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गोरखपुर की पहचान सिर्फ गोली-बम नहीं
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Fri, 26 May 2017 01:37 AM IST
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शहरनामा गोरखपुर पुस्तक का विमोचन करते सीएम योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : Amar Ujala
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश के विभिन्न क्षेत्रों में गोरखपुर की पहचान सिर्फ गोली, बम और अपराध से जोड़कर प्रचारित की गई। इसका दूसरा पक्ष लोगों के सामने नहीं रखा गया। कहा कि अगर गोरखपुर अच्छा नहीं होता तो फिर तमाम भ्रांतियाें के बाद भी कबीर संतकबीरनगर की धरती पर अंतिम सांसें लेने का निर्णय क्यों करते। गुरु गोरक्षनाथ यहां क्यों आते। कुशीनगर से ही भगवान बुद्ध दुनिया को मैत्री का संदेश क्यों देते। दुनिया भर में ग्रंथ के तौर पर गीता को पहुंचाने वाले गीता प्रेस की स्थापना गोरखपुर में ही क्यों होती। योग बाबा गोरक्षनाथ की ही देन है, जिसकी ताकत पूरी दुनिया मान चुकी है। संतकबीरनगर हो या कुशीनगर। ये अब भले ही अलग-अलग जिले बन गए हों, मगर पहले सभी गोरखपुर का ही हिस्सा थे।
दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बुधवार को गोरखपुर शहर पर केंद्रित 48 लोगों द्वारा 55 विषयों पर लिखित और डॉ. वेद प्रकाश पांडेय द्वारा संपादित पुस्तक शहरनामा गोरखपुर का विमोचन किया। इस मौके पर उन्होंनेे इतिहास के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि गोरखपुर को लेकर लोगों को अपनी अवधारणा बदलनी होगी। मुख्यमंत्री ने गोरखपुर की आपराधिक छवि के दुष्प्रचार से जुड़े अपने अनुभवों को भी साझा किया। बताया कि यह छवि कैसे यहां के विकास में लंबे समय तक रोड़ा बनी रही।
उन्होंने कहा कि डॉ. पांडेय ने गोरखपुर के इतिहास को इस पुस्तक में समेटने की ईमानदारी से कोशिश की है। इससे न सिर्फ शोधार्थियों बल्कि आने वाली पीढ़ी को भी यहां की परंपरा, संस्कृति समेत कला, विज्ञान आदि के क्षेत्रों की महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सकेंगी। उन्होंने कहा कि भविष्य बनाने में अतीत हमेशा मददगार साबित होता है। इतिहास लेखन दुरूह है, मगर प्रेरणादायी है। इससे आने वाली पीढी़ यह जान सके गी कि उसे किस परंपरा के साथ आगे बढ़ना है। इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने कॉलेज परिसर में स्थित दिग्विजयनाथ की मूर्ति पर माल्यार्पण किया।
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लोकतंत्र में ही लिखा जा सकता है सच्चा इतिहास : प्रो. विश्वनाथ
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए साहित्य अकादमी के अध्यक्ष प्रो. विश्वनाथ तिवारी ने कहा कि इतिहास लिखते वक्त बहुत सावधानी बरतने की जरूरत होती है। तानाशाही और राजतंत्र में सच्चा इतिहास नहीं लिखा जा सकता। कहा कि अकबर के समय पांच बार अकाल पड़ा। तमाम लोग काल के गाल में समा गए, मगर आइने अकबरी लिखने वाले अबुलफ़ज्ल-ए-अल्लामी ने ऐसी कई घटनाओं का जिक्र ही नहीं किया। इसीलिए उनकी बहुत आलोचनाएं हुईं। उन्हें निर्लज्ज चाटुकार तक कहा गया।
प्रोफेसर ने कहा कि इतिहास लोकतंत्र में ही लिखा जा सकता है। सीएम बनने के बाद योगी आदित्यनाथ की यह पहली साहित्यिक सभा है। उनसे अपील है कि वह प्रदेश भर के साहित्यिक कार्यक्रमों में शिरकत करें। इससे समारोह की गरिमा तो बढ़ेगी ही साहित्यकारों का मनोबल भी बढ़ेगा। इस दौरान पूर्वांचल यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रो. यूपी सिंह, गोरखपुर यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग के प्रो. राजवंत राव, दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. शैलेंद्र प्रताप सिंह, वाणी प्रकाशन नई दिल्ली के व्यवस्थापक अरुणा माहेश्वरी ने भी डॉ. वेद प्रकाश द्वारा संपादित पुस्तक पर विचार व्यक्त किए।
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दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बुधवार को गोरखपुर शहर पर केंद्रित 48 लोगों द्वारा 55 विषयों पर लिखित और डॉ. वेद प्रकाश पांडेय द्वारा संपादित पुस्तक शहरनामा गोरखपुर का विमोचन किया। इस मौके पर उन्होंनेे इतिहास के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि गोरखपुर को लेकर लोगों को अपनी अवधारणा बदलनी होगी। मुख्यमंत्री ने गोरखपुर की आपराधिक छवि के दुष्प्रचार से जुड़े अपने अनुभवों को भी साझा किया। बताया कि यह छवि कैसे यहां के विकास में लंबे समय तक रोड़ा बनी रही।
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उन्होंने कहा कि डॉ. पांडेय ने गोरखपुर के इतिहास को इस पुस्तक में समेटने की ईमानदारी से कोशिश की है। इससे न सिर्फ शोधार्थियों बल्कि आने वाली पीढ़ी को भी यहां की परंपरा, संस्कृति समेत कला, विज्ञान आदि के क्षेत्रों की महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सकेंगी। उन्होंने कहा कि भविष्य बनाने में अतीत हमेशा मददगार साबित होता है। इतिहास लेखन दुरूह है, मगर प्रेरणादायी है। इससे आने वाली पीढी़ यह जान सके गी कि उसे किस परंपरा के साथ आगे बढ़ना है। इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने कॉलेज परिसर में स्थित दिग्विजयनाथ की मूर्ति पर माल्यार्पण किया।
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लोकतंत्र में ही लिखा जा सकता है सच्चा इतिहास : प्रो. विश्वनाथ
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए साहित्य अकादमी के अध्यक्ष प्रो. विश्वनाथ तिवारी ने कहा कि इतिहास लिखते वक्त बहुत सावधानी बरतने की जरूरत होती है। तानाशाही और राजतंत्र में सच्चा इतिहास नहीं लिखा जा सकता। कहा कि अकबर के समय पांच बार अकाल पड़ा। तमाम लोग काल के गाल में समा गए, मगर आइने अकबरी लिखने वाले अबुलफ़ज्ल-ए-अल्लामी ने ऐसी कई घटनाओं का जिक्र ही नहीं किया। इसीलिए उनकी बहुत आलोचनाएं हुईं। उन्हें निर्लज्ज चाटुकार तक कहा गया।
प्रोफेसर ने कहा कि इतिहास लोकतंत्र में ही लिखा जा सकता है। सीएम बनने के बाद योगी आदित्यनाथ की यह पहली साहित्यिक सभा है। उनसे अपील है कि वह प्रदेश भर के साहित्यिक कार्यक्रमों में शिरकत करें। इससे समारोह की गरिमा तो बढ़ेगी ही साहित्यकारों का मनोबल भी बढ़ेगा। इस दौरान पूर्वांचल यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रो. यूपी सिंह, गोरखपुर यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग के प्रो. राजवंत राव, दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. शैलेंद्र प्रताप सिंह, वाणी प्रकाशन नई दिल्ली के व्यवस्थापक अरुणा माहेश्वरी ने भी डॉ. वेद प्रकाश द्वारा संपादित पुस्तक पर विचार व्यक्त किए।