सामाजिक बुराइयों के खिलाफ खड़ी हुईं महाराजगंज की बेटियां, एक दिन के लिए बनी राजदूत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर प्रदेश के महराजगंज की दो बेटियां अंजलि और पुष्पा ने देश का नाम रौशन किया है। 14-15 साल की उम्र यूं तो खेलने कूदने की होती है, लेकिन इस उम्र से ही महराजगंज की यह दो बेटियां समाज में तेजी से आगे बढ़ने लगीं।
दोनों बेटियां कुरीतियों के खिलाफ खड़ी हुईं। बाल विवाह, अशिक्षा और नशाखोरी जैसी कुप्रथाओं पर चोट करते हुए आज बहुतों के लिए नजीर बन गई हैं। गांव की गलियों में फैली सामाजिक बुराइयों का अंत कर निकली अंजलि और पुष्पा ने दो अलग-अलग देशों का राजदूत बनकर जनपद का मान बढ़ाया है।
अंतर्राष्टीय बेटी दिवस पर एक दिन के लिए लातविया का राजदूत बनकर लौटीं सोनौली के कैशालनगर की रहने वाली पुष्पा गौड़ ने अमर उजाला से खास बातचीत की। उन्होंने बताया कि 2014 में उनके पिता की नदी में डूबने से मौत हो गई थी।
इस दौरान वह आठवीं में पढ़ रही थीं। पढ़ाई के दौरान ही वह जीएनके प्लान के बाबू बहिनी मंच से जुड़ी और सबसे पहले आत्मरक्षा का हुनर सिखा। सेल्फ डिफेंस का हुनर सीखने के बाद वह अपनी सहेलियों को भी स्कूल में सेल्फ डिफेंस के बारे में बता उन्हें जागरुक करने लगी।
इसके साथ वह अपने गांव में स्कूल न जाने वाले बच्चों को भी स्कूल जाने और खास कर छोटे लड़कों से नशा न करने की अपील करती रहीं। उनके इस प्रयास से बहुतों ने स्कूल की राह पकड़ी तो गांव में 'सब पढ़ें, सब बढें' का नारा चारों तरफ गूंजने लगा।
पुष्पा यहीं नहीं रुकी वह बताती हैं कि उनके पड़ोस में रहने वाली उनकी एक सहेली का बाल विवाह तय हुआ। सहेली न जब उन्हें यह बताया तो वह उसके घर पहुंचकर बाल विवाह को रोकने को कहा जिस पर सहेली की परिजनों ने उनकी खिलाफत भी की। उन्होंने सहेली की जिंदगी को नर्क में जाने से पुष्पा ने बचाया और इसके लिए उन्होनें संस्था के लोगों की मदद ली।
पुष्पा बताती हैं कि वह गरीबों के बच्चों को पढ़ाना चाहती हैं। उनका मानना है कि समाज की सभी बुराइयों की देन अशिक्षा हैं। उनके इसी प्रयास के लिए प्लान इंडिया ने उन्हें एक दिन के लिए राजदूत बनाकर कर उनके हौसलों की उड़ान में पंख लगाया है।
सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जनपद की एक और बेटी अंजलि राव भी हैं। नौतनवां तहसील के महेशपुर मेंहदिया निवासी पेशे से किसान विजय बहादुर कि 17 वर्षीय पुत्री अंजलि भी वर्षों से सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जंग लड़ रही हैं।
भगीरथी कृषक इंटर कॉलेज भगीरथपुर में 10 वीं की छात्रा अंजली ने बताया कि उसकी एक सहेली ने पैसे के आभाव में पढ़ाई छोड़ दी। वह उसके साथ खेलने तो आती थी लेकिन पढ़ने नहीं जाती थी। इसके लिए अंजलि अपने सहेलियों के साथ उसके घर जाकर उसके मां को उसे पढ़ाने के लिए राजी किया। सहेली की मां की हामी ने अंजलि को नई उड़ान के लिए तैयार कर दिया।
फिर क्या था वह सहेलियों के साथ मिल कर हर छोटी बड़ी समस्या का हल निकाने लगी। इसके बाद वह स्कूल न जाने वाले हर बच्चों के घर पहुंचकर उन्हें स्कूल भेजने की बात कहने लगी।
अंजलि बताती कि बहुतों ने उसकी बात मानी तो कुछ लोगों ने नहीं भी माना। इस बीच वह बाबू बहिनी मंच की लीडर बनी और फिर क्या था गांव में अंजलि के जागरूकता का जोर चलने लगा। फिर गांव बाल विवाह से लेकर बाल मजदूरी तक सभी पर रोक लगने लगी। अंजलि के इन्हीं प्रयासों ने उसे देश की राजधानी तक पहुंचा दिया और वह अंतर्राष्टीय बेटी दिवस पर एक दिन के लिए इक्वाडोर की राजदूत बनाकर जिले का गौरव बढ़ाया है।
बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय बेटी दिवस पर एक दिन के लिए इक्वाडोर देश की राजदूर बनकर लौटीं जनपद के नौतनवां ब्लॉक के ग्राम सभा महेशपुर मेंहदिया निवासी अंजलि राव का रविवार को ग्रामीणों ने जोरदार स्वागत किया। फूल मलाओं के साथ गांव की बेटी का स्वागत कर लोगों ने उन्हे बधाईयां दी। इस दौरान अंजलि राव ने कहा कि यह सब गांव के लोगों को सहयोग से संभव हो पाया है। मेरी हर मुहिम में मेरे गांव के लोगों ने व्यापक सहयोग किया है।