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लोक संगम में बिखरी देश की सतरंगी छटा

Sat, 23 Feb 2019 12:42 AM IST
ajay Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर। Published by: ajay Kumar Updated Sat, 23 Feb 2019 12:42 AM IST
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लोक संगम में बिखरी देश की सतरंगी छटा
रुद्रप्रयाग के नेतृत्व में 17 कलाकारों ने नंदा राजजात की प्रस्तुति देकर उत्तराखंड में होने वाली नंदा देवी की एक धार्मिक यात्रा का वर्णन किया। - फोटो : amar ujala
गोरखपुर। भोजपुरी माटी के गुम हो रहे लोक वाद्य यंत्रों फोल्डिंग हारमोनियम, नगाड़ा, मृदंग, ढोलक, खजड़ी, सारंगी, उपंग, हुड़का, चंग, कसावर, झाल, सिंहा आदि की जुगलबंदी को सुनकर कचहरी क्लब मैदान में मौजूद श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली की ओर से आयोजित तीन दिवसीय लोक संगम में ललितांजलि सांस्कृतिक दल के 20 कलाकारों की पहली प्रस्तुति में पूर्वांचल के लोकसंगीत की छटा बिखरी तो खूब तालियां बजीं। पहले दिन देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों की कुल छह प्रस्तुतियों से समृद्ध लोककलाओं के दर्शन हुए।
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इससे पहले शाम छह बजे केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ल ने लोक संगम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि संगीत नाटक अकादमी की ओर से गोरखपुर में इस प्रकार का आयोजन सराहनीय है। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से हमारी भावी पीढ़ी विलुप्त हो रही भारतीय लोक कलाओं को जान व समझ सकेगी। गोरखपुर के कलाकार हरि प्रसाद सिंह, राम सिंह व श्याम सिंह ने चौताल ‘सजि साज खेलिहैं फाग आज ब्राज प्यारे’ तथा पद्मश्री शारदा सिन्हा के गीत ‘दीहले झुमका सेहुरे हम ते जब बलमवा कइसे तेजब हो छोटी ननदी’ से लोगों का मन मोह लिया। नरेन गुरुंग, गंगटोक की अगुवाई में 15 कलाकारों ने मालश्री गीत की प्रस्तुति दी।
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मालश्री, नेवा कला विधा की धुन है जो भक्ति संगीत का रूप है। यह धुन नेपाल की सबसे पुरानी लोकधुन है जो भक्तिभाव पर आधारित है। यह प्रस्तुति सिक्किम और नेपाल की साझा सांस्कृतिक विरासत का रूप है। इसके बाद देवेन्द्र ठाकुर, सिरमौर (हिमाचल प्रदेश) के 15 कलाकारों ने झूरी लोकनृत्य की प्रस्तुति से सभी को झुमाया। इसमें देवर-देवरानी का हंसी मजाक भी रहता है। जितेन्द्र शाह, रुद्रप्रयाग के नेतृत्व में 17 कलाकारों ने नंदा राजजात की प्रस्तुति देकर उत्तराखंड में होने वाली नंदा देवी की एक धार्मिक यात्रा का वर्णन किया। पद्यिनी दौरा, संबलपुर (ओडिशा) के 15 कलाकारों ने संबलपुरी लोकनृत्य किया। अंतिम प्रस्तुति फरुवाही लोकनृत्य की रही। इसे अयोध्या के विजय यादव के नेतृत्व में 15 कलाकारों ने किया। संचालन नवीन पांडेय ने किया। इस दौरान अकादमी से आए सुरेंद्र सिंह रावत, महेंद्र कुमार, संजय मिश्र, जसवंत सिंह, गणेश मिश्र, रवि शंकर खरे, डॉ. आशीष, डॉ. मंगलेश आदि मौजूद रहे।
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