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आरटीओ परिसर से ध्वस्त होगा बिचौलियों का नेटवर्क
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Wed, 19 Apr 2017 01:16 AM IST
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आरटीओ दफ्तर में एडिशनल ट्रांसपोर्ट कमिश्नर से मुलाकात करते अधिवक्ता।
- फोटो : Amar Ujala
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एडिशनल ट्रांसपोर्ट कमिश्नर गंगाफल ने मंगलवार को आरटीओ कार्यालय का जायजा लिया। इस दौरान अधिकारियों को परिसर से बिचौलियों के नेटवर्क को ध्वस्त करने और जनता की सुविधाओं को विशेष तरजीह देने के सख्त निर्देश दिए। करीब दो घंटे तक अधिकारियों से ओवरलोडिंग, डग्गामार वाहनों और सफाई को लेकर अब तक उठाए गए कदमों की समीक्षा की।
उन्होंने ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने के संबंध में विशेष पारदर्शिता लाने का निर्देश देते हुए कहा कि ड्राइविंग टेस्ट और अन्य सभी प्रक्रियाएं पूरी किए बगैर किसी भी दशा में लाइसेंस नहीं जारी होने चाहिए। साथ ही जनता को लाइसेंस बनवाने के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए ऑनलाइन आवेदन को तरजीह देने की बात कही। उन्होंने फिटनेस व सड़क सुरक्षा पर भी जोर दिया। कहा कि हेल्मेट और सीट बेल्ट न लगाने वालों पर भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। बैठक करने के बाद वह एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने लुंबिनी रवाना हो गए।
अधिवक्ताओं ने बताई समस्या
आरटीओ परिसर में प्रशासन द्वारा चलाए गए जेसीबी से नाराज अधिवक्ताओं ने मंगलवार को एडिशनल ट्रांसपोर्ट कमिश्नर से मुलाकात कर समस्या रखी। उन्होंने कहा कि मोटर अधिनियम के तहत उन्हें परिसर में बैठने का अधिकार मिला है, मगर इसके बाद भी उन्हें इससे दूर किया जा रहा है। इस पर कमिश्नर ने मोटर अधिनियम के तहत ऐसे किसी प्रावधान के न होने की बात कही, पर जब अधिवक्ताओं ने तर्क रखना शुरू किया तो उनके दावे पर विचार करने की बात कही।
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उन्होंने ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने के संबंध में विशेष पारदर्शिता लाने का निर्देश देते हुए कहा कि ड्राइविंग टेस्ट और अन्य सभी प्रक्रियाएं पूरी किए बगैर किसी भी दशा में लाइसेंस नहीं जारी होने चाहिए। साथ ही जनता को लाइसेंस बनवाने के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए ऑनलाइन आवेदन को तरजीह देने की बात कही। उन्होंने फिटनेस व सड़क सुरक्षा पर भी जोर दिया। कहा कि हेल्मेट और सीट बेल्ट न लगाने वालों पर भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। बैठक करने के बाद वह एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने लुंबिनी रवाना हो गए।
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अधिवक्ताओं ने बताई समस्या
आरटीओ परिसर में प्रशासन द्वारा चलाए गए जेसीबी से नाराज अधिवक्ताओं ने मंगलवार को एडिशनल ट्रांसपोर्ट कमिश्नर से मुलाकात कर समस्या रखी। उन्होंने कहा कि मोटर अधिनियम के तहत उन्हें परिसर में बैठने का अधिकार मिला है, मगर इसके बाद भी उन्हें इससे दूर किया जा रहा है। इस पर कमिश्नर ने मोटर अधिनियम के तहत ऐसे किसी प्रावधान के न होने की बात कही, पर जब अधिवक्ताओं ने तर्क रखना शुरू किया तो उनके दावे पर विचार करने की बात कही।
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