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अब मंदिर में सुनवाई के लिए नहीं जुटेगा सरकारी अमला
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sun, 28 May 2017 01:31 AM IST
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गोरखनाथ मंदिर।
- फोटो : Amar Ujala
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योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद गोरखनाथ मंदिर में बढ़े फरियादियों को सुनने-समझने के लिए सरकारी अधिकारी-कर्मचारी की मौजूदगी वाली व्यवस्था पर रोक लगा दी गई है। नई व्यवस्था के तहत फरियादियों की अर्जियां मंदिर में जमाकर संबंधित विभागों को कार्रवाई के लिए भेजी जाएंगी। हालांकि, पुरानी व्यवस्था खत्म करने की वजह स्पष्ट नहीं की गई है।
महंत आदित्यनाथ के सीएम की कुर्सी संभालने के बाद मंदिर में फरियादियों की भीड़ बढ़ने पर मंदिर परिसर में हिंदू सेवाश्रम के भवन को जनसुनवाई केंद्र जैसी शक्ल दे दी गई थी। इसमें आईजी, डीआईजी, एसएसपी, कमिश्नर, डीएम, विकास भवन, नगर निगम, बिजली विभाग की अलग-अलग टेबल लगाई गई थीं। प्रतिदिन इन पर संबंधित अफसर का प्रतिनिधि मौजूद रहता था। मंदिर में समस्या लेकर आने वालों को उनकी शिकायत या प्रार्थना की प्रकृति के हिसाब से संबंधित टेबल के कर्मचारी को संदर्भित कर दिया जाता था। महिला फरियादियों की ज्यादा संख्या देखते हुए एक महिला सीओ की नियमित मौजूदगी की भी व्यवस्था की गई थी।
शनिवार को इस व्यवस्था को रोकते हुए मंदिर आने वालों की अर्जियां जमा की गईं। बताया गया कि मंदिर की प्रबंधकीय व्यवस्था देखने वाली टीम शिकायत की प्रकृति के मुताबिक संबंधित अफसर या दफ्तर तक शिकायत पहुंचाएगी। वहां से समयबद्ध निस्तारण या जानकारी फरियादी को दी जाएगी। मंदिर प्रबंधकीय टीम के सदस्य द्वारिका तिवारी ने शनिवार से नई व्यवस्था पर अमल करने की स्वीकारोक्ति की लेकिन ऐसा करने की वजह स्पष्ट नहीं की। कहा कि प्रशासन की तरफ से तय कर्मचारी मंदिर आकर अर्जियां ले जाएगा और संबंधित विभाग उन पर कार्रवाई करेंगे।
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बता दें कि कुछ दिन पहले सपा नेताओं ने मंदिर में सरकारी अमला जुटाने पर सवाल खड़ा करते हुए डीएम को शिकायती पत्र दिया था। कहा था कि मंदिर एक धार्मिक स्थल है, वहां सरकारी कार्यालय के संचालन जैसी छूट कैसे है।
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महंत आदित्यनाथ के सीएम की कुर्सी संभालने के बाद मंदिर में फरियादियों की भीड़ बढ़ने पर मंदिर परिसर में हिंदू सेवाश्रम के भवन को जनसुनवाई केंद्र जैसी शक्ल दे दी गई थी। इसमें आईजी, डीआईजी, एसएसपी, कमिश्नर, डीएम, विकास भवन, नगर निगम, बिजली विभाग की अलग-अलग टेबल लगाई गई थीं। प्रतिदिन इन पर संबंधित अफसर का प्रतिनिधि मौजूद रहता था। मंदिर में समस्या लेकर आने वालों को उनकी शिकायत या प्रार्थना की प्रकृति के हिसाब से संबंधित टेबल के कर्मचारी को संदर्भित कर दिया जाता था। महिला फरियादियों की ज्यादा संख्या देखते हुए एक महिला सीओ की नियमित मौजूदगी की भी व्यवस्था की गई थी।
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शनिवार को इस व्यवस्था को रोकते हुए मंदिर आने वालों की अर्जियां जमा की गईं। बताया गया कि मंदिर की प्रबंधकीय व्यवस्था देखने वाली टीम शिकायत की प्रकृति के मुताबिक संबंधित अफसर या दफ्तर तक शिकायत पहुंचाएगी। वहां से समयबद्ध निस्तारण या जानकारी फरियादी को दी जाएगी। मंदिर प्रबंधकीय टीम के सदस्य द्वारिका तिवारी ने शनिवार से नई व्यवस्था पर अमल करने की स्वीकारोक्ति की लेकिन ऐसा करने की वजह स्पष्ट नहीं की। कहा कि प्रशासन की तरफ से तय कर्मचारी मंदिर आकर अर्जियां ले जाएगा और संबंधित विभाग उन पर कार्रवाई करेंगे।
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बता दें कि कुछ दिन पहले सपा नेताओं ने मंदिर में सरकारी अमला जुटाने पर सवाल खड़ा करते हुए डीएम को शिकायती पत्र दिया था। कहा था कि मंदिर एक धार्मिक स्थल है, वहां सरकारी कार्यालय के संचालन जैसी छूट कैसे है।