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सहपाठी मिले तो युवा हो गए मालवीयंस

Sat, 01 Oct 2016 12:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Sat, 01 Oct 2016 12:59 AM IST
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Aluminanyee meet at mmmut
एलुमिनाई मीट के दौरान डांस करती एमएमएमयूटी की छात्राएं। - फोटो : Shivharsh Dwivedi
आमतौर पर गंभीर दिखने वाला इंजीनियरिंग कॉलेज का माहौल शुक्रवार को जुदा सा था। माहौल में गर्मजोशी थी तो परिसर में खुशियां ही खुशियां। लंबे समय के बिछड़े सहपाठी एक बार फिर साथ जो थे। यह अवसर दिया था एल्युमिनाई मीट के आयोजन ने, जिसमें 1966 बैच के मालवीयंस संस्थान से जुड़ने की गोल्डेन जुबली और 1991 बैच के मालवीयंस सिल्वर जुबली मनाने के लिए मौजूद थे।
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सहपाठी मिले तो उम्र भूल कर युवा हो गए ये मालवीयंस। पहले पहचानने की कोशिश की, फिर गले लगाया और खो गए सुनहरी यादों में। देश के विभिन्न स्थानों से आए इंजीनियर्स के मिलन के दौर में सुबह से कब शाम हो गई पता ही नहीं चला। तय कार्यक्रम के मुताबिक 10:30 बजे से ही इनके आने का सिलसिला शुरू हो गया। जैसे-जैसे लोग आते गए, माहौल खुशनुमा होता रहा। सब इकट्ठा हुए तो मंच सज गया।
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मुख्य अतिथि पॉवर कार्पोरेशन के एमडी एपी मिश्रा ने संस्मरण साझा करते हुए यह बताया कि कैसे संस्थान की वजह से उन्होंने सिफर से शिखर तक का सफर तय किया। एल्युमिनाई एसोसिएशन के अध्यक्ष जेबी राय, 1991 बैच के एमसीए छात्र डीपी विद्यार्थी, आलोक दीक्षित, जीएस त्रिपाठी, डॉ. एससी जायसवाल, डॉ. पीके सिंह ने भी अपने स्वर्णिम अनुभव बयां कर माहौल को भावुक कर दिया। कुलपति प्रो. ओंकार सिंह ने यूनिवर्सिटी की उपलब्धियां गिनाईं और भविष्य की योजनाओं से अवगत कराया। 
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सिल्वर जुबली एल्युमिनाई बोले

बदला-बदला सा नजर आया संस्थान
25 साल बाद संस्थान में वापसी सुखदायी रही। परिसर का माहौल इतना बदल चुका है कि एकबारगी मुझे लगा कि मैं यहां का छात्र नहीं रहा। संस्थान की तरक्की देख काफी खुशी हुई। - रामलखन सचान, असिस्टेंट इंजीनियर, उत्तर रेलवे लखनऊ 

फिर लौट आया छात्र जीवन 
लंबे समय बाद एक बार फिर हॉस्टल में रात गुजारने का अवसर मिला। हॉस्टल के गद्दे में फाइव स्टार होटल से भी ज्यादा आनंद और सुख था। छात्र जीवन के लौटने का अहसास हुआ। 
- मनोज श्रीवास्तव, जीएम प्रिंटेल इंफ्रा, लखनऊ

हम तो फ्लैशबैक में चले गए
संस्थान में बहुत कुछ बदल गया है लेकिन खुशी है कि यहां की हरियाली पूरी तरह से बरकरार है। परिसर की हरियाली के बीच गुजारे दिन को याद करते हुए फ्लैशबैक में चला गया हूं।
- इंद्रमोहन करासी, डिप्टी जनरल मैनेजर, हाइड्रो पॉवर कार्पोरेशन

गोल्डेन जुबली एल्युमिनाई बोले

संस्थान ने सिखाया जीने का सलीका
मेरे यहां दाखिले के समय कक्षाएं पॉलिटेक्निक में चलती थीं। समय गुजरा और अब यह संस्थान एक भव्य स्वरूप ले चुका है। मुझे यह कहने में गुरेज नहीं कि यहां जीने का सलीका सीखा। 
- रामधनी सिंह, रिटायर्ड मुख्य अभियंता, सिंचाई विभाग

इंजीनियर बनना है या दुकानदार
यहां आने पर वह दृश्य याद आ गया जब एक साथी कक्षा में पायजामा पहनकर चले आए। तब प्रोफेसर ने उन्हें यह कहकर बाहर कर दिया कि इंजीनियर बनने आए हो या दुकान चलाने।
- हीरा लालगुप्ता, रिटायर्ड एक्जीक्यूटिव इंजीनियर, पावर कॉर्पोरेशन 

बेटे को भी यहीं पढ़ाया
इंजीनियर कॉलेज की शुरुआत में मैंने यहां पढ़ाई की थी, जिसकी बदौलत मैं अपने जीवन में कुछ कर पाया। यहां के अनुशासन से प्रभावित होकर मैंने अपने बेटे को भी इसी संस्थान में पढ़ाया। 

- सुशील कुमार अग्रवाल, रिटायर्ड अधीक्षण अभियंता, रेस्पो

छात्रों ने दौड़ाए रोबोट, गीतों पर झूमे भी

एल्युमिनाई मीट में आयोजित टेक फेस्ट टेकसीजन में रोबोटिक्स प्रतियोगिता ने सभी को प्रभावित किया। इसमें छात्रों ने रोबोट दौड़ाए। इस प्रतियोगिता में 110 टीमों के 330 छात्रों ने प्रतिभाग किया। इसके अलावा छात्रों ने पीपीटी प्रेजेंटेशन के जरिए सामाजिक समस्याओं को उपस्थित जनसमूह के सामने रखा। इसमें महिला सशक्तिकरण, घरेलू हिंसा और बाल अपराध जैसी बुराइयों पर ध्यान खींचा गया। इस दौरान ‘मंथन क्विज’ का आयोजन भी किया गया। देर शाम सांस्कृतिक आयोजन हुए। इसमें छात्रों ने ग्रुप सांग व नृत्य और सोलो सांग व नृत्य में अपनी प्रतिभा प्रदर्शित की। 
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