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बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मलद्वार को बिना काटे तीन घंटे में कैंसर का सफल ऑपरेशन

Mon, 16 Dec 2019 10:45 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Mon, 16 Dec 2019 10:45 AM IST
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cancer operation gorakhpur
गोरखपुर के बीआडी में लल्लन यादव, गोपालगंज बिहार का हुआ कैंसर ऑपरेशन।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मलद्वार को बिना काटे कैंसर का सफल ऑपरेशन किया गया है। इस जटिल ऑपरेशन को सर्जन असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अभिषेक जीना ने तीन घंटे में किया। अभी तक इस तरह के ऑपरेशन के लिए मरीज को लखनऊ या दिल्ली जाना पड़ता है।
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डॉ जीना ने पहली बार ऐसा ऑपरेशन किया है। इसमें सर्कुलर स्टेपलर मशीन का इस्तेमाल किया गया है। मरीज गोपालगंज, बिहार के लल्लन यादव अब पूरी तरह से स्वस्थ हैं और रविवार को उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है।
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गोपलगंज, बिहार के विश्वभंरपुर निवासी लल्लन यादव को दो साल से मलद्वार के रास्ते खून निकल रहा था। 25 नवंबर 2019 को मेडिकल कॉलेज के सर्जन असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अभिषेक जीना ने जांच में पाया कि मलद्वार के रास्ते में एक गांठ है। इसकी जांच की गई जिसमें कैंसर की पुष्टि हुई। यह मलद्वार से चार सेेंटीमीटर ऊपर था। आमतौर पर ऐसे कैंसर में एबडमिनो पेरीनियल सर्जरी (एपीआर) की जाती है, जिसमें मलद्वार को काटकर निकाल दिया जाता है और स्थायी रूप से पेट से मलद्वार बना दिया जाता है। डॉ जीना ने बताया कि लल्लन का ऑपरेशन अल्ट्रा लो लॉर सर्जरी से करने का निर्णय लिया गया। इस विधि से मलद्वार कटने से बच जाता है।
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मलद्वार के नीचे हिस्से को जोड़कर पहले जैसा ही बना देते हैं और कैंसर वाले भाग को निकाल दिया जाता है। डॉ जीना ने बताया कि दो दिसंबर को सफल ऑपरेशन किया गया। उन्होंने बताया कि अगर मलद्वार से खून और बार-बार बाथरूम व शौच जाना पड़ रहा है तो इसे नजरअंदाज मत करें। चिकित्सक से तत्काल परामर्श लें। अल्ट्रा लो लॉर सर्जरी में डॉ जीना के साथ डॉ सत्यवीर, डा राहुल, एनेशथिशिया के डॉ नरेंद्र देव एवं डॉ मेहताब थे।

प्रमुख कारण

धुम्रपान, अत्यधिक चर्बी, वसा युक्त भोजन, आनुवंशिकी।

लक्षण
मलद्वार से खून आना, शौच के लिए बार-बार जाना, अत्यधिक कब्ज होना आदि।

बचाव के उपाय
डॉ अभिषेक जीना ने बताया कि इससे बचने के लिए धूम्रपान बंद कर संतुलित भोजन (कम तेल व चर्बी) लेना चाहिए। 45 वर्ष की उम्र के बाद अगर लक्षण दिखे तो क्लानोस्कोपी जरूर कराना चाहिए।
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