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भारत में गो वंश की महत्ता अनादि काल से : गोपाल
Gorakhpur
Updated Sat, 21 Sep 2013 05:36 AM IST
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गोरखपुर। सच्चा आश्रम अरैल के स्वामी गोपाल महराज ने कहा कि सरलता एवं उपयोगिता के कारण गो वंश की महत्ता प्राय: सभी देशों में विद्यमान है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में जननी, जन्मभूमि के समान लोक वंद्य माता के रूप गौ और गो वंश की महत्ता अनादि काल से है। गाय, गीता और गंगा भारतीय संस्कृति का प्रतीक है।
गोपाल महराज शुक्रवार को गोरखनाथ मंदिर में ‘गोर रक्षा राष्ट्र रक्षा का अभियान है’ विषय पर आयोजित गोष्ठी में विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में कहा गया है कि गौ रुद्रो की माता हैं। गाय हिंदू-मुस्लिम का भेद नहीं करती यह सबको एक समान दूध देती है। इसलिए देश की संसद संपूर्ण गो वंश की हत्या पर प्रतिबंध लगाए। भारत में गो वंश का अस्तित्व खतरे में है।
पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि संपूर्ण गो हत्या पर प्रतिबंध राज्यों की इच्छा पर नहीं छोड़ा जा सकता है। देश की संसद सार्वदेशिक कानून इसके लिए बनाए। गो हत्या पर प्रतिबंध हर हाल में लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से गो वंश की हत्या को रोकने के लिए संतों ने कई बार अभियान चलाया। गांधी ने कहा कि था गो रक्षा का प्रश्न उनके लिए स्वराज से भी अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि गाय नष्ट हो गई तो भारतीय संस्कृति नष्ट हो जाएगी। इस लिए राम-कृष्ण के देश में गो हत्या हमारे लिए शर्म की बात है।
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योगी आदित्यनाथ ने कहा कि धर्म रक्षा, स्वास्थ्य रक्षा, आर्थिक लाभ और पर्यावरण की दृष्टि से गो तथा गो वंश का संरक्षण एवं संवर्धन आवश्यक है। वैदिक ग्रंथों से लेकर पौराणिक ग्रंथों में गाय की महिमा का वर्णन किया गया है। उन्होंने कहा कि गो मूत्र, गोबर, घृत के बिना पंचामित्र की कल्पना नहीं की जा सकती। कार्यक्रम मेें महंत कौशल किशोर दास, प्रह्लाद दास, स्वामी विद्या चैतन्य, महंत गंगा दास, वरुन बैरागी, ब्रह्मदेव यादव, विजय कुमार सिंह, पूनम श्रीवास्तव, माधुरी मिश्रा, हरिवंश ओझा, मोती लाल योगेंद्र राय आदि लोगों ने विचार व्यक्त किए।
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गोपाल महराज शुक्रवार को गोरखनाथ मंदिर में ‘गोर रक्षा राष्ट्र रक्षा का अभियान है’ विषय पर आयोजित गोष्ठी में विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में कहा गया है कि गौ रुद्रो की माता हैं। गाय हिंदू-मुस्लिम का भेद नहीं करती यह सबको एक समान दूध देती है। इसलिए देश की संसद संपूर्ण गो वंश की हत्या पर प्रतिबंध लगाए। भारत में गो वंश का अस्तित्व खतरे में है।
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पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि संपूर्ण गो हत्या पर प्रतिबंध राज्यों की इच्छा पर नहीं छोड़ा जा सकता है। देश की संसद सार्वदेशिक कानून इसके लिए बनाए। गो हत्या पर प्रतिबंध हर हाल में लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से गो वंश की हत्या को रोकने के लिए संतों ने कई बार अभियान चलाया। गांधी ने कहा कि था गो रक्षा का प्रश्न उनके लिए स्वराज से भी अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि गाय नष्ट हो गई तो भारतीय संस्कृति नष्ट हो जाएगी। इस लिए राम-कृष्ण के देश में गो हत्या हमारे लिए शर्म की बात है।
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योगी आदित्यनाथ ने कहा कि धर्म रक्षा, स्वास्थ्य रक्षा, आर्थिक लाभ और पर्यावरण की दृष्टि से गो तथा गो वंश का संरक्षण एवं संवर्धन आवश्यक है। वैदिक ग्रंथों से लेकर पौराणिक ग्रंथों में गाय की महिमा का वर्णन किया गया है। उन्होंने कहा कि गो मूत्र, गोबर, घृत के बिना पंचामित्र की कल्पना नहीं की जा सकती। कार्यक्रम मेें महंत कौशल किशोर दास, प्रह्लाद दास, स्वामी विद्या चैतन्य, महंत गंगा दास, वरुन बैरागी, ब्रह्मदेव यादव, विजय कुमार सिंह, पूनम श्रीवास्तव, माधुरी मिश्रा, हरिवंश ओझा, मोती लाल योगेंद्र राय आदि लोगों ने विचार व्यक्त किए।