फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   150 एकड़ भूमि आवंटन से जुड़े कई दस्तावेज जीडीए से गायब, रिपोर्ट दर्ज

150 एकड़ भूमि आवंटन से जुड़े कई दस्तावेज जीडीए से गायब, रिपोर्ट दर्ज

Wed, 23 Jan 2019 11:55 PM IST
ajay Kumar क्राइम डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर। Published by: ajay Kumar Updated Wed, 23 Jan 2019 11:55 PM IST
विज्ञापन
150 एकड़ भूमि आवंटन से जुड़े कई दस्तावेज जीडीए से गायब, रिपोर्ट दर्ज
बिल्डर को आवंटित भूमि से जुड़े कई दस्तावेज दफ्तर के रिकार्ड रूम से गायब हो गए हैं। - फोटो : अमर उजाला
गोरखपुर। रामगढ़ताल परियोजना क्षेत्र में शहर के एक उद्यमी और बिल्डर को 150 एकड़ भूमि के आवंटन मामले में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जीडीए को पता चला है कि बिल्डर को आवंटित भूमि से जुड़े कई दस्तावेज दफ्तर के रिकार्ड रूम से गायब हो गए हैं। इस मामले में प्राधिकरण ने खोराबार थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
विज्ञापन


फाइलों के गायब होने को जीडीए प्रशासन साजिश करार दे रहा है। उसका कहना है कि मामले से संबंधित जूनियर इंजीनियर के अवकाश पर होने की वजह से दूसरी एफआईआर नहीं कराई जा सकी है। प्रमुख सचिव आवास के निर्देश पर शासन स्तर की तीन सदस्यीय कमेटी पहले से जांच कर रही है। विजिलेंस जांच भी चल रही है। जांच कमेटी को रिकार्ड उपलब्ध कराने के लिए जब फाइलों की तलाश शुरू हुई तब दस्तावेज गायब होने का खुलासा हुआ। प्रारंभिक छानबीन में दो फाइलें गायब के गायब होने की जानकारी मिली है।
विज्ञापन

 

फाइल गायब होने में जीडीए, एक और रिपोर्ट लिखाएगा

गोरखपुर। रामगढ़ताल परियोजना क्षेत्र में 150 एकड़ भूमि की फाइल गायब होने के मामले में जल्द ही प्राधिकरण की तरफ से एक और रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। जीडीए सचिव ने एक फाइल गायब होने की बात मानी है। प्राधिकरण ने वर्ष 1997 में 150 एकड़ भूमि मेसर्स जालान कॉम्प्लेक्स प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स भव्या कॉलोनाइजर्स को नीलामी में दी थी। मेसर्स जालान ने 8 करोड़ 31 लाख रुपये और भव्या कॉलोनाइजर्स ने लगभग 5 करोड़ रुपये चुकाए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


बाद में ब्याज का मामला फंसा जिस पर उद्योगपति और बिल्डर कोर्ट चले गए थे। हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट दोनों ही जगह जीडीए को इस मामले में शिकस्त मिली। कोर्ट ने उद्यमी और बिल्डर के पक्ष में जमीन की रजिस्ट्री कराने का आदेश दिया था। इसका पालन नहीं होने पर उद्यमी और बिल्डर की तरफ से हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच में अवमानना याचिका भी दाखिल की जा चुकी है। अभी रजिस्ट्री नहीं हो पाई है। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed