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अनिल बने नए एआईजी स्टांप
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Fri, 12 Aug 2016 01:25 AM IST
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अनिल कुमार सिंह गोरखपुर के नए एआईजी स्टांप बनाए गए हैं। इसके पहले यहां तैनात रामशंकर सिंह की तैनाती लखनऊ स्थित रजिस्ट्री मुख्यालय में कर दी गई है। नए एआईजी के यहां अगले सप्ताह तक चार्ज संभालने की उम्मीद है। इससे पहले वह सब रजिस्ट्रार पद से प्रोन्नत होकर करीब तीन महीने से मुख्यालय पर बतौर एआईजी स्टांप तैनात थे।
उधर, फर्जी बैनामों को निरस्त कर तमाम गरीबों की मदद के लिए एआईजी रामशंकर सिंह याद किए जाएंगे। करीब तीन साल तक गोरखपुर में तैनाती के दौरान उन्होंने 24 से अधिक फर्जी स्टांप निरस्त कराए थे। सूबे में सबसे ज्यादा फर्जी बैनामों को निरस्त करने का रिकार्ड उनके नाम दर्ज है। इनमें कई जटिल मामले भी शामिल हैं। करीब दो साल पहले बालापार में जहां दो भाइयों की मौत के 10 साल बाद फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनके वारिसों की जमीन हड़प ली गई थी, वहीं जेल में सजा काट रहे व्यक्ति के नाम की जमीन भी जालसाजों ने नहीं छोड़ी। पति की मौत के बाद मुंबई में गंभीर बीमारी का इलाज करा रही बड़हलगंज क्षेत्ऱ की महिला की जगह दूसरी महिला द्वारा रजिस्ट्री दफ्तर में खड़े होकर जमीन बेच देने जैसे कई मामलों को सुलझाकर एआईजी रामशंकर चर्चा में आ गए थे।
बता दें कि अगस्त 2013 में शासन ने सिविल कोर्ट के साथ ही एआईजी को भी फर्जी बैनामों के मामलों में सुनवाई का अधिकार दिया। तब से अब तक जिले में 30 फर्जी बैनामे निरस्त किए जा चुके हैं। इस मामले में गोरखपुर सूबे में पहले पायदान पर है।
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उधर, फर्जी बैनामों को निरस्त कर तमाम गरीबों की मदद के लिए एआईजी रामशंकर सिंह याद किए जाएंगे। करीब तीन साल तक गोरखपुर में तैनाती के दौरान उन्होंने 24 से अधिक फर्जी स्टांप निरस्त कराए थे। सूबे में सबसे ज्यादा फर्जी बैनामों को निरस्त करने का रिकार्ड उनके नाम दर्ज है। इनमें कई जटिल मामले भी शामिल हैं। करीब दो साल पहले बालापार में जहां दो भाइयों की मौत के 10 साल बाद फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनके वारिसों की जमीन हड़प ली गई थी, वहीं जेल में सजा काट रहे व्यक्ति के नाम की जमीन भी जालसाजों ने नहीं छोड़ी। पति की मौत के बाद मुंबई में गंभीर बीमारी का इलाज करा रही बड़हलगंज क्षेत्ऱ की महिला की जगह दूसरी महिला द्वारा रजिस्ट्री दफ्तर में खड़े होकर जमीन बेच देने जैसे कई मामलों को सुलझाकर एआईजी रामशंकर चर्चा में आ गए थे।
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बता दें कि अगस्त 2013 में शासन ने सिविल कोर्ट के साथ ही एआईजी को भी फर्जी बैनामों के मामलों में सुनवाई का अधिकार दिया। तब से अब तक जिले में 30 फर्जी बैनामे निरस्त किए जा चुके हैं। इस मामले में गोरखपुर सूबे में पहले पायदान पर है।
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