दो से शुरू होगी अवैध बूचड़खानों पर कार्रवाई
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खाद्य सुरक्षा विभाग के अभिहीत अधिकारी अजीत कुमार के मुताबिक जिले के सभी बूचड़खाने और मीट की दुकानें अवैध हैं। किसी ने भी विभाग से लाइसेंस नहीं लिया है। उन्होंने बताया कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत बूचड़खानों और मीट की दुकानों के संचालित होने के लिए कई शर्तें बनाई गई हैं। वर्तमान में कोई इसे पूरा नहीं करता। लाइसेंस लेने के साथ ही इन बूचड़खानों, मीट की दुकानों को चलाने वालों को कई संसाधन जुटाने होंगे।
बूचड़खानों में पशुवध के बाद निकलने वाले अपशिष्ट के प्रबंधन की माकूल व्यवस्था करनी होगी तो वहीं हर बूचड़खाने में वेटनरी डॉक्टर का रहना भी जरूरी है। ये वेटनरी डॉक्टर पशुवध के पहले पशु का स्वास्थ्य परीक्षण करेंगे। वध के बाद भी वह मीट की जांच करेंगे और फिर संबंधित पशु के खाने योग्य होने का सर्टिफिकेट जारी करने के साथ ही मुहर भी लगाएंगे। इसी तरह किसी भी मीट की दुकान पर पशु का वध नहीं किया जा सकेगा। मुहर लगे पशु की ही मीट की बिक्री हो सकेगी। उन्हें भी अपशिष्ट प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम करने होंगे।
लाइसेंस के लिए सीएम से लगाई गुहार
पुराने गोरखपुर के जैनद अहमद गुरुवार की रात अपने कई साथियों के साथ गोरखनाथ मंदिर पहुंचे। उनके साथ आए रहमतनगर के मोहम्मद आरिफ, जाफरा बाजार के शकील अहमद और गुलशन अली ने मंदिर प्रबंधन का काम देख रहे द्वारिका तिवारी को पत्रक सौंपकर मीट की दुकानों के लिए लाइसेंस दिलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि कुरैशी बिरादरी के लगभग पांच हजार लोग बूचड़खाना बंद होने से आर्थिक संकट झेल रहे हैं। जिनके पास मीट की दुकानों का लाइसेंस था, उनका रिन्यूवल नहीं हो पाया। हम चाहते हैं कि सीएम योगी आदित्यनाथ नगर निगम के अधिकारियों को जल्द से जल्द लाइसेंस बनवाने का निर्देश दें। द्वारिका तिवारी ने उनसे कहा आप इत्मीनान रखिए, आपकी फरियाद सीएम तक पहुंचा दी जाएगी।