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शिवप्रताप का वनवास खत्म, जाएंगे राज्यसभा
Updated Tue, 31 May 2016 12:29 AM IST
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भाजपा
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टीपी शाही
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवप्रताप शुक्ला का सियासी वनवास खत्म हो गया। 14 साल बाद वह देश की सबसे बड़ी पंचायत में पहुंचने जा रहे हैं। 2002 का विधानसभा चुनाव हारने के बाद से ही वह हाशिए पर थे। सूर्यप्रताप शाही के प्रदेश अध्यक्ष बनने पर उन्हें संगठन की जिम्मेदारी दी गई। लक्ष्मीकांत वाजपेयी के समय से वह प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में संगठन का कार्य देख रहे हैं।
पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवप्रताप शुक्ला का सियासी सफर संघ की पाठशाला से शुरू हुआ। लंबे समय तक वह कानपुर और इलाहाबाद में संगठन मंत्री रहे। विद्यार्थी जीवन में विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता के रूप में भी कार्य किया। 1989 में सबसे पहले भाजपा ने उन्हें सदर विधानसभा से चुनाव मैदान में उतारा। अपनी उपयोगिता साबित कर उन्होंने कांग्रेस हुकूमत में मंत्री रहे पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री के बेटे सुनील शास्त्री को हराकर स्थानीय सियासत में भूचाल ला दिया। वहां से उनका सियासी सफर आगे बढ़ता गया। 1991, 1993, और 1996 में लगातार विधायक चुने गए। वह सबसे पहले कल्याण सिंह की सरकार में मंत्री बने। उसके बाद राजनाथ, रामप्रकाश गुप्त की सरकार में भी कैबिनेट मंत्री रहे।
इस दौरान ही सांसद महंत आदित्यनाथ से उनका मतभेद हो गया। दूरी इस कदर बढ़ी कि दोनों के समर्थक आमने-सामने आ गए। एक तरफ सत्ता का दबाव तो दूसरी तरफ मंदिर की प्रतिष्ठा। दोनों के बीच खाई इस कदर बढ़ी कि 2002 के विधानसभा चुनाव में महंत आदित्यनाथ ने हिंदू युवा वाहिनी खड़ी कर हिंदू महासभा के बैनर पर राधा मोहनदास अग्रवाल को भाजपा के खिलाफ मैदान में उतार दिया। परिणाम महंत के पक्ष में गया। उनकी हनक बढ़ती गई और पार्टी खामोशी ओढ़ती गई। तभी से शुक्ला को कोई टिकट नहीं मिल पाया। फिर भी वह संगठन की जिम्मेदारी निष्ठावान कार्यकर्ता के रूप में निभाते रहे।
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इधर पार्टी मिशन-2017 में लग गई है। सामाजिक समीकरण के तहत पार्टी ने ब्राह्मण प्रदेश अध्यक्ष की जगह पिछड़े वर्ग के केशव मौर्य को अध्यक्ष बनाया। हृदयनारायण दीक्षित का विधान परिषद कार्यकाल समाप्त हो गया। इधर बसपा ने तीसरी बार सतीश मिश्रा को राज्यसभा में भेज कर ब्राह्मणों को अपने पाले में करने का दांव चला। नतीजे स्वरूप भाजपा ने जातीय समीकरण साधने और ब्राह्मणों को संदेश देने के लिए शिवप्रताप को राज्यसभा में भेज रही है।
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भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवप्रताप शुक्ला का सियासी वनवास खत्म हो गया। 14 साल बाद वह देश की सबसे बड़ी पंचायत में पहुंचने जा रहे हैं। 2002 का विधानसभा चुनाव हारने के बाद से ही वह हाशिए पर थे। सूर्यप्रताप शाही के प्रदेश अध्यक्ष बनने पर उन्हें संगठन की जिम्मेदारी दी गई। लक्ष्मीकांत वाजपेयी के समय से वह प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में संगठन का कार्य देख रहे हैं।
पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवप्रताप शुक्ला का सियासी सफर संघ की पाठशाला से शुरू हुआ। लंबे समय तक वह कानपुर और इलाहाबाद में संगठन मंत्री रहे। विद्यार्थी जीवन में विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता के रूप में भी कार्य किया। 1989 में सबसे पहले भाजपा ने उन्हें सदर विधानसभा से चुनाव मैदान में उतारा। अपनी उपयोगिता साबित कर उन्होंने कांग्रेस हुकूमत में मंत्री रहे पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री के बेटे सुनील शास्त्री को हराकर स्थानीय सियासत में भूचाल ला दिया। वहां से उनका सियासी सफर आगे बढ़ता गया। 1991, 1993, और 1996 में लगातार विधायक चुने गए। वह सबसे पहले कल्याण सिंह की सरकार में मंत्री बने। उसके बाद राजनाथ, रामप्रकाश गुप्त की सरकार में भी कैबिनेट मंत्री रहे।
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इस दौरान ही सांसद महंत आदित्यनाथ से उनका मतभेद हो गया। दूरी इस कदर बढ़ी कि दोनों के समर्थक आमने-सामने आ गए। एक तरफ सत्ता का दबाव तो दूसरी तरफ मंदिर की प्रतिष्ठा। दोनों के बीच खाई इस कदर बढ़ी कि 2002 के विधानसभा चुनाव में महंत आदित्यनाथ ने हिंदू युवा वाहिनी खड़ी कर हिंदू महासभा के बैनर पर राधा मोहनदास अग्रवाल को भाजपा के खिलाफ मैदान में उतार दिया। परिणाम महंत के पक्ष में गया। उनकी हनक बढ़ती गई और पार्टी खामोशी ओढ़ती गई। तभी से शुक्ला को कोई टिकट नहीं मिल पाया। फिर भी वह संगठन की जिम्मेदारी निष्ठावान कार्यकर्ता के रूप में निभाते रहे।
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इधर पार्टी मिशन-2017 में लग गई है। सामाजिक समीकरण के तहत पार्टी ने ब्राह्मण प्रदेश अध्यक्ष की जगह पिछड़े वर्ग के केशव मौर्य को अध्यक्ष बनाया। हृदयनारायण दीक्षित का विधान परिषद कार्यकाल समाप्त हो गया। इधर बसपा ने तीसरी बार सतीश मिश्रा को राज्यसभा में भेज कर ब्राह्मणों को अपने पाले में करने का दांव चला। नतीजे स्वरूप भाजपा ने जातीय समीकरण साधने और ब्राह्मणों को संदेश देने के लिए शिवप्रताप को राज्यसभा में भेज रही है।