फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   फाइब्रॉएड के स्थायी उपचार की तकनीक समझी

फाइब्रॉएड के स्थायी उपचार की तकनीक समझी

Sun, 25 Feb 2018 08:43 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर। Updated Sun, 25 Feb 2018 08:43 PM IST
विज्ञापन
फाइब्रॉएड के स्थायी उपचार की तकनीक समझी
सर्जरी करतीं डॉ. निकिता त्रेहन। - फोटो : Amar Ujala
गोरखपुर शहर व आसपास के इलाकों में फाइब्रॉएड (रसौली) के कारण बांझपन झेल रहीं महिलाओं के लिए अच्छी खबर है। नई तकनीक से इसका स्थायी उपचार यहां भी संभव हो सकेगा। नई दिल्ली के सनराइज हॉस्पिटल की वरिष्ठ लेप्रोस्कोपी सर्जन डॉ. निकिता त्रेहन ने रविवार को स्टार हॉस्पिटल में फाइब्रॉएड पीड़ित की नई तकनीक से सर्जरी की। शहर में पहली बार इस तरह का ऑपरेशन हुआ, जिसे होटल शिवाय में बैठे स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों ने लाइव देखा। इसके साथ ही गोरखपुर ऑब्सटेट्रिक्स एवं गाइनकोलॉजी सोसाइटी की ओर से आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का समापन हुआ।
विज्ञापन


डॉ. निकिता त्रेहन ने बताया कि लेप्रोस्कोपी या हिस्टोरोस्कोपी से किसी भी प्रकार के फाइब्रॉएड को आसानी से निकाला जा सकता है। इससे गर्भाशय के बाकी हिस्से को पूरी तरह से बचाया जा सकता है। एलयूएएल (लेप्रोस्कोपिक यूटेरिन आर्टरी लिगेशन) नामक इस नई तकनीक को हमने डिजाइन किया है, जो न केवल फाइब्रॉएड को दोबारा होने से रोकती है बल्कि सर्जरी में रक्त की क्षति भी कम करती है। ऑपरेशन के बाद दर्द भी कम होता है। इस सर्जरी के लिए अस्पताल में केवल एक दिन रहना पड़ता है और मरीज जल्द ही कामकाज करने लगती है। लेप्रोस्कोपी की मदद से सबसे बड़े आकार के फाइब्रॉएड निकालने के लिए डॉ. निकिता का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज हो चुका है।
विज्ञापन


यह होती है फाइब्राॅएड
ये महिलाओं को होने वाली आम बीमारी है। इससे बांझपन, गर्भपात और गर्भधारण में जटिलता की समस्या सामने आती है। इसमें गर्भाशय की दीवार पर कैंसर रहित ट्यूमर होते हैं। पांच में से एक महिला में यह समस्या सामने आती है। शुरुआती लक्षण नहीं दिखने के चलते पहचान देर में हो पाती है। संतान जनने की उम्र वाली महिलाएं मुख्य तौर पर इससे पीड़ित होती है। अविवाहित में इसके चलते माहवारी के दौरान बहुत अधिक रक्तस्राव होता है। लंबे समय का मासिक धर्म सात दिन या अधिक समय तक रक्तस्राव, बार-बार पेशाब और पीठ दर्द या पैर में दर्द जैसी समस्याएं होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed