{"_id":"5800e72a4f1c1b675229193f","slug":"case-on-400-shopkeeprs-of-nagar-nigam","type":"story","status":"publish","title_hn":"नगर निगम की 400 दुकानों के मालिकों पर मुकदमा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नगर निगम की 400 दुकानों के मालिकों पर मुकदमा
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Fri, 14 Oct 2016 07:39 PM IST
विज्ञापन
नगर निगम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नगर निगम की 2500 दुकानों के मालिकों के खिलाफ सख्ती शुरू हो गई है। किरायनामा पर स्टांप शुल्क नहीं जमा करने पर रजिस्ट्री विभाग ने चार सौ दुकान मालिकों पर एडीएम फाइनेंस कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया है। 2100 और दुकान मालिकों के खिलाफ भी इसी महीने मुकदमा दर्ज हो जाएगा। इन दुकान मालिकों पर स्टांप शुल्क का करीब दो करोड़ रुपये की देनदारी बन रही है। प्रत्येक दुकानदार पर आठ से दस हजार रुपये का बकाया निकल रहा है।
विभाग के मुताबिक मुकदमा दर्ज करने के बाद सभी को नोटिस भेजा जाएगा। स्टांप शुल्क की रकम जमा करने पर मुकदमा खत्म हो जाएगा मगर शुल्क नहीं जमा करने की दशा में केस चलेगा और बकाये का निर्धारण सही पाए जाने पर संबंधित से जुर्माना भी वसूला जा सकता है। कमिश्नर अनिल कुमार के निर्देश पर सभी दुकानों के किरायानामा दस्तावेजों की जांच की गई थी। जांच में पाया गया कि किसी ने भी स्टांप शुल्क नहीं जमा किया है। अब तक जितने भी दुकानदारों पर मुकदमा दर्ज हुआ है उन सभी का आवंटन 1998 के पहले हुआ था। ये दुकानें 1967 से अलग-अलग वर्षों में आवंटित हुईं।
महकमे के मुताबिक दुकान मालिकों के लिए बड़ी राहत यह है कि विभाग ने आवंटन के समय तय वार्षिक किराये के आधार पर ही स्टांप शुल्क की देनदारी तय की है। उस समय के नियमों के मुताबिक 10 साल के कुल वार्षिक किराये का 14.5 फीसदी स्टांप शुल्क के तौर पर जमा करना होता था। जिनपर कार्रवाई हुई है उनमें चार फाटक, गोलघर, इंदिरा बाल विहार और महेवा की दुकानें शामिल हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विभाग के मुताबिक मुकदमा दर्ज करने के बाद सभी को नोटिस भेजा जाएगा। स्टांप शुल्क की रकम जमा करने पर मुकदमा खत्म हो जाएगा मगर शुल्क नहीं जमा करने की दशा में केस चलेगा और बकाये का निर्धारण सही पाए जाने पर संबंधित से जुर्माना भी वसूला जा सकता है। कमिश्नर अनिल कुमार के निर्देश पर सभी दुकानों के किरायानामा दस्तावेजों की जांच की गई थी। जांच में पाया गया कि किसी ने भी स्टांप शुल्क नहीं जमा किया है। अब तक जितने भी दुकानदारों पर मुकदमा दर्ज हुआ है उन सभी का आवंटन 1998 के पहले हुआ था। ये दुकानें 1967 से अलग-अलग वर्षों में आवंटित हुईं।
विज्ञापन
महकमे के मुताबिक दुकान मालिकों के लिए बड़ी राहत यह है कि विभाग ने आवंटन के समय तय वार्षिक किराये के आधार पर ही स्टांप शुल्क की देनदारी तय की है। उस समय के नियमों के मुताबिक 10 साल के कुल वार्षिक किराये का 14.5 फीसदी स्टांप शुल्क के तौर पर जमा करना होता था। जिनपर कार्रवाई हुई है उनमें चार फाटक, गोलघर, इंदिरा बाल विहार और महेवा की दुकानें शामिल हैं।
विज्ञापन