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खूनचुसवा को लेकर स्वास् थ्य महकमा अलर्ट
Updated Wed, 29 Aug 2018 12:50 AM IST
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बस्ती के भी ध्यानार्थ
खूनचुसवा का खौफ, स्वास्थ्य महकमा अलर्ट
बस्ती की घटना के बाद गोरखपुर में सीएमओ ने सघन चेकिंग के लिए बनाईं दो टीमें
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। पांच सौ रुपये का लालच देकर गरीब और मजदूरों का हर माह खून निकालने वाले गिरोह का बस्ती में भंडाफोड़ होने के बाद गोरखपुर का स्वास्थ्य महकमा भी सतर्क हो गया है। जिले में सघन अभियान चलाने के लिए सीएमओ ने एसीएमओ और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के साथ मंगलवार को बैठक की। इस दौरान जिले मे सघन जांच अभियान चलाए जाने के लिए एसीएमओ के नेतृत्व में दो टीमें गठित की गईं। सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि अगले सप्ताह से अभियान शुरू हो जाएगा। सभी तहसीलों से लेकर शहर में भी सघन चेकिंग की जाएगी। अभियान में पुलिस का भी सहयोग लिया जाएगा।
2008 में गोरखपुर सुर्खियों में आया था
शहर में वर्ष 2008 में खूनचुसवा गिरोह का खुलासा हुआ था। तब ‘लेटकर कमाओ बैठकर खाओ’ को स्लोगन की तरह इस्तेमाल करके गरीब और मजदूरों को बरगलाकर उनका खून निकालने वाले गिरोह पकड़ा गया था। गिरोह के झांसे में आने वाले युवकों के शरीर से हर माह खून निकाले जाने के चलते उनका शरीर पीला पड़ गया था। इनको जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। ठीक होने के बाद इन युवकों ने गिरोह की कारगुजारियां बताईं थी। तब एक निजी ब्लडबैंक का कर्मचारी इस गिरोह के अहम किरदार के रूप में सामने आया था।
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खूनचुसवा का खौफ, स्वास्थ्य महकमा अलर्ट
बस्ती की घटना के बाद गोरखपुर में सीएमओ ने सघन चेकिंग के लिए बनाईं दो टीमें
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। पांच सौ रुपये का लालच देकर गरीब और मजदूरों का हर माह खून निकालने वाले गिरोह का बस्ती में भंडाफोड़ होने के बाद गोरखपुर का स्वास्थ्य महकमा भी सतर्क हो गया है। जिले में सघन अभियान चलाने के लिए सीएमओ ने एसीएमओ और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के साथ मंगलवार को बैठक की। इस दौरान जिले मे सघन जांच अभियान चलाए जाने के लिए एसीएमओ के नेतृत्व में दो टीमें गठित की गईं। सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि अगले सप्ताह से अभियान शुरू हो जाएगा। सभी तहसीलों से लेकर शहर में भी सघन चेकिंग की जाएगी। अभियान में पुलिस का भी सहयोग लिया जाएगा।
2008 में गोरखपुर सुर्खियों में आया था
शहर में वर्ष 2008 में खूनचुसवा गिरोह का खुलासा हुआ था। तब ‘लेटकर कमाओ बैठकर खाओ’ को स्लोगन की तरह इस्तेमाल करके गरीब और मजदूरों को बरगलाकर उनका खून निकालने वाले गिरोह पकड़ा गया था। गिरोह के झांसे में आने वाले युवकों के शरीर से हर माह खून निकाले जाने के चलते उनका शरीर पीला पड़ गया था। इनको जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। ठीक होने के बाद इन युवकों ने गिरोह की कारगुजारियां बताईं थी। तब एक निजी ब्लडबैंक का कर्मचारी इस गिरोह के अहम किरदार के रूप में सामने आया था।
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