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कन्या भ्रूण हत्या विषयक भाषण प्रतियोगिता
Gorakhpur
Updated Fri, 15 Mar 2013 05:30 AM IST
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गोरखपुर। गोरखपुर यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों का मत है कि कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाने के लिए युवा शक्ति को जगाना होगा। ये विद्यार्थी प्रौढ़ सतत एवं प्रसार शिक्षा विभाग के जनसंख्या शिक्षा क्लब की ओर से आयोजित समाज में बढ़ती भ्रूण हत्यायें उत्तरदायी कौन विषयक भाषण प्रतियोगिता को संबोधित कर रहे थे।
विधि प्रथम सेमेस्टर के छात्र स्वतंत्र कुमार पाठक ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए युवा शक्ति को जगाना होगा। युवा ही आगे आ कर इस कुप्रथा पर अंकुश लगा सकते हैं। उन्हें धार्मिक रूढ़ियां तोड़नी होंगी। दहेज न लेने का संकल्प लेना होगा। कृष्ण कुमार शुक्ल ने कहा कि सहजीवन, एकल जीवन, अप संस्कृति, और वैज्ञानिकता के अभाव में इस तरह की प्रवृत्ति बढ़ रही है। उन्होंने पीएनडीटी एक्ट के सही अनुपालन पर जोर दिया। अजीत गुप्ता ने कहा कि इसके लिए युवाओं क ी मौन स्वीकृत को जिम्मेदार ठहराया। कहा कि हमें इसका पुरजोर विरोध करना होगा। अमित उपाध्याय ने कहा कि इसके लिए स्त्रियां ही ज्यादा जिम्मेदार हैं, क्योंकि वे अत्याचार को नियति मानती हैं। बताया कि पिछले तीन दशक में देश में एक करोड़ 20 लाख भ्रूण हत्याएं हो चुकी हैं। कहा कि दहेज लोभी लोग ही समाज को ऐसा करने पर विवश करते हैं। प्रांजल शेखर ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या में महिलाओं की भागीदारी अधिक है। उन्होंने कहा कि जब तक हम अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे तब तक कोई बड़ा परिवर्तन नहीं हो सकता। सुरभि गुप्ता ने इसके लिए डॉक्टरों को जिम्मेदार ठहराया।
इस कार्यक्रम के महिला चिकित्सक डॉ. अंजू मिश्रा का कहना था कि यह कहना गलत है कि कन्या भ्रूण हत्या के लिए डाक्टर जिम्मेदार हैं। उन्होंने कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए कठोर कानून की वकालत की। साथ ही युवाओं को जागरूक करने पर बल दिया।
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कार्यक्रम के अंत में भाषण प्रतियोगिता के विजेताओं कृष्ण कुमार शुक्ल, स्वतंत्र कुमार पाठक, सुरभि गुप्ता को क्रमश: प्रथम, द्वितीय और तृतीय घोषित करते हुए पुरस्कृत किया गया।
विधि प्रथम सेमेस्टर के छात्र स्वतंत्र कुमार पाठक ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए युवा शक्ति को जगाना होगा। युवा ही आगे आ कर इस कुप्रथा पर अंकुश लगा सकते हैं। उन्हें धार्मिक रूढ़ियां तोड़नी होंगी। दहेज न लेने का संकल्प लेना होगा। कृष्ण कुमार शुक्ल ने कहा कि सहजीवन, एकल जीवन, अप संस्कृति, और वैज्ञानिकता के अभाव में इस तरह की प्रवृत्ति बढ़ रही है। उन्होंने पीएनडीटी एक्ट के सही अनुपालन पर जोर दिया। अजीत गुप्ता ने कहा कि इसके लिए युवाओं क ी मौन स्वीकृत को जिम्मेदार ठहराया। कहा कि हमें इसका पुरजोर विरोध करना होगा। अमित उपाध्याय ने कहा कि इसके लिए स्त्रियां ही ज्यादा जिम्मेदार हैं, क्योंकि वे अत्याचार को नियति मानती हैं। बताया कि पिछले तीन दशक में देश में एक करोड़ 20 लाख भ्रूण हत्याएं हो चुकी हैं। कहा कि दहेज लोभी लोग ही समाज को ऐसा करने पर विवश करते हैं। प्रांजल शेखर ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या में महिलाओं की भागीदारी अधिक है। उन्होंने कहा कि जब तक हम अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे तब तक कोई बड़ा परिवर्तन नहीं हो सकता। सुरभि गुप्ता ने इसके लिए डॉक्टरों को जिम्मेदार ठहराया।
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इस कार्यक्रम के महिला चिकित्सक डॉ. अंजू मिश्रा का कहना था कि यह कहना गलत है कि कन्या भ्रूण हत्या के लिए डाक्टर जिम्मेदार हैं। उन्होंने कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए कठोर कानून की वकालत की। साथ ही युवाओं को जागरूक करने पर बल दिया।
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कार्यक्रम के अंत में भाषण प्रतियोगिता के विजेताओं कृष्ण कुमार शुक्ल, स्वतंत्र कुमार पाठक, सुरभि गुप्ता को क्रमश: प्रथम, द्वितीय और तृतीय घोषित करते हुए पुरस्कृत किया गया।