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नारा-ए-तकबीर के बीच हिंदुस्तान जिंदाबाद की गूंज
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sun, 03 Dec 2017 12:59 AM IST
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ईद मिलादुन्नबी पर जुलूस निकाला गया।
- फोटो : Amar Ujala
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मुस्तफा जाने रहमत पर लाखों सलाम से गूंजती फजा के बीच इस्लाम के परचम के साथ तिरंगा भी खूब लहराया गया। अमन और भाईचारे की मिसाल पेश करने वाले ईद मिलादुन्नबी पर गांव देहात से लेकर शहर में ऐसे कई नजारे आकर्षण का केंद्र बने। पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की यौमे पैदाइश शनिवार को इसी तरह के माहौल में धूमधाम से मनाई गई। घरों, मस्जिदों, मदरसों व दरगाहों में जश्न-ए-आमदे रसूल की महफिलें सजीं। कुरआन की तिलावत हुई। दरूदों सलाम का नजराना पेश किया गया और फातिहा हुई। सुबह मस्जिदों पर परचम कुशाई की रस्म अदा की गई। सुबह से रात तक बड़ी संख्या में जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाली गई।
जगह-जगह इन जुलूसों का स्वागत हुआ। मुल्क के अमन-चैन और तरक्की की दुआएं की गईं। हुजूर की आमद मरहबा, या नबी सलाम अलैका, या हबीब सलाम अलैका, मुस्तफा जाने रहमत पर लाखों सलाम आदि नबी-ए-पाक की बारगाह में पेश किए गए। नारा-ए-तकबीर अल्लाहु अकबर, नारे रिसालत या रसूलल्लाह, हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे भी खूब लगे। जुलूसों में दीनी और दुनियावी शिक्षा देने वाली कई झांकियां भी सजाई गईं। खूनीपुर में सामूहिक परचम कुशाई भी हुई। मोहल्ला गाजीरौजा स्थित गाजी मस्जिद में इसके बाद फज्र की नमाज के बाद परचम कुशाई मुफ्ती अख्तर हुसैन व पेश इमाम हाफिज रेयाज अहमद ने की। इसके बाद मिलाद हुआ। सलातो-सलाम पढ़कर दुआ की गई, फिर जुलूस निकाला गया। जुलूस में मोहम्मद आजम, हाजी उबैद खान, शहबाज, शिराज आदि शामिल रहे। छोटे काजीपुर गौसिया जामा मस्जिद में परचम कुशाई की रस्म इमाम मौलाना मोहम्मद अहमद ने अदा की। नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर में मौलाना असलम रज़वी, मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी, अलाउद्दीन ने परचम फहराया।
मोहल्ला सौदागार सुन्नी मस्जिद में हाफिज व कारी मो. मोहसिन बरकाती, खुर्शीद, जफर, सगीर ने परचम कुशाई की। रहमतनगर जामा मस्जिद में मौलाना अली अहमद, सब्जपोश मस्जिद जाफ रा बाजार में हाफिज रहमत अली निजामी, खादिम हुसैन मस्जिद तिवारीपुर में हाफिज व कारी अफजल बरकाती, मस्जिद सुभानिया में मौलाना जहांगीर अजीजी, मक्का मस्जिद मेवातीपुर में कारी अंसारुल हक ने परचम कुशाई की। अन्य मस्जिदों में भी यह रस्म अदा की गई। मियां बाजार से वारिस कमेटी ने जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला। अगुवाई नूर मोहम्मद दानिश ने किया। रहमतनगर से मगरिब की नमाज के बाद जुलूस निकाला गया। तहरीक दावत-ए-इस्लामी हिंद की जानिब से पाकीजा होटल खूनीपुर से जुलूस निकाला गया। इसमें घोड़े, बग्घी, बोर्ड, इस्लामी परचम व रस्म चौकी आकर्षण का केंद्र रही। जाफरा बाजार में समाजसेवी आदिल अमीन ने जुलूस का स्वागत किया। जुलूस का मुख्य केंद्र नखास चौराहा रहा। जुलूस के मार्गों पर जगह-जगह स्वागत द्वार बने थे।
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बच्चों ने निकाला जुलूस
मदरसा दारूल उलूम हुसैनिया दीवान बाजार की ओर से जुलूस-ए-मोहम्मदी सैयद तहव्वर हुसैन के नेतृत्व में निकाला गया। हाथों में झंडे लिए बच्चे नात-ए-पाक गाते व इस्लामी नारे लगाते हुए चल रहे थे। जुलूस के बाद मिलाद की महफिल हुई। मदरसा दारूल उलूम अहले सुन्नत मजहरूल उलूम घोसीपुरवा में सुबह परचम कुशाई हुई व जुलूस कारी रईसुल कादरी कारी तनवीर आलम, मौलाना अब्दुर्रब की देखरेख में निकला। मदरसा अरबिया शम्सुल उलूम अहले सुन्नत चपहा मिर्जापुर से भी जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया। असुरन पोखरा स्थित मदरसा अहले सुन्नत फैजुल उलूम से भी जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया। मेडिकल कॉलेज गेट से भी जुलूस-ए-मोहम्मदी निकला। नार्मल स्थित दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद से फज्र की नमाज के बाद परचम कुशाई की रस्म अदा की गई। दोपहर की नमाज के बाद जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया।
‘अनेकता में एकता, हिंद की विशेषता’
पीपीगंज तुर्कवलिया में लोगों ने एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर ईद मिलादुन्नबी की मुबारकबाद दी। इसके बाद जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया। इसमें इमाम मौलाना मो. सईद, तालुकदार, महंत रामदास, शमसुद्दोहा, अहमद रज़ा, हसन रज़ा, डॉ. आबिद अली, डॉ. इम्तियाज अहमद, समसुल हक, सत्यपाल यादव की मौजूदगी में अनेकता में एकता, हिंद की विशेषता का नारा भी खूब गूंजा।
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जगह-जगह इन जुलूसों का स्वागत हुआ। मुल्क के अमन-चैन और तरक्की की दुआएं की गईं। हुजूर की आमद मरहबा, या नबी सलाम अलैका, या हबीब सलाम अलैका, मुस्तफा जाने रहमत पर लाखों सलाम आदि नबी-ए-पाक की बारगाह में पेश किए गए। नारा-ए-तकबीर अल्लाहु अकबर, नारे रिसालत या रसूलल्लाह, हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे भी खूब लगे। जुलूसों में दीनी और दुनियावी शिक्षा देने वाली कई झांकियां भी सजाई गईं। खूनीपुर में सामूहिक परचम कुशाई भी हुई। मोहल्ला गाजीरौजा स्थित गाजी मस्जिद में इसके बाद फज्र की नमाज के बाद परचम कुशाई मुफ्ती अख्तर हुसैन व पेश इमाम हाफिज रेयाज अहमद ने की। इसके बाद मिलाद हुआ। सलातो-सलाम पढ़कर दुआ की गई, फिर जुलूस निकाला गया। जुलूस में मोहम्मद आजम, हाजी उबैद खान, शहबाज, शिराज आदि शामिल रहे। छोटे काजीपुर गौसिया जामा मस्जिद में परचम कुशाई की रस्म इमाम मौलाना मोहम्मद अहमद ने अदा की। नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर में मौलाना असलम रज़वी, मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी, अलाउद्दीन ने परचम फहराया।
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मोहल्ला सौदागार सुन्नी मस्जिद में हाफिज व कारी मो. मोहसिन बरकाती, खुर्शीद, जफर, सगीर ने परचम कुशाई की। रहमतनगर जामा मस्जिद में मौलाना अली अहमद, सब्जपोश मस्जिद जाफ रा बाजार में हाफिज रहमत अली निजामी, खादिम हुसैन मस्जिद तिवारीपुर में हाफिज व कारी अफजल बरकाती, मस्जिद सुभानिया में मौलाना जहांगीर अजीजी, मक्का मस्जिद मेवातीपुर में कारी अंसारुल हक ने परचम कुशाई की। अन्य मस्जिदों में भी यह रस्म अदा की गई। मियां बाजार से वारिस कमेटी ने जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला। अगुवाई नूर मोहम्मद दानिश ने किया। रहमतनगर से मगरिब की नमाज के बाद जुलूस निकाला गया। तहरीक दावत-ए-इस्लामी हिंद की जानिब से पाकीजा होटल खूनीपुर से जुलूस निकाला गया। इसमें घोड़े, बग्घी, बोर्ड, इस्लामी परचम व रस्म चौकी आकर्षण का केंद्र रही। जाफरा बाजार में समाजसेवी आदिल अमीन ने जुलूस का स्वागत किया। जुलूस का मुख्य केंद्र नखास चौराहा रहा। जुलूस के मार्गों पर जगह-जगह स्वागत द्वार बने थे।
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बच्चों ने निकाला जुलूस
मदरसा दारूल उलूम हुसैनिया दीवान बाजार की ओर से जुलूस-ए-मोहम्मदी सैयद तहव्वर हुसैन के नेतृत्व में निकाला गया। हाथों में झंडे लिए बच्चे नात-ए-पाक गाते व इस्लामी नारे लगाते हुए चल रहे थे। जुलूस के बाद मिलाद की महफिल हुई। मदरसा दारूल उलूम अहले सुन्नत मजहरूल उलूम घोसीपुरवा में सुबह परचम कुशाई हुई व जुलूस कारी रईसुल कादरी कारी तनवीर आलम, मौलाना अब्दुर्रब की देखरेख में निकला। मदरसा अरबिया शम्सुल उलूम अहले सुन्नत चपहा मिर्जापुर से भी जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया। असुरन पोखरा स्थित मदरसा अहले सुन्नत फैजुल उलूम से भी जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया। मेडिकल कॉलेज गेट से भी जुलूस-ए-मोहम्मदी निकला। नार्मल स्थित दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद से फज्र की नमाज के बाद परचम कुशाई की रस्म अदा की गई। दोपहर की नमाज के बाद जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया।
‘अनेकता में एकता, हिंद की विशेषता’
पीपीगंज तुर्कवलिया में लोगों ने एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर ईद मिलादुन्नबी की मुबारकबाद दी। इसके बाद जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया। इसमें इमाम मौलाना मो. सईद, तालुकदार, महंत रामदास, शमसुद्दोहा, अहमद रज़ा, हसन रज़ा, डॉ. आबिद अली, डॉ. इम्तियाज अहमद, समसुल हक, सत्यपाल यादव की मौजूदगी में अनेकता में एकता, हिंद की विशेषता का नारा भी खूब गूंजा।