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राप्ती स्थिर, घाघरा दूसरे दिन भी घटी
Updated Mon, 21 Aug 2017 11:32 PM IST
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संतकबीरनगर।
पिछले कई दिनों से उफान पर चल रही राप्ती का जलस्तर स्थिर है। वहीं घाघरा जलस्तर पिछले 24 घंटे में 10 सेंटीमीटर घटा है। करमैनी-बेलौली तटबंध पर राप्ती के दबाव के चलते खतरे की आशंका से लोग सहमे लोग बंधे पर डेरा डाले हुए हैं। जबकि एमबीडी बांध और घाघरा के बीच बसे 22 गांवों के बाढ़ प्रभावित लोग बांध पर जगह-जगह शरण लिए हुए हैं। इन लोगों के अनुसार, प्रशासन द्वारा कोई मदद नहीं दी जा रही है।
मेंहदावल प्रतिनिधि के अनुसार, रविवार की तरह ही सोमवार को भी राप्ती का जलस्तर 81 मीटर पर स्थिर रहा। हालांकि अफसरों को अब यह डर सता रहा है कि जब जलस्तर घटेगा तो तटबंध न धसने लगे। इसे लेकर प्रशासन तैयारियों में जुटा है। तटबंध की सतत निगरानी की जा रही है। नौगो में तटबंध पर बोरियां और बोल्डर पिचिंग के बगल कटान स्थल पर डाले जा रहे हैं। नदी के जलस्तर को देख कर स्थिति गंभीर बनी हुई है। तटबंध पर शरण लिए लोग अब भी सहमे हुए हैं। लालजी शाही, रणविजय शाही, रामबरन, परमानंद पांडेय, उपेन्द्र सिंह ने बताया कि करमैनी से लेकर बेलौली गांव के पूरब तक नदी व तटबंध के बीच में कृषि योग्य भूमि पर लंबे समय से किसान परवल, मूंगफली, धान, मक्का की खेती इस मौसम में करते चले आ रहे हैं। गाढ़ी कमाई से इस बार भी खेती की गई थी, लेकिन नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण करीब 800 बीघे फसल पूरी तरह डूब गई है। जिससे किसानों का भारी नुकसान हुआ है। तहसील प्रशासन बर्बाद फसल की जांच कराते हुए किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराए। पौली प्रतिनिधि के अनुसार, घाघरा के जलस्तर में लगातार दूूसरे दिन भी गिरावट दर्ज की गई। सोमवार को घाघरा का जलस्तर 79 .15 पहुंच गया। जो कि खतरे से निशान से 20 सेमी नीचे बह रही है। जलस्तर घटता देख कर बाढ़ से प्रभावित हुए 22 गांवों के लोगों ने राहत महसूस की। बेलहर प्रतिनिधि के अनुसार आमी उफान पर है। आमी के पानी पिपरी, देवपुर और बरडाड़ गांव चारों तरफ से पानी से घिर गए है। इन गांवों को आने-जाने के लिए एक नाव की व्यवस्था प्रशासन ने की है। बरडाड और पिपरी के बीच बनी पुलिया पानी की धारा में बह गई। जिससे लोगों का संपर्क मार्ग भी टूट गया है। उदयराज यादव, बहादुर चौधरी, रामनयन चौधरी, रामधनी चौधरी, रामउजागिर चौहान आदि ने बताया कि गांव के चारों तरफ से पानी घिर जाने से लोगों की समस्या बढ़ गई है। उपयोगी सामान बाजार से खरीद कर लाने के लिए एक ही नाव की व्यवस्था है तो नाकाफी है। एक्सईएन आर एन सिंह यादव ने बताया कि राप्ती का जलस्तर 81 मीटर पर स्थिर है। जबकि घाघरा 79. 15 पर बह रही है, जो कि डेंजर लाइन से 20 सेंटीमीटर नीचे है।
प्रशासन और पीड़ितों के बोल अलग-अलग
घाघरा के एमबीडी बांध पर कंचनपुर, खरैया,सरैया, गायघाट, करनपुर,चकदहा, ढोलबजा, गुनवतिया, भरवटिया, आगापुर गुलरिहा,पटौवा, नटहा, पडरिया, केवटहिया, खैरगाड,भौवावार समेत 22 प्रभावित गांवों के करीब 1000 शरण लिए हुए हैं। रामसकल, फूलचंद्र, महावीर, कल्पनाथ, भालचंद, अर्जुन, इंद्रेश, बसंत, जय प्रकाश ने बताया कि प्रशासन की ओर से कोई राहत नहीं मिला। घर के सामान भी बर्बाद हो गए। पशुओं के चारे का भी संकट है। पूड़ी सब्जी बटवाने का प्रशासन का दावा झूठा है। वहीं डीएम मार्कंडेय शाही ने बताया कि राप्ती स्थिर तो घाघरा काफी घट गई है। बांध के बचाव के लिए प्रशासनिक अमला जुटा हुआ है। घाघरा के पानी से जिन गांवों के लोग प्रभावित हुए है, उन्हें पूड़ी सब्जी बंटवाने का निर्देश एसडीएम को दिया गया है। वैसे एसडीएम ने जानकारी दी है कि कुछ लोग पूड़ी सब्जी के बजाए अनाज मांग रहे हैं। अनाज वितरण अभी नहीं हो सकता है। पीड़ितों की मदद के लिए निर्देश जारी किए गए है।
पिछले कई दिनों से उफान पर चल रही राप्ती का जलस्तर स्थिर है। वहीं घाघरा जलस्तर पिछले 24 घंटे में 10 सेंटीमीटर घटा है। करमैनी-बेलौली तटबंध पर राप्ती के दबाव के चलते खतरे की आशंका से लोग सहमे लोग बंधे पर डेरा डाले हुए हैं। जबकि एमबीडी बांध और घाघरा के बीच बसे 22 गांवों के बाढ़ प्रभावित लोग बांध पर जगह-जगह शरण लिए हुए हैं। इन लोगों के अनुसार, प्रशासन द्वारा कोई मदद नहीं दी जा रही है।
मेंहदावल प्रतिनिधि के अनुसार, रविवार की तरह ही सोमवार को भी राप्ती का जलस्तर 81 मीटर पर स्थिर रहा। हालांकि अफसरों को अब यह डर सता रहा है कि जब जलस्तर घटेगा तो तटबंध न धसने लगे। इसे लेकर प्रशासन तैयारियों में जुटा है। तटबंध की सतत निगरानी की जा रही है। नौगो में तटबंध पर बोरियां और बोल्डर पिचिंग के बगल कटान स्थल पर डाले जा रहे हैं। नदी के जलस्तर को देख कर स्थिति गंभीर बनी हुई है। तटबंध पर शरण लिए लोग अब भी सहमे हुए हैं। लालजी शाही, रणविजय शाही, रामबरन, परमानंद पांडेय, उपेन्द्र सिंह ने बताया कि करमैनी से लेकर बेलौली गांव के पूरब तक नदी व तटबंध के बीच में कृषि योग्य भूमि पर लंबे समय से किसान परवल, मूंगफली, धान, मक्का की खेती इस मौसम में करते चले आ रहे हैं। गाढ़ी कमाई से इस बार भी खेती की गई थी, लेकिन नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण करीब 800 बीघे फसल पूरी तरह डूब गई है। जिससे किसानों का भारी नुकसान हुआ है। तहसील प्रशासन बर्बाद फसल की जांच कराते हुए किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराए। पौली प्रतिनिधि के अनुसार, घाघरा के जलस्तर में लगातार दूूसरे दिन भी गिरावट दर्ज की गई। सोमवार को घाघरा का जलस्तर 79 .15 पहुंच गया। जो कि खतरे से निशान से 20 सेमी नीचे बह रही है। जलस्तर घटता देख कर बाढ़ से प्रभावित हुए 22 गांवों के लोगों ने राहत महसूस की। बेलहर प्रतिनिधि के अनुसार आमी उफान पर है। आमी के पानी पिपरी, देवपुर और बरडाड़ गांव चारों तरफ से पानी से घिर गए है। इन गांवों को आने-जाने के लिए एक नाव की व्यवस्था प्रशासन ने की है। बरडाड और पिपरी के बीच बनी पुलिया पानी की धारा में बह गई। जिससे लोगों का संपर्क मार्ग भी टूट गया है। उदयराज यादव, बहादुर चौधरी, रामनयन चौधरी, रामधनी चौधरी, रामउजागिर चौहान आदि ने बताया कि गांव के चारों तरफ से पानी घिर जाने से लोगों की समस्या बढ़ गई है। उपयोगी सामान बाजार से खरीद कर लाने के लिए एक ही नाव की व्यवस्था है तो नाकाफी है। एक्सईएन आर एन सिंह यादव ने बताया कि राप्ती का जलस्तर 81 मीटर पर स्थिर है। जबकि घाघरा 79. 15 पर बह रही है, जो कि डेंजर लाइन से 20 सेंटीमीटर नीचे है।
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प्रशासन और पीड़ितों के बोल अलग-अलग
घाघरा के एमबीडी बांध पर कंचनपुर, खरैया,सरैया, गायघाट, करनपुर,चकदहा, ढोलबजा, गुनवतिया, भरवटिया, आगापुर गुलरिहा,पटौवा, नटहा, पडरिया, केवटहिया, खैरगाड,भौवावार समेत 22 प्रभावित गांवों के करीब 1000 शरण लिए हुए हैं। रामसकल, फूलचंद्र, महावीर, कल्पनाथ, भालचंद, अर्जुन, इंद्रेश, बसंत, जय प्रकाश ने बताया कि प्रशासन की ओर से कोई राहत नहीं मिला। घर के सामान भी बर्बाद हो गए। पशुओं के चारे का भी संकट है। पूड़ी सब्जी बटवाने का प्रशासन का दावा झूठा है। वहीं डीएम मार्कंडेय शाही ने बताया कि राप्ती स्थिर तो घाघरा काफी घट गई है। बांध के बचाव के लिए प्रशासनिक अमला जुटा हुआ है। घाघरा के पानी से जिन गांवों के लोग प्रभावित हुए है, उन्हें पूड़ी सब्जी बंटवाने का निर्देश एसडीएम को दिया गया है। वैसे एसडीएम ने जानकारी दी है कि कुछ लोग पूड़ी सब्जी के बजाए अनाज मांग रहे हैं। अनाज वितरण अभी नहीं हो सकता है। पीड़ितों की मदद के लिए निर्देश जारी किए गए है।
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