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द पिलर्स स्कूल की संबद्धता खत्म
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Fri, 21 Apr 2017 01:29 AM IST
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द पिलर्स पब्लिक स्कूल।
- फोटो : Amar Ujala
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शहर के नामी स्कूल द पिलर्स की सिविल लाइंस ब्रांच की संबद्धता सीबीएसई ने खत्म कर दी है। यही नहीं, स्कूल प्रबंधन को मान्यता खत्म करने का नोटिस देते हुए सीबीएसई ने सत्र 2017-18 में कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों के प्रवेश पर रोक भी लगा दी है। साथ ही पहले से पंजीकृत 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों की परीक्षा दूसरे केंद्रों पर कराने का फैसला किया है। सीबीएसई की इस कार्रवाई से कक्षा नौ और 11 में प्रवेश ले चुके विद्यार्थियों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है।
सीबीएसई ने यह कार्रवाई मान्यता के लिए जरूरी मानक पूरा न करने पर की है। 12 जनवरी 2017 को डॉ. विनय कुमार पांडेय ने स्कूल प्रबंधन पर कई गंभीर आरोप लगाकर 14 बिंदुओं की शिकायत की थी। इसी क्रम में 20 जनवरी 2017 को सीबीएसई की निरीक्षण कमेटी ने स्कूल आकर सभी शिकायतों की जांच की। इस दौरान सभी बिंदुओं पर स्कूल प्रबंधन खरा नहीं उतरा। निरीक्षण कमेटी की रिपोर्ट पर बोर्ड ने नियम 17 के मुताबिक हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के सत्र 2017-18 की संबद्धता तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी है। साथ ही स्कूल प्रबंधन को हिदायत दी है कि सीबीएसई की संबद्धता का इस्तेमाल किसी भी तरह से न किया जाए।
इस बाबत स्कूल प्रबंधक आरपी शाही का कहना है कि उन्हें अभी सीबीएसई ओर से कोई नोटिस नहीं मिली है। नोटिस मिलने के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी। चैनल देखकर संबद्धता खत्म करने की जानकारी हुई है। नियम 17-2 बी के तहत गड़बड़ी ठीक करने के लिए एक साल का मौका मिलना चाहिए। बोर्ड के डायरेक्टर को पत्र लिखेंगे, न्याय नहीं मिला तो कोर्ट की शरण लेंगे।
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सीबीएसई मुख्यालय नई दिल्ली से सूचना के बाद गोरखपुर के द पिलर्स स्कूल की संबद्धता निरस्त कर दी गई है। अब स्कूल प्रबंधन विद्यार्थियों का प्रवेश नहीं ले सकेगा। जो भी कमियां हैं उसे दूर करने के बाद स्कूल प्रबंधन मुख्यालय के अफसरों से संपर्क करे, फिर आगे की कार्रवाई संभव होगी।
- विजय सिंह यादव, क्षेत्रीय अधिकारी (सीबीएसई, इलाहाबाद परिक्षेत्र)
स्कूल प्रबंधन ने हर साल फीस में बढ़ोतरी की है, जबकि सुविधाएं बढ़ाने के नाम पर कुछ नहीं किया। पानी, सुरक्षा, टॉयलेट, खेल का मैदान सहित सभी बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया गया। सीबीएसई के डिप्टी सेक्रेटरी (संबद्धता) ने द पिलर्स स्कूल में आई टीम की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि स्कूल प्रबंधन की ओर से शिक्षक और स्टॉफ के वेतन से ईपीएफ नहीं काटा गया है। शिक्षकों को बहुत कम वेतन दिया जा रहा है। यही नहीं, सुरक्षा और संरक्षा से भी जमकर खिलवाड़ किया गया है। स्कूल के पास सुरक्षा से संबंधित कोई भी सर्टिफिकेट मौजूद नहीं है।
इन बिंदुओं पर मिली गड़बड़ी
1- स्कूल प्रबंधन ने जमीन के कागजात, अनापत्ति प्रमाण पत्र, शिक्षकों के प्रशिक्षण सर्टिफिकेट, वेतन, ईपीएफ के कागजात प्रस्तुत नहीं किए
2- मानक के अनुसार वेतन, एलाउंस, ईपीएफ रिकार्ड नहीं मिला
3- राज्य शिक्षा अधिनियम के तहत किसी भी स्टॉफ और सेवा नियमावली का पालन नहीं किया गया
4- एफडीआर रिनुअल के लिए स्कूल प्रबंधन के पास रिजर्व फंड नहीं
5- सभी कक्षाओं में मानक से अधिक से अधिक बच्चों का नामांकन मिला
6-स्कूल में स्पोर्ट्स फैकल्टी बंद मिली, खेल का मैदान भी छोटा मिला
7-लाइब्रेरी में जरूरत के संसाधन नहीं हैं और लाइब्रेरियन की शैक्षिक योग्यता और अनुभव मानक के मुताबिक नहीं
8-ज्यादातर शिक्षक गेस्ट फैकल्टी के तौर पर पढ़ा रहे हैं और अप्रशिक्षित हैं
9- नियम के मुताबिक पीने का पानी, सफाई, आग से बचाव के यंत्र, बिल्डिंग की सुरक्षा, ट्रांसपोर्ट संबंधी सुरक्षा नहीं मिली
10-स्कूल की वेबसाइट बोर्ड के नियम के मुताबिक अपडेट नहीं हैं
11-नियम के मुताबिक सर्विस रूल का पालन नहीं हो रहा
12-फाइनेंसियल रिकार्ड उपलब्ध नहीं थे न ही वैरीफिकेशन के लिए उपलब्ध कराए गए
13- एक साल से स्थाई प्रिंसिपल का पद खाली है, जांच के दिन कार्यवाहक प्रिंसिपल भी गैरहाजिर थे
14- स्कूल में शिक्षण स्टॉफ, कमरे, सेक्शन, कुल छात्रों की संख्या में विरोधाभास मिला
सत्र 2017-18 में ली गई फीस
नर्सरी केजी 1 व 2 1 से 5 6 से 8 9 व 10 11 व 12
वार्षिक चार्ज 7200 7600 7200 9500 10600 12000
तिमाही फीस 7800 8500 8100 9200 10200 11200
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सीबीएसई ने यह कार्रवाई मान्यता के लिए जरूरी मानक पूरा न करने पर की है। 12 जनवरी 2017 को डॉ. विनय कुमार पांडेय ने स्कूल प्रबंधन पर कई गंभीर आरोप लगाकर 14 बिंदुओं की शिकायत की थी। इसी क्रम में 20 जनवरी 2017 को सीबीएसई की निरीक्षण कमेटी ने स्कूल आकर सभी शिकायतों की जांच की। इस दौरान सभी बिंदुओं पर स्कूल प्रबंधन खरा नहीं उतरा। निरीक्षण कमेटी की रिपोर्ट पर बोर्ड ने नियम 17 के मुताबिक हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के सत्र 2017-18 की संबद्धता तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी है। साथ ही स्कूल प्रबंधन को हिदायत दी है कि सीबीएसई की संबद्धता का इस्तेमाल किसी भी तरह से न किया जाए।
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इस बाबत स्कूल प्रबंधक आरपी शाही का कहना है कि उन्हें अभी सीबीएसई ओर से कोई नोटिस नहीं मिली है। नोटिस मिलने के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी। चैनल देखकर संबद्धता खत्म करने की जानकारी हुई है। नियम 17-2 बी के तहत गड़बड़ी ठीक करने के लिए एक साल का मौका मिलना चाहिए। बोर्ड के डायरेक्टर को पत्र लिखेंगे, न्याय नहीं मिला तो कोर्ट की शरण लेंगे।
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सीबीएसई मुख्यालय नई दिल्ली से सूचना के बाद गोरखपुर के द पिलर्स स्कूल की संबद्धता निरस्त कर दी गई है। अब स्कूल प्रबंधन विद्यार्थियों का प्रवेश नहीं ले सकेगा। जो भी कमियां हैं उसे दूर करने के बाद स्कूल प्रबंधन मुख्यालय के अफसरों से संपर्क करे, फिर आगे की कार्रवाई संभव होगी।
- विजय सिंह यादव, क्षेत्रीय अधिकारी (सीबीएसई, इलाहाबाद परिक्षेत्र)
स्कूल ने उड़ाई नियमों की जमकर धज्जियां
द पिलर्स स्कूल प्रबंधन ने मानक के हिसाब से सुविधाएं नहीं बढ़ाई बल्कि सीबीएसई के मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाईं। मान्यता लेते वक्त जितने भी कागजात सीबीएसई को उपलब्ध कराए थे, भौतिक सत्यापन में वे सहीं नहीं मिले। सीबीएसई ने सत्र 2017-18 के लिए कार्रवाई की है लेकिन भविष्य में स्कूल प्रबंधन के सामने मुश्किलें बढ़ सकती हैं। साल भर में सभी कमियों को दूर करने के बाद दोबारा संबद्धता के लिए दावेदारी करनी होगी। इसके बाद ही मान्यता पर फैसला होगा।स्कूल प्रबंधन ने हर साल फीस में बढ़ोतरी की है, जबकि सुविधाएं बढ़ाने के नाम पर कुछ नहीं किया। पानी, सुरक्षा, टॉयलेट, खेल का मैदान सहित सभी बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया गया। सीबीएसई के डिप्टी सेक्रेटरी (संबद्धता) ने द पिलर्स स्कूल में आई टीम की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि स्कूल प्रबंधन की ओर से शिक्षक और स्टॉफ के वेतन से ईपीएफ नहीं काटा गया है। शिक्षकों को बहुत कम वेतन दिया जा रहा है। यही नहीं, सुरक्षा और संरक्षा से भी जमकर खिलवाड़ किया गया है। स्कूल के पास सुरक्षा से संबंधित कोई भी सर्टिफिकेट मौजूद नहीं है।
इन बिंदुओं पर मिली गड़बड़ी
1- स्कूल प्रबंधन ने जमीन के कागजात, अनापत्ति प्रमाण पत्र, शिक्षकों के प्रशिक्षण सर्टिफिकेट, वेतन, ईपीएफ के कागजात प्रस्तुत नहीं किए
2- मानक के अनुसार वेतन, एलाउंस, ईपीएफ रिकार्ड नहीं मिला
3- राज्य शिक्षा अधिनियम के तहत किसी भी स्टॉफ और सेवा नियमावली का पालन नहीं किया गया
4- एफडीआर रिनुअल के लिए स्कूल प्रबंधन के पास रिजर्व फंड नहीं
5- सभी कक्षाओं में मानक से अधिक से अधिक बच्चों का नामांकन मिला
6-स्कूल में स्पोर्ट्स फैकल्टी बंद मिली, खेल का मैदान भी छोटा मिला
7-लाइब्रेरी में जरूरत के संसाधन नहीं हैं और लाइब्रेरियन की शैक्षिक योग्यता और अनुभव मानक के मुताबिक नहीं
8-ज्यादातर शिक्षक गेस्ट फैकल्टी के तौर पर पढ़ा रहे हैं और अप्रशिक्षित हैं
9- नियम के मुताबिक पीने का पानी, सफाई, आग से बचाव के यंत्र, बिल्डिंग की सुरक्षा, ट्रांसपोर्ट संबंधी सुरक्षा नहीं मिली
10-स्कूल की वेबसाइट बोर्ड के नियम के मुताबिक अपडेट नहीं हैं
11-नियम के मुताबिक सर्विस रूल का पालन नहीं हो रहा
12-फाइनेंसियल रिकार्ड उपलब्ध नहीं थे न ही वैरीफिकेशन के लिए उपलब्ध कराए गए
13- एक साल से स्थाई प्रिंसिपल का पद खाली है, जांच के दिन कार्यवाहक प्रिंसिपल भी गैरहाजिर थे
14- स्कूल में शिक्षण स्टॉफ, कमरे, सेक्शन, कुल छात्रों की संख्या में विरोधाभास मिला
सत्र 2017-18 में ली गई फीस
नर्सरी केजी 1 व 2 1 से 5 6 से 8 9 व 10 11 व 12
वार्षिक चार्ज 7200 7600 7200 9500 10600 12000
तिमाही फीस 7800 8500 8100 9200 10200 11200