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ग्रामीण डाकघरों में नोटों का संकट गहराया
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Wed, 23 Nov 2016 01:01 AM IST
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रकम बदलने को डाकघर में लगी लाइन।
- फोटो : Amar Ujala
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शहरी क्षेत्र के डाकघरों में नोट नोट वितरण की व्यवस्था भले ही सुधर गई हो लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के डाकघरों में आर्थिक संकट बरकरार है। इससे ग्रामीणों का काफी परेशान हैं।
पीएम नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर को 500 और 1000 रुपये के नोटों को चलने से बाहर करने की घोषणा की थी। इसके बाद बैंकों और डाकघरों में पुराने नोटों को जमा कर नए नोट लेने की सहूलियतें दी गईं। शुरूआती दिनों में हफ्ते भर तक तो शहरी क्षेत्र के डाकघरों में नोटों के बदलने की व्यवस्था लड़खड़ाई हुई थी, जो बाद में धीरे-धीरे ठीक हुई। अभी शहरी क्षेत्र के डाकघरों में पुराने नोटों के बदले नए नोट दिए जा रहे हैं मगर ग्रामीण क्षेत्रों के 74 डाकघरों में से 15-20 डाकघरों में ही नोट पहुंच पाएं हैं, जहां पर नोट बदलने की प्रक्रिया चल रही है। अन्य ग्रामीण डाकघरों में तो धनराशि न होने से नोटों को बदलने की प्रक्रिया ठप है।
प्रवर डाक अधीक्षक डीबी त्रिपाठी ने बताया कि हमें बैंक से ही पर्याप्त करेंसी नहीं मिल पा रही है। वहां से जो भी करेंसी मिलती है उसे प्राथमिकता के आधार पर पहले उन डाकघरों को दिया जाता है, जहां पर लोगों का दबाव अधिक है। अगर पर्याप्त करेंसी मिले तो ग्रामीण क्षेत्र के डाकघरों में नोटों के बदलने की परेशानी खत्म हो सकती है।
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पीएम नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर को 500 और 1000 रुपये के नोटों को चलने से बाहर करने की घोषणा की थी। इसके बाद बैंकों और डाकघरों में पुराने नोटों को जमा कर नए नोट लेने की सहूलियतें दी गईं। शुरूआती दिनों में हफ्ते भर तक तो शहरी क्षेत्र के डाकघरों में नोटों के बदलने की व्यवस्था लड़खड़ाई हुई थी, जो बाद में धीरे-धीरे ठीक हुई। अभी शहरी क्षेत्र के डाकघरों में पुराने नोटों के बदले नए नोट दिए जा रहे हैं मगर ग्रामीण क्षेत्रों के 74 डाकघरों में से 15-20 डाकघरों में ही नोट पहुंच पाएं हैं, जहां पर नोट बदलने की प्रक्रिया चल रही है। अन्य ग्रामीण डाकघरों में तो धनराशि न होने से नोटों को बदलने की प्रक्रिया ठप है।
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प्रवर डाक अधीक्षक डीबी त्रिपाठी ने बताया कि हमें बैंक से ही पर्याप्त करेंसी नहीं मिल पा रही है। वहां से जो भी करेंसी मिलती है उसे प्राथमिकता के आधार पर पहले उन डाकघरों को दिया जाता है, जहां पर लोगों का दबाव अधिक है। अगर पर्याप्त करेंसी मिले तो ग्रामीण क्षेत्र के डाकघरों में नोटों के बदलने की परेशानी खत्म हो सकती है।
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