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एटीएम में रुपये नहीं हैं, खेद है
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Wed, 20 Apr 2016 12:40 AM IST
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नगर निगम गेट के पास खराब पड़ा बैकआफ बड़ौदा बैक का एटीएम।
- फोटो : rajesh kumar
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एटीएम में रुपये न होने से लोगों को काफी दिक्कत उठानी पड़ रही है। सोमवार को एटीएम से रुपये न निकाल पाने वाले मंगलवार को भी भटकते रहे। जिस भी बैंक के एटीएम में लोग पहुंचे, वहां रुपये नहीं है, खेद है की तख्ती देखकर लौट गए। कई लोग तो बाहरी इलाकों तक में गए ताकि उनकी जरूरतें पूरी हो जाएं, मगर वहां भी निराशा हाथ लगी। रेलवे जीएम दफ्तर के पास दो एटीएम में रुपये थे, मगर वहां शाम तक लंबी लाइन लगी रही।
बृहस्पतिवार से ही एटीएम में रुपये की कमी हो गई है। पहले अंबेडकर जयंती और रामनवमी की छुट्टी होने से बैंक नहीं खुले। ऐसे में एटीएम खाली हो गए और अब नोट की कमी हो जाने से उन्हें भरा ही नहीं जा पा रहा। तारामंडल, टाउन हाल, कचहरी, पैडलेगंज, मोहद्दीपुर, कूड़ा घाट ही नहीं कई अन्य इलाकों के एटीएम का भी यही हाल रहा।
कई मोहल्लों में तो तकनीकी खराबी से एटीएम काम ही नहीं कर रहे और जहां कर रहे हैं, वहां रुपये ही नहीं हैं। लगातार दूसरे दिन लोग एक से दूसरे एटीएम का चक्कर लगाते रहे। जरूरतमंद लोग शहर के बाहरी हिस्से में लगे एटीएम से भी निराश लौटे। प्राइवेट बैंक हाें या सरकारी सभी के एटीएम का यही हाल था। रुपये खत्म होने के बाद कई प्राइवेट बैंकों ने जहां मशीन खराब होने का बोर्ड लगा दिया वहीं सरकारी बैंकों ने रुपये खत्म होने का।
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बैंक अफसरों की मानें तो करेंसी चेस्ट में नोटों की कमी हो गई है। भारतीय रिजर्व बैंक से मांग के अनुसार रकम नहीं आ पा रही है। अफसरों का कहना है कि ऐसे हालात पांच साल बाद सामने आए हैं। प्राइवेट बैंकों से मदद लेने का प्रयास किया जा रहा है मगर सरकारी बैंकों के एटीएम खाली होने से प्राइवेट बैंकों के एटीएम पर लोड बढ़ गया है।
दो घंटे परेशान रहा
मुझे शादी समारोह में शामिल होने जाना था। गिफ्ट खरीदने के लिए बाजार गया तो सोचा रुपये निकाल लूं मगर एटीएम पर जाने पर पता चला कि रुपये ही नहीं हैं। पूरे शहर घूमने के बाद रेलवे जीएम आफिस के पास घंटों लाइन में लगकर रुपये निकाल सका।
- संजय पांडेय, बक्शीपुर
खरीदारी नहीं कर सका
एटीएम में रुपये न होने से बड़ी परेशानी हो रही है। अभी दो दिन पहले भी रुपये की जरूरत पड़ने पर एटीएम पर गया, मगर निराशा हाथ लगी। मंगलवार को खरीदारी करने निकला, मगर किसी भी एटीएम से रुपये नहीं मिल सके। ऐसे में बिना खरीदारी किए लौटना पड़ा।
- राकेश गुप्ता, शाही मार्केट
मांग के सापेक्ष नोटों की आपूर्ति न होने से दिक्कत आ रही है। करेंसी चेस्ट में रुपये खत्म होने के कगार पर पहुंच गए हैं। किसी तरह से काम चलाया जा रहा है।
- एम.साद इम्तियाज हुसैनी, डीजीएम, एसबीआई
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बृहस्पतिवार से ही एटीएम में रुपये की कमी हो गई है। पहले अंबेडकर जयंती और रामनवमी की छुट्टी होने से बैंक नहीं खुले। ऐसे में एटीएम खाली हो गए और अब नोट की कमी हो जाने से उन्हें भरा ही नहीं जा पा रहा। तारामंडल, टाउन हाल, कचहरी, पैडलेगंज, मोहद्दीपुर, कूड़ा घाट ही नहीं कई अन्य इलाकों के एटीएम का भी यही हाल रहा।
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कई मोहल्लों में तो तकनीकी खराबी से एटीएम काम ही नहीं कर रहे और जहां कर रहे हैं, वहां रुपये ही नहीं हैं। लगातार दूसरे दिन लोग एक से दूसरे एटीएम का चक्कर लगाते रहे। जरूरतमंद लोग शहर के बाहरी हिस्से में लगे एटीएम से भी निराश लौटे। प्राइवेट बैंक हाें या सरकारी सभी के एटीएम का यही हाल था। रुपये खत्म होने के बाद कई प्राइवेट बैंकों ने जहां मशीन खराब होने का बोर्ड लगा दिया वहीं सरकारी बैंकों ने रुपये खत्म होने का।
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करेंसी चेस्ट में नोटों की कमी हो गई
बैंक अफसरों की मानें तो करेंसी चेस्ट में नोटों की कमी हो गई है। भारतीय रिजर्व बैंक से मांग के अनुसार रकम नहीं आ पा रही है। अफसरों का कहना है कि ऐसे हालात पांच साल बाद सामने आए हैं। प्राइवेट बैंकों से मदद लेने का प्रयास किया जा रहा है मगर सरकारी बैंकों के एटीएम खाली होने से प्राइवेट बैंकों के एटीएम पर लोड बढ़ गया है।
दो घंटे परेशान रहा
मुझे शादी समारोह में शामिल होने जाना था। गिफ्ट खरीदने के लिए बाजार गया तो सोचा रुपये निकाल लूं मगर एटीएम पर जाने पर पता चला कि रुपये ही नहीं हैं। पूरे शहर घूमने के बाद रेलवे जीएम आफिस के पास घंटों लाइन में लगकर रुपये निकाल सका।
- संजय पांडेय, बक्शीपुर
खरीदारी नहीं कर सका
एटीएम में रुपये न होने से बड़ी परेशानी हो रही है। अभी दो दिन पहले भी रुपये की जरूरत पड़ने पर एटीएम पर गया, मगर निराशा हाथ लगी। मंगलवार को खरीदारी करने निकला, मगर किसी भी एटीएम से रुपये नहीं मिल सके। ऐसे में बिना खरीदारी किए लौटना पड़ा।
- राकेश गुप्ता, शाही मार्केट
मांग के सापेक्ष नोटों की आपूर्ति न होने से दिक्कत आ रही है। करेंसी चेस्ट में रुपये खत्म होने के कगार पर पहुंच गए हैं। किसी तरह से काम चलाया जा रहा है।
- एम.साद इम्तियाज हुसैनी, डीजीएम, एसबीआई