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कोर्ट तक पहुंचा फर्जी स्टांप, वेंडरों पर छापेमारी
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Wed, 30 Nov 2016 01:18 AM IST
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दीवानी कचहरी में स्टांप पेपर की जांच करते सीओ कैंट।
- फोटो : Amar Ujala
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कचहरी परिसर में बेचा जा रहा फर्जी स्टांप कोर्ट तक पहुंच गया। न्यायाधीश ने फर्जी स्टांप पकड़ने के बाद इसकी जांच कराई तो मामला सामने आ गया। मंगलवार को सीओ कैंट की अगुवाई में टीम दीवानी कचहरी पहुंच गई। हालांकि इसके पहले ही वेंडर दुकानें बंद कर चुके थे। एक वेंडर को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
मंगलवार की दोपहर एक बजे के करीब सीओ कैंट अभय कुमार मिश्रा, इंस्पेक्टर कैंट ओम हरि वाजपेयी फोर्स के साथ दीवानी कचहरी में पहुंचे। वेंडरों की जांच करनी चाही मगर दुकानें बंद पड़ी थीं। इसी दौरान एक वेंडर को दुकान बंद करते हुए पकड़ा गया, जिसे हिरासत में ले लिया। दुकान की जांच की गई और जो भी स्टांप मिला उसे कब्जे में लिया। उधर, अधिवक्ताओं का कहना है कि फर्जी स्टांप बेचे जाने की जानकारी जनपद न्यायाधीश से की गई थी जिसके बाद जज ने इसका संज्ञान लिया और कार्रवाई हुई।
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मंगलवार की दोपहर एक बजे के करीब सीओ कैंट अभय कुमार मिश्रा, इंस्पेक्टर कैंट ओम हरि वाजपेयी फोर्स के साथ दीवानी कचहरी में पहुंचे। वेंडरों की जांच करनी चाही मगर दुकानें बंद पड़ी थीं। इसी दौरान एक वेंडर को दुकान बंद करते हुए पकड़ा गया, जिसे हिरासत में ले लिया। दुकान की जांच की गई और जो भी स्टांप मिला उसे कब्जे में लिया। उधर, अधिवक्ताओं का कहना है कि फर्जी स्टांप बेचे जाने की जानकारी जनपद न्यायाधीश से की गई थी जिसके बाद जज ने इसका संज्ञान लिया और कार्रवाई हुई।
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ये है मामला
एक वाद में अधिवक्ता ने इंदू सिंह बनाम श्रीमती प्रमिला देवी के प्रकरण में वाद में 300 के दो, 200 के एक, 25 रुपये का एक, तीन टिकट 10 रुपये के तथा एक टिकट 2 रुपये लगाए गए थे। इसी तरह दो और प्रकरण में भी अधिवक्ता द्वारा इसी तरह का स्टांप दाखिल किया गया था। सिविल जज लघुवाद को स्टांप पर संदेह हुआ और उन्होंने 15 नवंबर को मुख्य कोषाधिकारी को जांच कर रिपोर्ट देने को कहा। 16 नवंबर को भेजी गई रिपोर्ट में बताया गया कि स्टांप विक्रेता रविदत्त को इतने मूल्य का स्टांप नहीं बेचा गया है। उक्त स्टांप के हस्ताक्षर और मुहर भी कोषाधिकारी के नहीं थे। पुलिस ने कोर्ट कर्मचारी खलील अहमद की तहरीर पर केस दर्ज कर लिया गया है।
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