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चंदनबाला पर आधारित नाटक का किया गया मंचन
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sun, 09 Apr 2017 01:08 AM IST
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महावीर जयंती के जन्मोत्सव के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए।
- फोटो : Amar Ujala
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आर्यनगर स्थित पार्श्वनाथ दिगंबर जैन सोसायटी के तत्वावधान में आर्यनगर स्थित जैन मंदिर में भगवान महावीर की जयंती पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि डीआईजी गोरखपुर एन. चौधरी मौजूद रहे। इस दौरान राजकुमारी चंदन बाला पर आधारित नाटक का मंचन किया गया। राजकुमारी चंदना बाला ने ही महावीर को पहला आहार दिया था।
कार्यक्रम में पुनीत जैन ने बताया कि जैन मुनियों में मान्यता है कि आहार लेने जाते समय मन में ठानी हुई कल्पना आहार लेने जाने वाले के पास पूरी हो जाती है तभी आहार लिया जाता है। इसके बाद पार्श्वनाथ दिगंबर जैन सोसाइटी के सदस्य राय रवींद्र जैन ने स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इसके पहले डीआईजी ने 1200 साल पहले बने पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में जाकर पार्श्वनाथ भगवान की आरती की उसके बाद मंदिर में स्थित अन्य जैन तीर्थंकर भगवान के दर्शन किए। इस दौरान शिवेंद्र सिंह, पीके लाहिड़ी, अंजित लाहिड़ी मौजूद रहे।
नाथ संप्रदाय के अगुआ हैं आदिनाथ
कार्यक्रम में मौजूद धनेंद्र जैन ने बताया कि जैन समुदाय का मानना है कि इस धरती के रचयिता आदिनाथ भगवान ही है। नाथ संप्रदाय के लोग भी आदिनाथ के सिद्धांतों का अनुसरण करते हैं। उन्होंने बताया कि महाभारत में भी भगवान कृष्ण ने पार्श्व को आदिनाथ के हठ,योग के बारे में उपदेश दिया था।
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कार्यक्रम में पुनीत जैन ने बताया कि जैन मुनियों में मान्यता है कि आहार लेने जाते समय मन में ठानी हुई कल्पना आहार लेने जाने वाले के पास पूरी हो जाती है तभी आहार लिया जाता है। इसके बाद पार्श्वनाथ दिगंबर जैन सोसाइटी के सदस्य राय रवींद्र जैन ने स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इसके पहले डीआईजी ने 1200 साल पहले बने पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में जाकर पार्श्वनाथ भगवान की आरती की उसके बाद मंदिर में स्थित अन्य जैन तीर्थंकर भगवान के दर्शन किए। इस दौरान शिवेंद्र सिंह, पीके लाहिड़ी, अंजित लाहिड़ी मौजूद रहे।
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नाथ संप्रदाय के अगुआ हैं आदिनाथ
कार्यक्रम में मौजूद धनेंद्र जैन ने बताया कि जैन समुदाय का मानना है कि इस धरती के रचयिता आदिनाथ भगवान ही है। नाथ संप्रदाय के लोग भी आदिनाथ के सिद्धांतों का अनुसरण करते हैं। उन्होंने बताया कि महाभारत में भी भगवान कृष्ण ने पार्श्व को आदिनाथ के हठ,योग के बारे में उपदेश दिया था।
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