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बच्चा पैदा हुआ तो देने होंगे आठ हजार
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Wed, 05 Oct 2016 09:48 PM IST
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प्रतीकात्मक चित्र: नवजात शिशु
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जिला महिला अस्पताल में यदि आपने कर्मचारियों को मुंहमांगी रकम नहीं दी तो पैदा हुआ बच्चा आपको नहीं दिया जाएगा। ये कोई मजाक नहीं बल्कि हकीकत है। बुधवार को ऐसे ही एक मामले को लेकर महिला के तीमारदारों ने जमकर हंगामा मचाया। बीच-बचाव कर कुछ कर्मचारियों ने भले ही घर वालों को शांत करा दिया हो, लेकिन इस घटना ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। ऐसा नहीं है कि यह घटना पहली बार हुई। इसके पहले भी ऐसे मामले सामने आते रहे हैं और हर बार कार्रवाई के नाम पर लीपापोती कर दी जाती है।
खोराबार के बड़गो निवासी अमित चतुर्वेदी की पत्नी अमिता को प्रसव पीड़ा होने पर दो अक्टूबर को महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कुछ देर बाद आराम हो जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें यह कहकर घर भेज दिया कि अभी प्रसव में वक्त है। मंगलवार को अमिता को लेकर घर वाले फिर अस्पताल पहुंचे। रात में ऑपरेशन से अमिता को बेटा हुआ। आरोप है कि बेटा होने के बाद कर्मचारियों ने आठ हजार रुपये की मांग की।
घर वालों के पास उस समय ढाई हजार रुपये थे जिसे उन्होंने कर्मचारियों को दे दिए। इसके बाद महिला को वार्ड में भेज दिया गया मगर सुबह आकर कर्मचारियों ने बची हुई रकम की मांग शुरू कर दी। घर वालों के समझाने के बाद भी जब वे नहीं माने तो इसे लेकर हंगामा हो गया। तीमारदार शिकायत करने एसआईसी के पास भी गए, मगर वह थे नहीं। मामला बढ़ता देख सीनियर कर्मचारियों ने बीच-बचाव कर घर वालों को शांत कराया।
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यह गंभीर मामला है। अस्पताल में सब कुछ नि:शुल्क है। इसकी जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
- डॉ. एके गुप्ता. एसआईसी, महिला अस्पताल
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खोराबार के बड़गो निवासी अमित चतुर्वेदी की पत्नी अमिता को प्रसव पीड़ा होने पर दो अक्टूबर को महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कुछ देर बाद आराम हो जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें यह कहकर घर भेज दिया कि अभी प्रसव में वक्त है। मंगलवार को अमिता को लेकर घर वाले फिर अस्पताल पहुंचे। रात में ऑपरेशन से अमिता को बेटा हुआ। आरोप है कि बेटा होने के बाद कर्मचारियों ने आठ हजार रुपये की मांग की।
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घर वालों के पास उस समय ढाई हजार रुपये थे जिसे उन्होंने कर्मचारियों को दे दिए। इसके बाद महिला को वार्ड में भेज दिया गया मगर सुबह आकर कर्मचारियों ने बची हुई रकम की मांग शुरू कर दी। घर वालों के समझाने के बाद भी जब वे नहीं माने तो इसे लेकर हंगामा हो गया। तीमारदार शिकायत करने एसआईसी के पास भी गए, मगर वह थे नहीं। मामला बढ़ता देख सीनियर कर्मचारियों ने बीच-बचाव कर घर वालों को शांत कराया।
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शिकायती पत्र में दिया वसूली का ब्यौरा
अमिता के घर वालों ने एसआईसी के नाम से शिकायती पत्र दिया है। इसमें लेबर रूम से लेकर ऑपरेशन और बच्चा सुपुर्द किए जाने तक एक-एक जगह होने वाली वसूली का पूरा ब्योरा दिया गया है। पत्र में लिखा गया है कि यदि कर्मचारियों को रुपये न दो तो वे सीधे कह देते हैं कि बच्चा नहीं दिया जाएगा। अगर किसी ने इसका विरोध किया तो उसका केस बिगाड़ने की धमकी दी जाती है।यह गंभीर मामला है। अस्पताल में सब कुछ नि:शुल्क है। इसकी जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
- डॉ. एके गुप्ता. एसआईसी, महिला अस्पताल