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खुद जाते हैं बाहर, दूसरे को करते हैं मना
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
Updated Thu, 30 Jun 2016 08:43 PM IST
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अनुपम सिंह
फिल्म एक्ट्रेस विद्या बालन पूरे दिन रेडियो, टीवी चैनलों, एफएम आदि पर सोच बदलने के लिए प्रेरित करती हैं। प्रधानमंत्री भी भारत को स्वच्छ बनाने की अपील करते रहते हैं। जनजागरण के नाम पर करोड़ों का बजट भी खर्च हो रहा है, इसके बावजूद ग्राम स्तर पर स्वच्छता अभियान के कर्णधारों (सफाई कर्मी) के घरों में ही शौचालय नहीं है। जिले में ऐसे सफाई कर्मियों की तादाद एक-दो नहीं, बल्कि सैकड़ों में हैं। डीपीआरओ कहते हैं कि 14 सौ सफाई कर्मचारियों के यहां शौचालय नहीं हैं। आश्चर्य तो यह है कि इन कर्मचारियों ने कभी इसके लिए आवेदन ही नहीं किया। ऐसे में जिले में स्वच्छ भारत मिशन की परिकल्पना कितनी साकार हो रही है, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
गोरखपुर में करोड़ों रुपये प्रति वर्ष स्वच्छ भारत मिशन पर खर्च किए जा रहे हैं। गत वर्ष में नौ करोड़ रुपये खर्च हुए। इस वित्तीय वर्ष में भी करीब तीन करोड़ रुपये पंचायती राज विभाग को मिल चुके हैं। इनमें शौचालय निर्माण और जागरूकता अभियान पर करीब दो करोड़ खर्च भी हो चुके हैं। जिले को स्वच्छ रखने के लिए करीब 31 सौ सफाई कर्मी नियुक्त हैं, मगर इनमें से करीब 14 सौ सफाईकर्मियों के अपने घर में शौचालय नहीं हैं।
बातचीत
मुझे सरकार की योजना के बारे में पता नहीं था। अगर पता होता तो मैं पहले ही शौचालय बनवा चुका होता। खैर अब जल्द से जल्द इस काम को पूरा करूंगा।
- सोमनाथ, सफाई कर्मी, जंगल कौड़िया
हमें शौचालय निर्माण की सरकारी मदद की जानकारी नहीं है। इसी के चलते हमने कभी इसके निर्माण के लिए प्रयास ही नहीं किया।
- पंचम, सफाई कर्मी, जंगल कौड़िया
विभागीय कर्मचारी लोगों को खुले में शौच से परहेज के लिए जागरूक करते हैं। गांव वालों के लिए शौचालय भी बनवाया जाता है। जिले में करीब 14 सौ सफाई कर्मी ऐसे हैं, जिनके पास शौचालय नहीं है। इन सफाई कर्मियों ने शौचालय निर्माण के लिए आज तक आवेदन भी नहीं किया।
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- आरके भारती, जिला पंचायत राज अधिकारी
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फिल्म एक्ट्रेस विद्या बालन पूरे दिन रेडियो, टीवी चैनलों, एफएम आदि पर सोच बदलने के लिए प्रेरित करती हैं। प्रधानमंत्री भी भारत को स्वच्छ बनाने की अपील करते रहते हैं। जनजागरण के नाम पर करोड़ों का बजट भी खर्च हो रहा है, इसके बावजूद ग्राम स्तर पर स्वच्छता अभियान के कर्णधारों (सफाई कर्मी) के घरों में ही शौचालय नहीं है। जिले में ऐसे सफाई कर्मियों की तादाद एक-दो नहीं, बल्कि सैकड़ों में हैं। डीपीआरओ कहते हैं कि 14 सौ सफाई कर्मचारियों के यहां शौचालय नहीं हैं। आश्चर्य तो यह है कि इन कर्मचारियों ने कभी इसके लिए आवेदन ही नहीं किया। ऐसे में जिले में स्वच्छ भारत मिशन की परिकल्पना कितनी साकार हो रही है, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
गोरखपुर में करोड़ों रुपये प्रति वर्ष स्वच्छ भारत मिशन पर खर्च किए जा रहे हैं। गत वर्ष में नौ करोड़ रुपये खर्च हुए। इस वित्तीय वर्ष में भी करीब तीन करोड़ रुपये पंचायती राज विभाग को मिल चुके हैं। इनमें शौचालय निर्माण और जागरूकता अभियान पर करीब दो करोड़ खर्च भी हो चुके हैं। जिले को स्वच्छ रखने के लिए करीब 31 सौ सफाई कर्मी नियुक्त हैं, मगर इनमें से करीब 14 सौ सफाईकर्मियों के अपने घर में शौचालय नहीं हैं।
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बातचीत
मुझे सरकार की योजना के बारे में पता नहीं था। अगर पता होता तो मैं पहले ही शौचालय बनवा चुका होता। खैर अब जल्द से जल्द इस काम को पूरा करूंगा।
- सोमनाथ, सफाई कर्मी, जंगल कौड़िया
हमें शौचालय निर्माण की सरकारी मदद की जानकारी नहीं है। इसी के चलते हमने कभी इसके निर्माण के लिए प्रयास ही नहीं किया।
- पंचम, सफाई कर्मी, जंगल कौड़िया
विभागीय कर्मचारी लोगों को खुले में शौच से परहेज के लिए जागरूक करते हैं। गांव वालों के लिए शौचालय भी बनवाया जाता है। जिले में करीब 14 सौ सफाई कर्मी ऐसे हैं, जिनके पास शौचालय नहीं है। इन सफाई कर्मियों ने शौचालय निर्माण के लिए आज तक आवेदन भी नहीं किया।
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- आरके भारती, जिला पंचायत राज अधिकारी