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हाते पर छापे के खिलाफ जुलूस, प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Tue, 25 Apr 2017 01:54 AM IST
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कलेक्ट्रेट में धरना देने पहुंचे बसपाई।
- फोटो : Amar Ujala
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पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के सुमेर सागर स्थित आवास (हाता) पर हुई छापेमारी के विरोध में बसपा नेताओं और समर्थकों ने सोमवार को न सिर्फ प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और प्रदर्शन किया बल्कि कलेक्ट्रेट परिसर में धरना भी दिया। विधायक विनय शंकर तिवारी ने राज्यपाल के नाम संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपकर सीएम के निर्देश पर छवि खराब करने का आरोप लगाया और एसपी सिटी को सस्पेंड करने की मांग की।
सोमवार की सुबह करीब पौने ग्यारह बजे हाता से जुलूस की शक्ल में बसपा विधायक विनय शंकर तिवारी और विधान परिषद के पूर्व सभापति गणेश शंकर पांडेय समर्थकों के साथ निकले। इसके कुछ देर बाद पूर्व सांसद भीष्म शंकर तिवारी उर्फ कुशल तिवारी भी समर्थकों के साथ धरनास्थल की ओर रवाना हुए। सबसे बाद में पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी भी पैदल पहुंच गए। उधर, कलेक्ट्रेट परिसर छावनी में तब्दील हो गया था। पुलिस ने अधिवक्ताओं और पैरवी करने वालों को भी बगैर चेकिंग के घुसने नहीं दिया।
जुलूस जब कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ा तो मेन गेट बंद कर दिया गया। विधायक विनय शंकर ने पुलिस अफसरों से नाराजगी जताई और इसी बीच समर्थक गेट खोलकर घुसने में कामयाब हो गए। शाम करीब चार बजे तक चले धरने में बसपा प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर, विधान मंडल दल के नेता लालजी वर्मा, पूर्व सांसद घनश्याम चंद खरवार सहित काफी संख्या में पार्टी के नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे।
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पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के हाता में छापेमारी के विरोध में सोमवार को बसपा कार्यकर्ताओं के धरने को देखते हुए भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी। कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश करने वाले तीनों गेट बंद कर दिए गए थे। आम लोगों को भी बड़ी मुश्किल से प्रवेश मिल पा रहा था। कलेक्ट्रेट परिसर से लेकर आसपास के चौराहों पर 356 पुलिस वालों की तैनाती की गई थी लेकिन बाद में पुलिस ने सख्ती कम कर दी और धरना चलने दिया।
धरने में भीड़ को देखते हुए तीन एसपी, पांच सीओ, 13 एसओ, 39 दरोगा, दो महिला दरोगा, 250 सिपाही, 44 महिला सिपाही समेत डेढ़ सेक्शन पीएसपी भी तैनात की गई थी। इसके साथ ही दो फायर टैंक, आंसू गैस छोड़ने वाली चार गाड़ियों की व्यवस्था की गई थी। परिसर में आने-जाने वालों पर पुलिस की नजर थी और अफसर पल-पल की रिपोर्ट ले रहे थे। हालांकि भीड़ ज्यादा न होने पर पुलिस ने सख्ती कम कर दी थी। धरने के वक्त कुछ ही पुलिस वाले परिसर में नजर आए।
पांच सीसीटीवी कैमरे लगाए गए
कलेक्ट्रेट परिसर में धरने को देखते हुए पांच सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इसकी मानीटरिंग पुलिस अफसर खुद कर रहे थे। वे समय-समय पर पुलिस वालों को निर्देश भी दे रहे थे।
पुलिस ने कराई वीडियोग्राफी
कलेक्ट्रेट गेट से दाखिल होने से लेकर धरना समाप्ति तक पुलिस ने वीडियोग्राफी कराई। पुलिस वाले अलग-अलग स्थानों पर वीडियो कैमरे लेकर धरने में शामिल होने वालों को रिकॉर्डिंग कर रहे थे।
माथापच्ची के बाद 11:30 बजे मिली अनुमति
धरने की अनुमति लेने के लिए रविवार की सुबह से ही विधायक विनय शंकर तिवारी के समर्थक कोशिश में लगे थे, मगर अफसर धारा 144 लागू होने का हवाला देते हुए इन्कार कर रहे थे। रात में एडीएम, एसपी सिटी, सीओ कैंट और अन्य अफसरों ने बैठक करने के बाद रात 11:30 बजे धरने की अनुमति दी।
जेनरेटर और साउंड सिस्टम हटवा दिए गए
कलेक्ट्रेट परिसर में धरने के मद्देनजर सुबह ही जेनरेटर और साउंड सिस्टम लगा दिए गए थे, लेकिन पुलिस ने जेनरेटर वाले को भगाने के साथ ही साउंड सिस्टम हटवा दिए। सिर्फ एक ही सिस्टम लगाने की अनुमति दी गई। बाद में ई डिस्टिक से कटिया कनेक्शन लेकर लाउडस्पीकर का इस्तेमाल किया गया।
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सोमवार की सुबह करीब पौने ग्यारह बजे हाता से जुलूस की शक्ल में बसपा विधायक विनय शंकर तिवारी और विधान परिषद के पूर्व सभापति गणेश शंकर पांडेय समर्थकों के साथ निकले। इसके कुछ देर बाद पूर्व सांसद भीष्म शंकर तिवारी उर्फ कुशल तिवारी भी समर्थकों के साथ धरनास्थल की ओर रवाना हुए। सबसे बाद में पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी भी पैदल पहुंच गए। उधर, कलेक्ट्रेट परिसर छावनी में तब्दील हो गया था। पुलिस ने अधिवक्ताओं और पैरवी करने वालों को भी बगैर चेकिंग के घुसने नहीं दिया।
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जुलूस जब कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ा तो मेन गेट बंद कर दिया गया। विधायक विनय शंकर ने पुलिस अफसरों से नाराजगी जताई और इसी बीच समर्थक गेट खोलकर घुसने में कामयाब हो गए। शाम करीब चार बजे तक चले धरने में बसपा प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर, विधान मंडल दल के नेता लालजी वर्मा, पूर्व सांसद घनश्याम चंद खरवार सहित काफी संख्या में पार्टी के नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे।
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पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के हाता में छापेमारी के विरोध में सोमवार को बसपा कार्यकर्ताओं के धरने को देखते हुए भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी। कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश करने वाले तीनों गेट बंद कर दिए गए थे। आम लोगों को भी बड़ी मुश्किल से प्रवेश मिल पा रहा था। कलेक्ट्रेट परिसर से लेकर आसपास के चौराहों पर 356 पुलिस वालों की तैनाती की गई थी लेकिन बाद में पुलिस ने सख्ती कम कर दी और धरना चलने दिया।
धरने में भीड़ को देखते हुए तीन एसपी, पांच सीओ, 13 एसओ, 39 दरोगा, दो महिला दरोगा, 250 सिपाही, 44 महिला सिपाही समेत डेढ़ सेक्शन पीएसपी भी तैनात की गई थी। इसके साथ ही दो फायर टैंक, आंसू गैस छोड़ने वाली चार गाड़ियों की व्यवस्था की गई थी। परिसर में आने-जाने वालों पर पुलिस की नजर थी और अफसर पल-पल की रिपोर्ट ले रहे थे। हालांकि भीड़ ज्यादा न होने पर पुलिस ने सख्ती कम कर दी थी। धरने के वक्त कुछ ही पुलिस वाले परिसर में नजर आए।
पांच सीसीटीवी कैमरे लगाए गए
कलेक्ट्रेट परिसर में धरने को देखते हुए पांच सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इसकी मानीटरिंग पुलिस अफसर खुद कर रहे थे। वे समय-समय पर पुलिस वालों को निर्देश भी दे रहे थे।
पुलिस ने कराई वीडियोग्राफी
कलेक्ट्रेट गेट से दाखिल होने से लेकर धरना समाप्ति तक पुलिस ने वीडियोग्राफी कराई। पुलिस वाले अलग-अलग स्थानों पर वीडियो कैमरे लेकर धरने में शामिल होने वालों को रिकॉर्डिंग कर रहे थे।
माथापच्ची के बाद 11:30 बजे मिली अनुमति
धरने की अनुमति लेने के लिए रविवार की सुबह से ही विधायक विनय शंकर तिवारी के समर्थक कोशिश में लगे थे, मगर अफसर धारा 144 लागू होने का हवाला देते हुए इन्कार कर रहे थे। रात में एडीएम, एसपी सिटी, सीओ कैंट और अन्य अफसरों ने बैठक करने के बाद रात 11:30 बजे धरने की अनुमति दी।
जेनरेटर और साउंड सिस्टम हटवा दिए गए
कलेक्ट्रेट परिसर में धरने के मद्देनजर सुबह ही जेनरेटर और साउंड सिस्टम लगा दिए गए थे, लेकिन पुलिस ने जेनरेटर वाले को भगाने के साथ ही साउंड सिस्टम हटवा दिए। सिर्फ एक ही सिस्टम लगाने की अनुमति दी गई। बाद में ई डिस्टिक से कटिया कनेक्शन लेकर लाउडस्पीकर का इस्तेमाल किया गया।