{"_id":"5cf7e886bdec2207237e3f83","slug":"15597507856-gorakhpur-news75","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीएसएनएल के नेटवर्क पर बिजली कटौती की मार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीएसएनएल के नेटवर्क पर बिजली कटौती की मार
Wed, 05 Jun 2019 11:33 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 05 Jun 2019 11:33 PM IST
विज्ञापन
mobile user
- फोटो : Plot Projects
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोरखपुर। बिजली कटौती से उपभोक्ता परेशान हो रही हैं, अब बीएसएनएल की भी दुश्वारियां बढ़ गई हैं। ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती के चलते बीएसएनएल उपभोक्ताओं को नेटवर्क की दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। करीब हफ्ते भर से ग्रामीण इलाकों के कौड़ीराम, गोला, सहजनवां, खजनी में करीब 80 बीएसएनएल के मोबाइल टावर से नेटवर्क की समस्या आई है।
दरअसल, बीएसएनएल अपने टावर संचालन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के लिए डीजल और बैटरी का इंतजाम करता है। इस समय बीएसएनएल वित्तीय संकट से गुजर रहा है। ऐसे में उसे कटौती होने पर एक साथ इन टावरों के लिए डीजल का जुगाड़ करना भारी पड़ रहा है। वहीं बैटरी पुरानी होने की वजह से इनका बैकअप भी खराब हो गया है। जो बैटरी पांच से सात घंटे बैकअप देती थी, अब महज दो घंटे ही मुश्किल से दे पाती है। ऐसे में कटौती होने पर करीब डेढ़ लाख लोग इससे प्रभावित होते हैं।
बैटरी के डिस्चार्ज होने पर तो कभी कभार घंटों मोबाइल फोन से नेटवर्क गायब रहता है। अधिकारियों का कहना है कि पुरानी बैटरी को बदलने के लिए मुख्यालय पर प्रस्ताव भेजने के लिए कहा गया है। नेटवर्क प्रभावित होने से उपभोक्ताओं के तो परेशानी हो ही रही, साथ में बीएसएनएल को भी भारी राजस्व की क्षति पहुंच रही।
विज्ञापन
विज्ञापन
दरअसल, बीएसएनएल अपने टावर संचालन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के लिए डीजल और बैटरी का इंतजाम करता है। इस समय बीएसएनएल वित्तीय संकट से गुजर रहा है। ऐसे में उसे कटौती होने पर एक साथ इन टावरों के लिए डीजल का जुगाड़ करना भारी पड़ रहा है। वहीं बैटरी पुरानी होने की वजह से इनका बैकअप भी खराब हो गया है। जो बैटरी पांच से सात घंटे बैकअप देती थी, अब महज दो घंटे ही मुश्किल से दे पाती है। ऐसे में कटौती होने पर करीब डेढ़ लाख लोग इससे प्रभावित होते हैं।
विज्ञापन
बैटरी के डिस्चार्ज होने पर तो कभी कभार घंटों मोबाइल फोन से नेटवर्क गायब रहता है। अधिकारियों का कहना है कि पुरानी बैटरी को बदलने के लिए मुख्यालय पर प्रस्ताव भेजने के लिए कहा गया है। नेटवर्क प्रभावित होने से उपभोक्ताओं के तो परेशानी हो ही रही, साथ में बीएसएनएल को भी भारी राजस्व की क्षति पहुंच रही।
विज्ञापन
फरवरी में नही दे सके थे वेतन
बीएसएनएल के बुरे हाल का अंदाज इसी से लगा सकते है कि फरवरी में गोरखपुर-महाराजगंज मंडल के किसी भी कर्मचारी का वेतन नहीं मिल सका था। बड़ी मुश्किल से मार्च में रुक-रुक कर वेतन का भुगतान किया जा सका।अधिकारियों की भी है लापरवाही
बिजली निगम के अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा बीएसएनएल के उपभोक्ता उठा रहे हैं। गांव और टोलों में ढीले व जर्जर तारों को नहीं बदला जा सका। अधिकारियों को मौखिक निर्देश दिया गया है कि तेज हवा के चलते ही फीडर से जाने वाली लाइन से आपूर्ति को ठप कर दें। इन सब वजहों से भी ग्रामीण इलाकों में आपूर्ति में दिक्कत आ रही है।बिजली कटौती की वजह से मोबाइल टावर में दिक्कत आ रही है। बैट्रियां पुरानी होने से उनसे बैकअप मिलने में परेशानी आती है। तभी कभी घंटों तक मोबाइल फोन से नेटवर्क गायब रहने की शिकायत मिल रही है।
- देवेंद्र सिंह, प्रधान महाप्रबंधक, बीएसएनएल