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प्रवेश परीक्षा से भरेंगी बीए, बीएससी, बीकॉम की सीटें
Updated Wed, 11 Oct 2017 01:39 AM IST
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गोरखपुर।
गोरखपुर यूनिवर्सिटी से संबद्ध 328 राजकीय, अनुदानित और निजी डिग्री कॉलेजों की बीए, बीएससी, बीकॉम फर्स्ट ईयर की 2.50 लाख सीटें प्रवेश परीक्षा से भरी जाएंगी। इस पर यूनिवर्सिटी प्रशासन और प्राचार्य परिषद के बीच मंगलवार को सहमति बन गई। पूरा मामला प्रवेश समिति को भेजा गया है। सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो शैक्षिक सत्र 2017-18 से प्रवेश परीक्षा होगी, फिर काउंसिलिंग कराके सीटें भरी जाएंगी। यह प्रवेश परीक्षा गोरखपुर यूनिवर्सिटी कराएगी।
यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेजों का दायरा गोरखपुर, देवरिया और कुशीनगर तक फैला है। इनकी शैक्षिक, शोध की गुणवत्ता के लिए मंगलवार को यूनिवर्सिटी कैंपस में मीटिंग हुई। कुलपति प्रो. वीके सिंह, रजिस्ट्रार, फाइनेंस ऑफिसर और स्व वित्तपोषित महाविद्यालय प्राचार्य परिषद के पदाधिकारियों की मौजूदगी में सिंगल एंट्रेंस टेस्ट कराने पर सहमति बनी। कहा गया कि अब कॉलेज अपने स्तर से सीटें नहीं भर सकेंगे। परिषद के प्रवक्ता डॉ. प्रदीप राव ने बताया कि प्रवेश परीक्षा का सबसे बड़ा फायदा छात्र-छात्राओं को मिलेगा। उन्हें अलग-अलग कॉलेजों का एडमिशन फॉर्म नहीं भरना पड़ेगा। इससे खर्च कम हो जाएगा। ज्यादा भागदौड़ की झंझट नहीं रहेगी। यूनिवर्सिटी में एक फॉर्म भरना होगा। फिर प्रवेश परीक्षा होगी, जिसे क्वालीफाई करने वालों को काउंसिलिंग के बाद एडमिशन मिल जाएगा। यह व्यवस्था बीए, बीएससी और बीकॉम फर्स्ट ईयर में लागू होगी। सकारात्मक परिणाम सामने आया तो एमए, एमएससी और एमकॉम की सीटें भी प्रवेश परीक्षा, काउंसिलिंग से भरी जाएंगी। इस तरह का प्रयोग यूपी में पहली बार होगा। दूसरी यूनिवर्सिटी में कॉलेज बीए, बीएससी और बीकॉम की प्रवेश परीक्षा नहीं कराते हैं। सभी कॉलेज सीधे एडमिशन लेते हैं। यही व्यवस्था गोरखपुर यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेजों में थी।
इन पर भी सहमति
- एडमिशन की आखिरी डेट 15 अगस्त।
- कॉलेजों को 30 मई तक मिल जाएगी संबद्धता।
- निजी कॉलेजों के प्रिंसिपल, शिक्षकों की सीनियारिटी लिस्ट भी बनेगी।
- शिक्षकों का डाटाबेस और पूरी सूचना आधार कार्ड से लिंक की जाएगी।
- यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर अपलोड होगी डिग्री कॉलेजों की सारी सूचना।
- नकल विहीन परीक्षा के लिए केंद्र बदले जाएंगे।
- क्रीडा परिषद में निजी कॉलेजों की सहभागिता।
- परीक्षा खर्च से संबंधित बजट सीधे प्रिंसिपल के बैंक अकाउंट में भेजा जाएगा।
- अनुमोदित शिक्षक के इस्तीफा देने की स्थिति में अस्थायी अनुमोदन पर पढ़ा सकेंगे शिक्षक।
गोरखपुर यूनिवर्सिटी से संबद्ध 328 राजकीय, अनुदानित और निजी डिग्री कॉलेजों की बीए, बीएससी, बीकॉम फर्स्ट ईयर की 2.50 लाख सीटें प्रवेश परीक्षा से भरी जाएंगी। इस पर यूनिवर्सिटी प्रशासन और प्राचार्य परिषद के बीच मंगलवार को सहमति बन गई। पूरा मामला प्रवेश समिति को भेजा गया है। सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो शैक्षिक सत्र 2017-18 से प्रवेश परीक्षा होगी, फिर काउंसिलिंग कराके सीटें भरी जाएंगी। यह प्रवेश परीक्षा गोरखपुर यूनिवर्सिटी कराएगी।
यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेजों का दायरा गोरखपुर, देवरिया और कुशीनगर तक फैला है। इनकी शैक्षिक, शोध की गुणवत्ता के लिए मंगलवार को यूनिवर्सिटी कैंपस में मीटिंग हुई। कुलपति प्रो. वीके सिंह, रजिस्ट्रार, फाइनेंस ऑफिसर और स्व वित्तपोषित महाविद्यालय प्राचार्य परिषद के पदाधिकारियों की मौजूदगी में सिंगल एंट्रेंस टेस्ट कराने पर सहमति बनी। कहा गया कि अब कॉलेज अपने स्तर से सीटें नहीं भर सकेंगे। परिषद के प्रवक्ता डॉ. प्रदीप राव ने बताया कि प्रवेश परीक्षा का सबसे बड़ा फायदा छात्र-छात्राओं को मिलेगा। उन्हें अलग-अलग कॉलेजों का एडमिशन फॉर्म नहीं भरना पड़ेगा। इससे खर्च कम हो जाएगा। ज्यादा भागदौड़ की झंझट नहीं रहेगी। यूनिवर्सिटी में एक फॉर्म भरना होगा। फिर प्रवेश परीक्षा होगी, जिसे क्वालीफाई करने वालों को काउंसिलिंग के बाद एडमिशन मिल जाएगा। यह व्यवस्था बीए, बीएससी और बीकॉम फर्स्ट ईयर में लागू होगी। सकारात्मक परिणाम सामने आया तो एमए, एमएससी और एमकॉम की सीटें भी प्रवेश परीक्षा, काउंसिलिंग से भरी जाएंगी। इस तरह का प्रयोग यूपी में पहली बार होगा। दूसरी यूनिवर्सिटी में कॉलेज बीए, बीएससी और बीकॉम की प्रवेश परीक्षा नहीं कराते हैं। सभी कॉलेज सीधे एडमिशन लेते हैं। यही व्यवस्था गोरखपुर यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेजों में थी।
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इन पर भी सहमति
- एडमिशन की आखिरी डेट 15 अगस्त।
- कॉलेजों को 30 मई तक मिल जाएगी संबद्धता।
- निजी कॉलेजों के प्रिंसिपल, शिक्षकों की सीनियारिटी लिस्ट भी बनेगी।
- शिक्षकों का डाटाबेस और पूरी सूचना आधार कार्ड से लिंक की जाएगी।
- यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर अपलोड होगी डिग्री कॉलेजों की सारी सूचना।
- नकल विहीन परीक्षा के लिए केंद्र बदले जाएंगे।
- क्रीडा परिषद में निजी कॉलेजों की सहभागिता।
- परीक्षा खर्च से संबंधित बजट सीधे प्रिंसिपल के बैंक अकाउंट में भेजा जाएगा।
- अनुमोदित शिक्षक के इस्तीफा देने की स्थिति में अस्थायी अनुमोदन पर पढ़ा सकेंगे शिक्षक।