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आयोडीन की जांच को घर-घर जाएंगी आशा
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
Updated Sun, 28 Aug 2016 09:01 PM IST
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नमक
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देवरिया और गोरखपुर में आयोडिन नमक का इस्तेमाल बेहद कम पाया गया है। एक सर्वे में स्वास्थ्य विभाग की ओर से जागरूक करने के बाद भी आयोडिन नमक के कम इस्तेमाल की पुष्टि हुई है। प्रदेश में कराए गए सर्वे में 24 जिले ऐसे पाए गए हैं जहां आयोडिन का इस्तेमाल अब भी कम हो रहा है। इन जिलों में अब नमक की जांच कराई जाएगी। इसके लिए किट आ गई है। यह जिम्मेदारी आशाओं को सौंपी गई है।
सरकार ने पूरे प्रदेश में आयोडिन नमक के इस्तेमाल पर सर्वे कराया था। इनमें 24 ऐसे जिलों के नाम सामने आए हैं जहां अब भी आयोडिन नमक का कम इस्तेमाल हो रहा है। इनमें गोरखपुर और देवरिया भी शामिल है। अब सरकार इन जिलों के ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में नमक में आयोडिन की मात्रा जांचेगी। आशाओं को जांच के लिए विशेष किट दी गई है। इसमें नीला और बैगनी रंग के निशान बने हैं। हर निशान के हिसाब से आयोडिन की मात्रा का पता चल जाएगा।
आशाओं को हर घर में जाकर नमक की जांच करनी है। एक महीने में एक आशा को 50 घरों की जांच का लक्ष्य दिया गया है। यहीं नहीं, आशाओं को इससे होने वाले नुकसान के बारे में भी लोगों को जानकारी देनी होगी। एक बार जांच के बाद आशाओं को दोबारा उन घरों में जाकर यह भी देखना होगा कि आयोडिन की मात्रा बढ़ी या नहीं। शहरी क्षेत्र में जांच के लिए आशा के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम भी जाएगी।
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सरकार ने पूरे प्रदेश में आयोडिन नमक के इस्तेमाल पर सर्वे कराया था। इनमें 24 ऐसे जिलों के नाम सामने आए हैं जहां अब भी आयोडिन नमक का कम इस्तेमाल हो रहा है। इनमें गोरखपुर और देवरिया भी शामिल है। अब सरकार इन जिलों के ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में नमक में आयोडिन की मात्रा जांचेगी। आशाओं को जांच के लिए विशेष किट दी गई है। इसमें नीला और बैगनी रंग के निशान बने हैं। हर निशान के हिसाब से आयोडिन की मात्रा का पता चल जाएगा।
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आशाओं को हर घर में जाकर नमक की जांच करनी है। एक महीने में एक आशा को 50 घरों की जांच का लक्ष्य दिया गया है। यहीं नहीं, आशाओं को इससे होने वाले नुकसान के बारे में भी लोगों को जानकारी देनी होगी। एक बार जांच के बाद आशाओं को दोबारा उन घरों में जाकर यह भी देखना होगा कि आयोडिन की मात्रा बढ़ी या नहीं। शहरी क्षेत्र में जांच के लिए आशा के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम भी जाएगी।
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