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जननांगों की टीबी से बांझपन का खतरा : डॉ. रीना

Sat, 06 Jan 2018 08:12 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर। Updated Sat, 06 Jan 2018 08:12 PM IST
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बांझपन का मुख्य कारण है जननांगों की टीबी : डॉ. रीना
बांझपन - फोटो : File Photo
ऑब्स एवं गाइनी एसोसिएशन की ओर से शनिवार को फॉग्सी डे पर ट्यूबरकुलोसिस (क्षयरोग) के प्रति जागरूकता लाने के मकसद से चिकित्सकों का सम्मेलन एक होटल में हुआ। इसमें बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रीना श्रीवास्तव ने कहा कि महिलाओं में जननांगों की टीबी के कारण मासिक धर्म की अनियमितता व बांझपन हो सकती है।
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डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि लंबे समय का बुखार, कमजोरी, वजन कम होना, भूख न लगना, खांसी एवं बलगम आदि जननांगों की टीबी के मुख्य लक्षण हैं। टीबी के मरीज की पहचान के लिए मरीज में बीमारी के लक्षणों का इतिहास, संपूर्ण चिकित्सकीय परीक्षण, एक्स-रे, मॉन्टूक्स टेस्ट, स्मीयर टेस्ट और कल्चर टेस्ट का विशेष महत्व है। सम्मेलन को गोरखपुर ऑब्स एवं गाइनी एसोसिएशन की अध्यक्ष डॉ. सुरहीता करीम, सचिव डॉ. बबिता शुक्ला, डॉ. प्रतिभा गुप्ता, डॉ. तनु वर्मा, डॉ. अर्चना गुप्ता, डॉ. आराधना सिंह, डॉ. शालिनी अग्रवाल आदि विशेषज्ञों ने भी संबोधित किया।
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भयावहता का अहसास कराया
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ. महिम मित्तल ने सम्मेलन में कहा कि टीबी से सर्वाधिक ग्रस्त देशों में एक भारत है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के 2016 के आंकड़ों के अनुसार विश्व में टीबी के 96 लाख नए मरीज मिले, इसमें से 27 लाख तो अकेले भारत के थे। भारत में लगभग 2.20 लाख मौतें टीबी के कारण होती हैं। 85 से 90 प्रतिशत मरीजों में फेफड़ों से संबंधित टीबी होती है। शेष में शरीर के किसी भी अन्य भाग की टीबी रोग हो सकता है।
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नई तकनीकों के बारे में बताया
टीबी जांच की प्रचलित विधियों में ठोस विधि से जांच में तीन सप्ताह एवं तरल विधि से 10 से 14 दिन लगते हैं। बैक्टेक 460, एमजीआईटी एवं मोड्स नामक नवीन त्वरित संवर्धन विधियों से 95 से 100 प्रतिशत मरीजों में सात दिन के भीतर ही टीबी की पहचान की जा सकती है। डीएनए और आरएनए-पीसीआर टेस्ट से एक से दो दिन में ही 98 से 99 प्रतिशत शुद्धता के साथ टीबी की पहचान संभव है, परंतु यह जांच महंगी है। टीबी की दवाओं के प्रति असंवेदनशील मरीजों में एक्सपर्ट एमडीआर टेस्ट किया जाता है, जो टीबी की प्रचलित दवाओं के प्रति प्रतिरोध को पहचान कर 99 प्रतिशत शुद्धता के साथ मात्र 100 मिनट में परिणाम देती है।
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