{"_id":"5797b8744f1c1b356421f23e","slug":"cancer-treatment-inb-medical-college","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब मेडिकल कॉलेज में हो सकेगी कैंसर मरीजों की सेंकाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब मेडिकल कॉलेज में हो सकेगी कैंसर मरीजों की सेंकाई
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
Updated Wed, 27 Jul 2016 12:52 AM IST
विज्ञापन
मेडिकल कॉलेज के कोबाल्ट युनिट में लगी मशीन।
- फोटो : Mahesh Kumar
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कैंसर रोगियों के लिए एक अच्छी खबर है। अब उन्हें सेंकाई के लिए प्राइवेट अस्पताल में 20 से 25 हजार रुपये नहीं खर्च करने होंगे। अब मेडिकल कॉलेज में एक हजार रुपये में ही उन्हें यह सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री की पहल के बाद मेडिकल कॉलेज के कोबाल्ट यूनिट को शुरू करने के लिए भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर ने लाइसेंस दे दिया है। बुधवार को यूनिट की शुरुआत कर दी जाएगी।
मेडिकल कॉलेज के कोबाल्ट यूनिट में करीब पांच महीने पहले साढ़े चार करोड़ रुपये में टेलीथेरेपी और ब्रेकीथेरेपी मशीन लगाई गई थी। मगर एक के बाद एक पेंच फंसने से यहां पर सेंकाई नहीं शुरू हो पा रही थी। रेडियो आंकोलॉजी विभाग के अध्यक्ष मेजर डॉ. एमक्यू बेग ने बताया कि इसके लिए दो रेडियोटेक्नोलॉजी पहले ही मिल चुके थे। लाइसेंस का इंतजार किया जा रहा था, जो मंगलवार को मिल गया है। बुधवार को पहली सेंकाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि टेलीथेरेपी से जहां बाहर से सेंकाई होगी, वहीं ब्रेकीथेरेपी से अंदरुनी तौर पर कैंसर की जड़ को कमजोर किया जा सकेगा। टेलीथेरेपी की शुरुआत बुधवार को होगी, वहीं ब्रेकीथेरीपी मशीन भी एक महीने में काम करना शुरू कर देगी। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज में एक हजार रुपये में ही सेंकाई होगी। मगर जिन मरीजों को कम सेकाई करनी होगी उन्हें 35 रुपये के शुल्क में ही यह सुविधा मिलेगी। बीपीएल कार्ड धारकों, तीन एकड़ से कम खेत वालों और 35 हजार रुपये से कम आय वालों के लिए यह सुविधा मुफ्त होगी। रोजाना ओपीडी में कैंसर के 40 से 50 मरीज आते हैं, इनमें 15 से 20 मरीजों को सेंकाई की जरूरत होती है।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री ने की पहल
पहले यह मशीनें केंद्र सरकार की ओर से लगाई जानी थीं, लेकिन रकम को लेकर कॉलेज से तालमेल नहीं बैठ सका तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने की पहले पर मशीन लगाई गई। इसके बाद से इसे शुरू करने की प्रक्रिया की जा रही थी, मगर लाइसेंस नहीं मिल पा रहा था। मुख्यमंत्री मशीन को अपने ही कार्यकाल में शुरू कराना चाहते थे, जिसे लेकर काफी दबाव भी कॉलेज प्रशासन पर था। मगर अब सारी परेशानियां दूर हो गई हैं।
विज्ञापन
मेडिकल कॉलेज के कोबाल्ट यूनिट में करीब पांच महीने पहले साढ़े चार करोड़ रुपये में टेलीथेरेपी और ब्रेकीथेरेपी मशीन लगाई गई थी। मगर एक के बाद एक पेंच फंसने से यहां पर सेंकाई नहीं शुरू हो पा रही थी। रेडियो आंकोलॉजी विभाग के अध्यक्ष मेजर डॉ. एमक्यू बेग ने बताया कि इसके लिए दो रेडियोटेक्नोलॉजी पहले ही मिल चुके थे। लाइसेंस का इंतजार किया जा रहा था, जो मंगलवार को मिल गया है। बुधवार को पहली सेंकाई की जाएगी।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि टेलीथेरेपी से जहां बाहर से सेंकाई होगी, वहीं ब्रेकीथेरेपी से अंदरुनी तौर पर कैंसर की जड़ को कमजोर किया जा सकेगा। टेलीथेरेपी की शुरुआत बुधवार को होगी, वहीं ब्रेकीथेरीपी मशीन भी एक महीने में काम करना शुरू कर देगी। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज में एक हजार रुपये में ही सेंकाई होगी। मगर जिन मरीजों को कम सेकाई करनी होगी उन्हें 35 रुपये के शुल्क में ही यह सुविधा मिलेगी। बीपीएल कार्ड धारकों, तीन एकड़ से कम खेत वालों और 35 हजार रुपये से कम आय वालों के लिए यह सुविधा मुफ्त होगी। रोजाना ओपीडी में कैंसर के 40 से 50 मरीज आते हैं, इनमें 15 से 20 मरीजों को सेंकाई की जरूरत होती है।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री ने की पहल
पहले यह मशीनें केंद्र सरकार की ओर से लगाई जानी थीं, लेकिन रकम को लेकर कॉलेज से तालमेल नहीं बैठ सका तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने की पहले पर मशीन लगाई गई। इसके बाद से इसे शुरू करने की प्रक्रिया की जा रही थी, मगर लाइसेंस नहीं मिल पा रहा था। मुख्यमंत्री मशीन को अपने ही कार्यकाल में शुरू कराना चाहते थे, जिसे लेकर काफी दबाव भी कॉलेज प्रशासन पर था। मगर अब सारी परेशानियां दूर हो गई हैं।