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...लेकिन संसद नहीं पहुंच सके हरिशंकर तिवारी, वीरेंद्र शाही
Tue, 02 Apr 2019 12:28 AM IST
ajay Kumar
अमर उजाला/गाोरख्ापुर
अमर उजाला/गाोरख्ापुर
Published by: ajay Kumar
Updated Tue, 02 Apr 2019 12:28 AM IST
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चुनावी हलचल
- फोटो : self
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टीपी शाही
गोरखपुर। विधायक, फिर मंत्री बनकर नाम कमाने वाले हरिशंकर तिवारी और वीरेंद्र शाही के ने गोरखपुर और महराजगंज के रास्ते संसद तक का सफर तय करने की कोशिश की लेकिन जनता का भरोसा नहीं जीत पाए। वीरेंद्र शाही सांसद बनने के लिए तीन बार मैदान में उतरे लेकिन उन्हें मतदाताओं का साथ नहीं मिला।
बात 1984 की है। महाराजगंज लोकसभा चुनाव की सरगर्मी चल रही थी। कांग्रेस ने जितेंद्र सिंह को मैदान में उतारा था। इसी बीच वीरेंद्र शाही और हरिशंकर तिवारी ने नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। शाही उस दौरान मेनका गांधी की पार्टी संजय विचार मंच से जुड़े थे। वह महराजगंज दौरे पर थे। पुलिस ने देररात छापा मारा और शाही को रासुका के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। कुछ दिनों बाद ही एक अन्य मामले में हरिशंकर तिवारी को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद भी हरिशंकर तिवारी और वीरेंद्र शाही ने कदम पीछे नहीं लिए और जेल से चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। दोनों ने नामांकन कराया। समर्थकों ने क्षेत्र में जमकर प्रचार किया।
चुनाव हुए, नतीजे आए तो कांग्रेस प्रत्याशी जितेंद्र सिंह को दोनों ही प्रत्याशियों से बड़े अंतर से जीत मिली। दूसरे स्थान पर हरिशंकर तिवारी थे। इन नेताओं का रसूख महराजगंज की जनता ने नकार दिया था। इसके बावजूद वीरेंद्र शाही ने हार नहीं मानी। उन्होंने 1989 के लोकसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में महराजगंज से दोबारा नामांकन कराया लेकिन फिर हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 1996 में गोरखपुर शहर लोकसभा क्षेत्र से भी चुनाव लड़े पर जीत नहीं सके। वहीं, हरिशंकर तिवारी चिल्लूपार को क्षेत्र बनाकर विधानसभा चुनाव लड़े और जीत मिली। वह चिल्लूपार से छह बार विधानसभा का चुनाव जीते और कई बार मंत्री बने।
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गोरखपुर। विधायक, फिर मंत्री बनकर नाम कमाने वाले हरिशंकर तिवारी और वीरेंद्र शाही के ने गोरखपुर और महराजगंज के रास्ते संसद तक का सफर तय करने की कोशिश की लेकिन जनता का भरोसा नहीं जीत पाए। वीरेंद्र शाही सांसद बनने के लिए तीन बार मैदान में उतरे लेकिन उन्हें मतदाताओं का साथ नहीं मिला।
बात 1984 की है। महाराजगंज लोकसभा चुनाव की सरगर्मी चल रही थी। कांग्रेस ने जितेंद्र सिंह को मैदान में उतारा था। इसी बीच वीरेंद्र शाही और हरिशंकर तिवारी ने नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। शाही उस दौरान मेनका गांधी की पार्टी संजय विचार मंच से जुड़े थे। वह महराजगंज दौरे पर थे। पुलिस ने देररात छापा मारा और शाही को रासुका के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। कुछ दिनों बाद ही एक अन्य मामले में हरिशंकर तिवारी को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद भी हरिशंकर तिवारी और वीरेंद्र शाही ने कदम पीछे नहीं लिए और जेल से चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। दोनों ने नामांकन कराया। समर्थकों ने क्षेत्र में जमकर प्रचार किया।
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चुनाव हुए, नतीजे आए तो कांग्रेस प्रत्याशी जितेंद्र सिंह को दोनों ही प्रत्याशियों से बड़े अंतर से जीत मिली। दूसरे स्थान पर हरिशंकर तिवारी थे। इन नेताओं का रसूख महराजगंज की जनता ने नकार दिया था। इसके बावजूद वीरेंद्र शाही ने हार नहीं मानी। उन्होंने 1989 के लोकसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में महराजगंज से दोबारा नामांकन कराया लेकिन फिर हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 1996 में गोरखपुर शहर लोकसभा क्षेत्र से भी चुनाव लड़े पर जीत नहीं सके। वहीं, हरिशंकर तिवारी चिल्लूपार को क्षेत्र बनाकर विधानसभा चुनाव लड़े और जीत मिली। वह चिल्लूपार से छह बार विधानसभा का चुनाव जीते और कई बार मंत्री बने।
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