक्ट सही हैं। नियमानुसार सब कुछ किया जा सकता है, लेकिन आप न्यायपालिका का सहारा लें तो ज्यादा ठीक रहेगा। इस तरह के भय का वातावरण स्वस्थ लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है।
सवाल : औद्योगिक विकास और प्रोत्साहन की नीतियों पर आपने सवाल उठाए, ऐसा क्यों?
जवाब : आप ही सोचिए। ‘पिकप’ औद्योगिक विकास और निवेश की नोडल एजेंसी है। बीमारू संस्था कुछ कर सकती है क्या? सेवानिवृत्त के बाद पिकप में अफसर काम कर रहे हैं। विशेषज्ञता और प्रोफेशनलिज्म का अभाव है। यूपी की प्रोत्साहन नीति सर्वोत्कृष्ट है, लेकिन क्त्रिस्यान्वयन बेहद खराब।
पिकप की कार्य प्रणाली से यूपी के उद्यमी दुखी हैं। जो संस्था स्वयं बीमार हो, वह राज्य सरकार की बड़ी-बड़ी योजनाओं का कुशल क्त्रिस्यान्वयन नहीं कर सकती है। अब जरूरत और अच्छा तंत्र विकसित करने की है। विशेषज्ञता और प्रोफेशनल से जुड़े लोग आएंगे तो दिक्कत नहीं रहेगी।
ऐसा लगता है सरकार की जांच कराने की प्रवृत्ति से अफसर डरे हैं। नीति निर्माता अफसर भी कुछ नहीं कर रहे हैं। सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए कि नीति निर्माता अफसर जो फैसला करें, उसे उच्च स्तर से अनुमोदित करा लिया जाए। ऐसा हुआ तो अफसरों में कार्रवाई या फिर जांच का डर नहीं रहेगा। काम तेजी से हो सकेगा। जो अफसर काम करेंगे, उनसे गलती भी
स्वाभाविक है। एक अफसर ने व्यक्तिगत तौर पर मुझसे कहा था कि आपके प्रोजेक्ट सही हैं। नियमानुसार सब कुछ किया जा सकता है, लेकिन आप न्यायपालिका का सहारा लें तो ज्यादा ठीक रहेगा। इस तरह के भय का वातावरण स्वस्थ लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है।
सवाल : औद्योगिक विकास और प्रोत्साहन की नीतियों पर आपने सवाल उठाए, ऐसा क्यों?
जवाब : आप ही सोचिए। ‘पिकप’ औद्योगिक विकास और निवेश की नोडल एजेंसी है। बीमारू संस्था कुछ कर सकती है क्या? सेवानिवृत्त के बाद पिकप में अफसर काम कर रहे हैं। विशेषज्ञता और प्रोफेशनलिज्म का अभाव है। यूपी की प्रोत्साहन नीति सर्वोत्कृष्ट है, लेकिन क्त्रिस्यान्वयन बेहद खराब।
पिकप की कार्य प्रणाली से यूपी के उद्यमी दुखी हैं। जो संस्था स्वयं बीमार हो, वह राज्य सरकार की बड़ी-बड़ी योजनाओं का कुशल क्त्रिस्यान्वयन नहीं कर सकती है। अब जरूरत और अच्छा तंत्र विकसित करने की है। विशेषज्ञता और प्रोफेशनल से जुड़े लोग आएंगे तो दिक्कत नहीं रहेगी।
सवाल : यूपी या फिर गोरखपुर के औद्योगिक विकास और रोजगार पर क्या कहेंगे?
जवाब : इस संबंध में यूपी सरकार द्वारा जो भी आंकड़े प्रदर्शित किए जा रहे हैं, प्रथम दृष्टया वे सही नहीं लग रहे। ये आंकड़े अफसरों की सूचनाओं पर आधारित हैं। यूपी में यदि लाखों करोड़ रुपये का निवेश हुआ तो उसकी झलक गोरखपुर में भी दिखनी चाहिए। मेरी जानकारी के अनुसार गोरखपुर में 600-700 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। यदि आंकड़े वास्तविक होते तो निवेश का आंकड़ा और बेहतर हो सकता था।
गैलेंट समूह गोरखपुर के रामगढ़ताल क्षेत्र में 400 करोड़ रुपये की लागत से ताज होटल बनाना चाहता है। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 2500 लोगों को रोजगार मिलेगा। गोरखनाथ क्षेत्र में 200 करोड़ की लागत से चार सितारा होटल बनाने का प्रोजेक्ट स्वीकृति के लिए भेजा गया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। इससे 1500 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। गैलेंट इस्पात के विस्तार के लिए 500 करोड़ रुपये निवेश की योजना है। ऐसा हुआ तो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 1000 लोगों को रोजगार मिल जाएगा।
गोरखपुर में गैलेंट प्लांट की उत्पादन क्षमता अभी 4.95 लाख टन है, जिसे 6.60 लाख टन करना है। आप ही बताइए, इतने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट शासन स्तर पर निर्णय के अभाव में लंबित है। एक भी मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है, जो कष्ट का विषय है। हर स्तर पर प्रयास किया गया, लेकिन परिणाम अपेक्षित नहीं हैं। निराशा की भावना पैदा हो रही है। सरकार ने सहयोग नहीं मिला तो सभी प्रोजेक्ट निरस्त करने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं बचा है।
गैलेंट समूह गोरखपुर के रामगढ़ताल क्षेत्र में 400 करोड़ रुपये की लागत से ताज होटल बनाना चाहता है। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 2500 लोगों को रोजगार मिलेगा। गोरखनाथ क्षेत्र में 200 करोड़ की लागत से चार सितारा होटल बनाने का प्रोजेक्ट स्वीकृति के लिए भेजा गया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। इससे 1500 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। गैलेंट इस्पात के विस्तार के लिए 500 करोड़ रुपये निवेश की योजना है। ऐसा हुआ तो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 1000 लोगों को रोजगार मिल जाएगा।
गोरखपुर में गैलेंट प्लांट की उत्पादन क्षमता अभी 4.95 लाख टन है, जिसे 6.60 लाख टन करना है। आप ही बताइए, इतने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट शासन स्तर पर निर्णय के अभाव में लंबित है। एक भी मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है, जो कष्ट का विषय है। हर स्तर पर प्रयास किया गया, लेकिन परिणाम अपेक्षित नहीं हैं। निराशा की भावना पैदा हो रही है। सरकार ने सहयोग नहीं मिला तो सभी प्रोजेक्ट निरस्त करने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं बचा है।
सवाल : किस स्तर पर दिक्कत ज्यादा है, कुछ खुलकर बताएंगे क्या?
जवाब : देखिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दृष्टिकोण सकारात्मक है। जब भी उद्योगपति मुख्यमंत्री से मिले, तब सकारात्मक बातचीत हुई। मुख्यमंत्री स्तर से निर्देश भी दिए गए। उनके (मुख्यमंत्री) आसपास कुछ ऐसे अधिकारी हैं, जिनकी सोच नकारात्मक है। ऐसे अफसर सामने कुछ नहीं कहते हैं, लेकिन बाद में भ्रमित कर देते हैं। इस कारण निर्देश प्रभावी नहीं होते हैं। इससे पहले तीन मुख्यमंत्री से मिला था और संवाद भी किया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ईमानदारी से चेष्टा कर रहे हैं।
मेहनत से सब कुछ बदलना चाह रहे हैं, लेकिन इस पर कुछ अफसर पानी फेरने पर आमादा हैं। शासन स्तर पर अनिर्णय की स्थिति है। यदि प्रमुख सचिव प्रभावी हैं तो मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और विकास प्राधिकरण के अफसरों को काम करना ही पड़ेगा।
जब शासन स्तर पर निर्णय लंबित रहेगा तो गाड़ी आगे नहीं बढ़ेगी। तमाम तरह की बहानेबाजी होगी। अफसरों में सबसे महत्वपूर्ण अधिकारी दिखाने की होड़-सी है। अफसरों पर भरोसा करना जरूरी है, लेकिन मुझ जैसों से कुछ पूछा जाए तो नतीजे दूसरे होंगे।
सवाल : गोरखपुर के उद्योगपति दूसरे राज्यों में निवेश कर रहे हैं, इसके पीछे की वजह क्या है?
जवाब : बहुत शानदार सवाल है। पुराने उद्योगपति यूपी छोड़कर बाहर जा रहे हैं। मैं, मुंह देखी बात नहीं करता हूं। चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज गोरखपुर के अध्यक्ष विष्णु अजित सरिया मंच पर बैठकर बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। उनसे पूछा जाना चाहिए कि गोरखपुर को छोड़कर उत्तराखंड के काशीपुर में औद्योगिक इकाई क्यों लगाई?
150 करोड़ रुपये का निवेश गोरखपुर में होता तो प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार बढ़ता। विकास की बेहतर संभावना रहतीं। यूपी में कोई एक ऐसा प्लेटफार्म नहीं है, जहां उद्योगपति अपनी बात कह सकें। सरकार के सभी अंगों में परस्पर विश्वास का अभाव है। उद्यमियों के प्रति भी अविश्वास है। एक बात बताइए, नए उद्योगपति आकर निवेश कर रहे हैं। उनके पास यूपी में काम करने का अनुभव नहीं है। पुराने उद्योगपति यूपी से बाहर जा रहे हैं, ऐसे में नुकसान किसका होगा?
मेहनत से सब कुछ बदलना चाह रहे हैं, लेकिन इस पर कुछ अफसर पानी फेरने पर आमादा हैं। शासन स्तर पर अनिर्णय की स्थिति है। यदि प्रमुख सचिव प्रभावी हैं तो मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और विकास प्राधिकरण के अफसरों को काम करना ही पड़ेगा।
जब शासन स्तर पर निर्णय लंबित रहेगा तो गाड़ी आगे नहीं बढ़ेगी। तमाम तरह की बहानेबाजी होगी। अफसरों में सबसे महत्वपूर्ण अधिकारी दिखाने की होड़-सी है। अफसरों पर भरोसा करना जरूरी है, लेकिन मुझ जैसों से कुछ पूछा जाए तो नतीजे दूसरे होंगे।
सवाल : गोरखपुर के उद्योगपति दूसरे राज्यों में निवेश कर रहे हैं, इसके पीछे की वजह क्या है?
जवाब : बहुत शानदार सवाल है। पुराने उद्योगपति यूपी छोड़कर बाहर जा रहे हैं। मैं, मुंह देखी बात नहीं करता हूं। चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज गोरखपुर के अध्यक्ष विष्णु अजित सरिया मंच पर बैठकर बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। उनसे पूछा जाना चाहिए कि गोरखपुर को छोड़कर उत्तराखंड के काशीपुर में औद्योगिक इकाई क्यों लगाई?
150 करोड़ रुपये का निवेश गोरखपुर में होता तो प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार बढ़ता। विकास की बेहतर संभावना रहतीं। यूपी में कोई एक ऐसा प्लेटफार्म नहीं है, जहां उद्योगपति अपनी बात कह सकें। सरकार के सभी अंगों में परस्पर विश्वास का अभाव है। उद्यमियों के प्रति भी अविश्वास है। एक बात बताइए, नए उद्योगपति आकर निवेश कर रहे हैं। उनके पास यूपी में काम करने का अनुभव नहीं है। पुराने उद्योगपति यूपी से बाहर जा रहे हैं, ऐसे में नुकसान किसका होगा?
सवाल : सरकार व उसके सिस्टम के खिलाफ बोल रहे हैं। आपको डर नहीं लग रहा?
जवाब : यहां सरकार से भयभीत होने का प्रश्न नहीं है। आलोचना और सुझाव अच्छे उद्देश्य से दिए जाते हैं। सरकार को सही बातें न बताई जाएं तो सरकार आत्ममुग्ध रहेगी। सही निर्णय नहीं ले पाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के हैं। उनकी सफलता में हमारी सफलता है।
गोरखपुरवासी होने के नाते हमेशा चाहूंगा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कार्यकाल अविस्मरणीय रहे। सरकार ऐसी चले, जो सभी मानदंडों पर खरी उतर सके। सरकार से होने वाली परेशानी को बताने का अधिकार हर उद्योगपति को है।
क्त्रिस्यान्वयन को प्रभावी और समयबद्ध बनाने की जरूरत है। सरकार और उद्योगपति संवादहीनता, अविश्वास के दौर से बाहर निकलें तो बहुत अच्छे परिणाम सामने आएंगे। मुख्यमंत्री ने हर तीन महीने में उद्योगपतियों से मिलने और उनकी समस्या सुनने की पहल की है, इसके परिणाम अच्छे आएंगे।
गोरखपुरवासी होने के नाते हमेशा चाहूंगा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कार्यकाल अविस्मरणीय रहे। सरकार ऐसी चले, जो सभी मानदंडों पर खरी उतर सके। सरकार से होने वाली परेशानी को बताने का अधिकार हर उद्योगपति को है।
क्त्रिस्यान्वयन को प्रभावी और समयबद्ध बनाने की जरूरत है। सरकार और उद्योगपति संवादहीनता, अविश्वास के दौर से बाहर निकलें तो बहुत अच्छे परिणाम सामने आएंगे। मुख्यमंत्री ने हर तीन महीने में उद्योगपतियों से मिलने और उनकी समस्या सुनने की पहल की है, इसके परिणाम अच्छे आएंगे।