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हादसों की वजह बन रहे ‘अंधे डिवाइडर’
अमनदीप सिंह, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Fri, 03 Feb 2017 01:41 AM IST
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डिवाइडर की स्थिति।
- फोटो : Amar Ujala
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पैडलेगंज से ट्रांसपोर्ट नगर के बीच हाइवे पर बेफिक्र होकर गाड़ी चलाना हादसे को दावत दे सकता है। करीब तीन किलोमीटर की दूरी में ही कई ऐसे खतरनाक बिंदु है, जो हादसों की वजह बन रहे हैं। हाइवे पर बड़े-बड़े डिवाइडर कट से चालक चकमा खा रहे हैं। गहरे अंधेरे, टूटे खंभे और कट रिफलेक्टर न होने से ड्राइविंग आसान नहीं है।
रुस्तमपुर से ट्रांसपोर्ट नगर के बीच 14 गैप हैं और रात के समय इन गैप और डिवाइडर को समझ पाना चालकों के लिए बहुत मुश्किल हो रहा है। एक प्वाइंट पर तीन फीट का गाडर सड़क की ओर नोंक के रूप में टेढ़ा फंसा है। इसी तरह से डिवाइडर के ठीक ऊपर पांच फीट का टूटा खंभा वाहनों के लिए 24 घंटे जोखिम बना हुआ है। एक जगह पर दो लाइट टूटी मिली, तो वहीं एक खंभे पर लाइट लगी ही नहीं थी।
हादसों के गवाह बन चुके ट्रांसपोर्ट नगर में मेकैनिक की दुकान चलाने वाले हरीश चंद्र का कहना है कि गहरा अंधेरा चालकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। अंधेरे में चालकों को डिवाइडर नजर नहीं आता और गाड़ी डिवाइडर पर चढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि प्रकाश की व्यवस्था बहुत जरूरी है। डिवाइडर पर लाल, पीले रंग के रिफलेक्टर भी होने चाहिए, ताकि दूर से रोशनी की चमक से चालक को डिवाइडर का पता चल सके।
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मेकैनिक अमर कुमार के मुताबिक स्ट्रीट लाइट टूटे हैं। कई हादसे उनकी आंखों के सामने हो चुके हैं। डिवाइडर पर कट बहुत ज्यादा होने के कारण चालक धोखा खा जाते हैं, वे समझ बैठते हैं कि आगे डिवाइडर खत्म है, और हादसे का शिकार हो जाते हैं। गीडा निवासी छेदी लाल का कहना है कि बड़े-बड़े कट पेट्रोल पंप के सामने ही है। लोग तेल भरवाने के तुरंत बाद गाड़ी तेजी से निकालते हैं। जटेपुर उतरी निवासी रिंकू सिंह के मुताबिक हाइवे पर हादसों को रोकने के लिए खामियों को जब तक दूर नहीं किया जाएगा, दुर्घटनाएं इसी प्रकार होते रहेंगे।
मरम्मत नगर निगम के जिम्मे : एक्सईएन
लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन आरजे प्रसाद के मुताबिक पैड़लेगंज से ट्रांसपोर्ट नगर के हाइवे की मरम्मत आदि का कार्य नगर निगम के जिम्मे है। एक बार उन्होंने मरम्मत कराने का प्रयास किया था, लेकिन बिजली खर्च आदि के भुगतान पर बात अटक गई।
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रुस्तमपुर से ट्रांसपोर्ट नगर के बीच 14 गैप हैं और रात के समय इन गैप और डिवाइडर को समझ पाना चालकों के लिए बहुत मुश्किल हो रहा है। एक प्वाइंट पर तीन फीट का गाडर सड़क की ओर नोंक के रूप में टेढ़ा फंसा है। इसी तरह से डिवाइडर के ठीक ऊपर पांच फीट का टूटा खंभा वाहनों के लिए 24 घंटे जोखिम बना हुआ है। एक जगह पर दो लाइट टूटी मिली, तो वहीं एक खंभे पर लाइट लगी ही नहीं थी।
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हादसों के गवाह बन चुके ट्रांसपोर्ट नगर में मेकैनिक की दुकान चलाने वाले हरीश चंद्र का कहना है कि गहरा अंधेरा चालकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। अंधेरे में चालकों को डिवाइडर नजर नहीं आता और गाड़ी डिवाइडर पर चढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि प्रकाश की व्यवस्था बहुत जरूरी है। डिवाइडर पर लाल, पीले रंग के रिफलेक्टर भी होने चाहिए, ताकि दूर से रोशनी की चमक से चालक को डिवाइडर का पता चल सके।
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मेकैनिक अमर कुमार के मुताबिक स्ट्रीट लाइट टूटे हैं। कई हादसे उनकी आंखों के सामने हो चुके हैं। डिवाइडर पर कट बहुत ज्यादा होने के कारण चालक धोखा खा जाते हैं, वे समझ बैठते हैं कि आगे डिवाइडर खत्म है, और हादसे का शिकार हो जाते हैं। गीडा निवासी छेदी लाल का कहना है कि बड़े-बड़े कट पेट्रोल पंप के सामने ही है। लोग तेल भरवाने के तुरंत बाद गाड़ी तेजी से निकालते हैं। जटेपुर उतरी निवासी रिंकू सिंह के मुताबिक हाइवे पर हादसों को रोकने के लिए खामियों को जब तक दूर नहीं किया जाएगा, दुर्घटनाएं इसी प्रकार होते रहेंगे।
मरम्मत नगर निगम के जिम्मे : एक्सईएन
लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन आरजे प्रसाद के मुताबिक पैड़लेगंज से ट्रांसपोर्ट नगर के हाइवे की मरम्मत आदि का कार्य नगर निगम के जिम्मे है। एक बार उन्होंने मरम्मत कराने का प्रयास किया था, लेकिन बिजली खर्च आदि के भुगतान पर बात अटक गई।