फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   doctors are quarreling on Two patients on one bed in encephalytis ward

एक बेड पर दो मरीज को लेकर तनातनी

Sun, 04 Sep 2016 08:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर। Updated Sun, 04 Sep 2016 08:44 PM IST
विज्ञापन
doctors are quarreling on Two patients on one bed in encephalytis ward
एक बेड पर दाे मरीज। - फोटो : amar ujala
मेडिकल कॉलेज में 100 बेड इंसेफेलाइटिस वार्ड में दूसरे मर्ज के मरीजों को भर्ती करने का मामला उलझता जा रहा है। इसे लेकर अब सीएमओ और बाल रोग विभाग की अध्यक्ष में पत्रों से आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया है। सीएमओ ने केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल के दौरे के बाद उनके आदेश का हवाला देते हुए वार्ड में दूसरे मर्ज के मरीज को भर्ती न करने की सलाह दी। अब इसके विरोध में बाल रोग विभाग की अध्यक्ष ने पत्र लिखा है और इसे मरीजों की जरूरत बताया है और वार्ड से हटाने को अमानवीय और डॉक्टरी दायित्व के विरुद्ध बताया। उन्होंने प्राचार्य से इस पर सलाह मांगी है।
विज्ञापन


सीएमओ ने इंसेफेलाइटिस वार्ड में अन्य मर्ज के मरीजों को न रखने के लिए पत्र लिखा है। उनका तर्क है कि मंत्री और अन्य वीआईपी दौरे में इस वार्ड का निरीक्षण होता है और इन मरीजों के साथ दूसरे मर्ज के मरीजों को रखना सही नहीं है। इससे वार्ड में जगह की कमी भी होती है, संक्रमण का भी खतरा बना रहता है। इसका जवाब देते हुए बाल रोग विभाग की अध्यक्ष ने पत्र लिखा है कि मरीज आने पर उनकी बीमारी के हिसाब से पीडियाट्रिक आईसीयू की जरूरत होती है।
विज्ञापन


इन मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके इसलिए इन्हें इंसेफेलाइटिस वार्ड में रखना होता है अब यदि इन मरीजों को दूसरे वार्ड में रखा जाएगा तो यह अमानवीय होगा। इन बच्चों के साथ कोई भी हादसा हो सकता है। दूसरे एईएस से ठीक होकर फिर दोबारा दूसरे बीमारी से आने वाले मरीज को भी एईएस फॉलोअप लिखा जाता है। सीएमओ द्वारा इन्हें एईएस नंबर न देने की बात कहना भी समझ से परे है। पत्र के जरिए उन्होंने प्राचार्य से सुझाव मांगा है कि इसपर क्या किया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

स्वास्थ्य केंद्रों पर नहीं हो रहा इलाज

बाल रोग विभाग की अध्यक्ष ने पत्र के जरिए स्वास्थ्य केंद्रों के इलाज व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा किया है। कहा कि मेडिकल कॉलेज में 85 प्रतिशत मरीज सीधे आ रहे हैं। स्वास्थ्य केंद्रों पर उन्हें उपचार ही नहीं मिल रहा है। जिस वजह से यहां पर मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अस्पतालों में यदि इलाज हो तो खुद ही मरीजों की संख्या कम हो जाएगी। वहीं फीवर ट्रैकिंग की व्यवस्था भी फेल है। यदि इस व्यवस्था को भी सही से लागू किया जाए तो मरीजों का पता लगेगा और प्राथमिक उपचार मिल जाएगा।

‘अभी मेरे पास पत्र नहीं आया है। आने के बाद इस पर निर्णय लिया जाएगा’
- प्रो. राजीव मिश्रा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed