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कबीर की वाणी को आत्मसात करने की जरूरत : जिला जज

Sun, 17 Sep 2017 10:59 PM IST
Updated Sun, 17 Sep 2017 10:59 PM IST
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कबीर की वाणी को आत्मसात करने की जरूरत : जिला जज
मगहर(संतकबीरनगर)। सद्गुरु कबीर की निर्वाण स्थली कबीर चौरा पहुंचकर रविवार को जनपद न्यायाधीश उमेश चंद शर्मा ने समाधि और मजार पर पुष्प अर्पित कर मत्था टेका और खिराजे अकीदत पेश की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि कबीर बहुत बड़े सूफी संत थे, उन्होंने सभी धर्मों के आडंबरों की घोर निंदा की है और सभी को फटकार लगाई है। उनके कहे गए एक-एक शब्द का अर्थ लगाना बड़ा मुश्किल है। मानवता, एकता, अखंडता, प्रेम, अहिंसा का संदेश पूरे विश्व को दिया। आज के परिवेश में जरूरत है उनकी वाणी को आत्मसात करने की। कबीर ने जो कहा वो किया उनकी कथनी और करनी में कभी फर्क नहीं था। आज भी लोग परेशान हैं कि उनका धर्म क्या था। वे सभी धर्मों के लिए एकता के प्रतीक हैं। सद्गुरु ने अपना पूरा जीवन मानव कल्याण हेतु समर्पित कर दिया और कुरीतियों से लड़ते रहे। उन्होंने अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि जो स्थान कबीर की निर्वाण स्थली को मिलना चाहिए अब तक नहीं मिला है। इस मौके पर महंत विचार दास, सैय्यद शमीम अहमद, रामशंकर यादव, अवधेश सिंह, एडवोकेट सरफराज आलम, संत केशव दास, संत अरविंद दास, विजय तिवारी, अतीक अहमद खान, जगन्नाथ दास आदि मौजूद रहे।
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