{"_id":"67-79982","slug":"Gorakhpur-79982-67","type":"story","status":"publish","title_hn":"25 करोड़ की परियोजनाओं को टीएसी की स्वीकृति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
25 करोड़ की परियोजनाओं को टीएसी की स्वीकृति
Gorakhpur
Updated Mon, 13 Jan 2014 05:44 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोरखपुर। संतकबीरनगर जिले के धनघटा तहसील में मदरहा-बेहराडाड़ी तटबंध को घाघरा नदी की बाढ़ से बचाने के लिए लगभग 25 करोड़ की परियोजना को तकनीकी सलाहकार समिति (टीएसी) ने अपनी स्वीकृति दे दी है। स्थायी संचालन समिति की मुहर लगने के बाद अगली प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
सिंचाई विभाग के तकनीकी सलाहकार समिति की 180वीं बैठक दिसंबर 2013 के अंतिम सप्ताह में लखनऊ में हुई थी। इसमें संतकबीरनगर जिले के धनघटा तहसील में घाघरा नदी के बाएं तट पर मदरहा-बेहरा डाड़ी तटबंध के किलो मीटर 10.980 से 12.380 के बीच स्लोप पिचिंग, लाचिंग, अपरन का कार्य कराया जाना है। इसके अतिरिक्त घाघरा नदी ने बाढ़ के दौरान जो कटान किया था उसको भी बोल्डर पिचिंग से भरा जाना है। सिंचाई विभाग की तरफ से तीन परियोजनाएं बनाई गई थी। विभाग ने तीनों को मिलाकर एक परियोजना बना दिया। इन परियोजनाओं पर तकनीकी सलाहकार समिति ने विचार-विमर्श कर उस पर अपनी मुहर लगा दी है।
अब इस परियोजना को स्थायी सलाहकार समिति के समक्ष रखा जाएगा। इस समिति के अध्यक्ष सिंचाई मंत्री होते हैं। उनकी मुहर लगने के बाद धन अवमुक्त हो जाएगा। तब परियोजना की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। फिर टेंडर आदि की औपचारिकताएं पूरी कर निर्माण कार्य कराया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
सिंचाई विभाग के तकनीकी सलाहकार समिति की 180वीं बैठक दिसंबर 2013 के अंतिम सप्ताह में लखनऊ में हुई थी। इसमें संतकबीरनगर जिले के धनघटा तहसील में घाघरा नदी के बाएं तट पर मदरहा-बेहरा डाड़ी तटबंध के किलो मीटर 10.980 से 12.380 के बीच स्लोप पिचिंग, लाचिंग, अपरन का कार्य कराया जाना है। इसके अतिरिक्त घाघरा नदी ने बाढ़ के दौरान जो कटान किया था उसको भी बोल्डर पिचिंग से भरा जाना है। सिंचाई विभाग की तरफ से तीन परियोजनाएं बनाई गई थी। विभाग ने तीनों को मिलाकर एक परियोजना बना दिया। इन परियोजनाओं पर तकनीकी सलाहकार समिति ने विचार-विमर्श कर उस पर अपनी मुहर लगा दी है।
विज्ञापन
अब इस परियोजना को स्थायी सलाहकार समिति के समक्ष रखा जाएगा। इस समिति के अध्यक्ष सिंचाई मंत्री होते हैं। उनकी मुहर लगने के बाद धन अवमुक्त हो जाएगा। तब परियोजना की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। फिर टेंडर आदि की औपचारिकताएं पूरी कर निर्माण कार्य कराया जाएगा।
विज्ञापन