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घोटाले का अंदेशा, विभाग नहीं दे रहा सूचना
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Tue, 05 Jul 2016 07:41 PM IST
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- फोटो : demo pic
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एक व्यक्ति पिछले लंबे अर्से से समाज कल्याण विभाग से सूचना अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांग रहा है, मगर विभाग उसे देने को राजी नहीं है। आरोप है कि घोटाला करोड़ों में है। इसलिए विभाग जानकारी देने में आनाकानी कर रहा है। दूसरी तरफ विभागीय अधिकारी सूचना नहीं देने पर अपीलीय अधिकारी के यहां अपील करने की नसीहत दे रहे हैं।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक दरअसल अनुसूचित जाति के खेतों में सिंचाई के लिए समाज कल्याण विभाग निशुल्क बोरिंग कराता है। एक बोरिंग पर करीब दस हजार हजार रुपये का खर्च आता है। यह धनराशि शासन, विभाग को देता है। विभाग में यह योजना पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से चल रही है। इस योजना के बारे में बहुत कम ही लोगों को जानकारी है। खेतों में बोरिंग नहीं की जा रही है। फर्जी नामों पर भुगतान किया जा रहा है। पिछले पांच वर्षों में करीब करोड़ों रुपये की बोरिंग कागज में कर दी गई है।
मामला बेहद गंभीर होने पर घोष कंपनी, रेती रोड निवासी अहमद मूसा ने फरवरी 2016 में जिला समाज कल्याण अधिकारी से सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत सूचना मांगी, कि पिछले पांच वर्षों 2010-11, 2011-12, 2012-13, 2013-14 और 2014-15 में निशुल्क बोरिंग मद में जिले में कुल कितनी बोरिंग कराई गई। इसकी जानकारी विकास खंड के ग्रामवार नाम, पता और मोबाइल नंबर सहित प्रत्येक वर्ष की अलग-अलग उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए निर्धारित शुल्क भी विभाग में जमा कर दिया। बावजूद इसके छह महीने का समय होने जा रहा है। अभी तक विभाग ने जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई है।
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'मौके पर किसी के खेत में कोई बोरिंग नहीं की जा रही है। केवल कागज में फर्जी नाम व पता दर्शा करके सरकारी धन का गबन किया जा रहा है। घोटाला करोड़ों में है। इसलिए विभाग जानकारी देने में आनाकानी कर रहा है। '
- अहमद मूसा, निवासी घोष कंपनी, रेती रोड, गोरखपुर
'अगर मैं जानकारी नहीं दे रहा हूं तो वह हमसे ऊपर अपीलीय अधिकारी के यहां अपील करें। सूचना का अधिकार अधिनियम हर किसी को सूचना देने के लिए नहीं बना है। उक्त व्यक्ति सूचना मांगकर बेवजह परेशान करता है और विभाग के काम में बाधा पहुंचाता है।'
- सुनील कुमार सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी, गोरखपुर
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विभागीय सूत्रों के मुताबिक दरअसल अनुसूचित जाति के खेतों में सिंचाई के लिए समाज कल्याण विभाग निशुल्क बोरिंग कराता है। एक बोरिंग पर करीब दस हजार हजार रुपये का खर्च आता है। यह धनराशि शासन, विभाग को देता है। विभाग में यह योजना पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से चल रही है। इस योजना के बारे में बहुत कम ही लोगों को जानकारी है। खेतों में बोरिंग नहीं की जा रही है। फर्जी नामों पर भुगतान किया जा रहा है। पिछले पांच वर्षों में करीब करोड़ों रुपये की बोरिंग कागज में कर दी गई है।
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मामला बेहद गंभीर होने पर घोष कंपनी, रेती रोड निवासी अहमद मूसा ने फरवरी 2016 में जिला समाज कल्याण अधिकारी से सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत सूचना मांगी, कि पिछले पांच वर्षों 2010-11, 2011-12, 2012-13, 2013-14 और 2014-15 में निशुल्क बोरिंग मद में जिले में कुल कितनी बोरिंग कराई गई। इसकी जानकारी विकास खंड के ग्रामवार नाम, पता और मोबाइल नंबर सहित प्रत्येक वर्ष की अलग-अलग उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए निर्धारित शुल्क भी विभाग में जमा कर दिया। बावजूद इसके छह महीने का समय होने जा रहा है। अभी तक विभाग ने जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई है।
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'मौके पर किसी के खेत में कोई बोरिंग नहीं की जा रही है। केवल कागज में फर्जी नाम व पता दर्शा करके सरकारी धन का गबन किया जा रहा है। घोटाला करोड़ों में है। इसलिए विभाग जानकारी देने में आनाकानी कर रहा है। '
- अहमद मूसा, निवासी घोष कंपनी, रेती रोड, गोरखपुर
'अगर मैं जानकारी नहीं दे रहा हूं तो वह हमसे ऊपर अपीलीय अधिकारी के यहां अपील करें। सूचना का अधिकार अधिनियम हर किसी को सूचना देने के लिए नहीं बना है। उक्त व्यक्ति सूचना मांगकर बेवजह परेशान करता है और विभाग के काम में बाधा पहुंचाता है।'
- सुनील कुमार सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी, गोरखपुर