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नमाज पढ़ी, गले मिले और बोले ईद मुबारक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Sun, 17 Jun 2018 01:35 AM IST
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हजरत मुबारक खां शहीद की दरगाह पर ईद की नमाज अदा की गई।
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गोरखपुर। चांद रात की रौनक और ईद के इंतजार ने सोने न दिया। पूरी रात बाजारों में चहल-पहल रही, खूब खरीदारी हुई। सुबह हुई तो क्या बड़े और क्या बच्चे। सभी तैयार हुए, इत्र लगाया और ईदगाह की ओर निकल पड़े। सूरज और बादलों की लुकाछिपी कभी सुकून दे रही थी तो कभी तपिश। ऐसे ही माहौल नमाज शुरू हुई। नमाजियों ने देश और परिवार में अमन-चैन की दुआ मांगी।
शनिवार को तय समय पर शहर की विभिन्न ईदगाहों और मस्जिदों में ईद उल फि त्र की नमाज अकीदत व एहतराम के साथ अदा की गई। नमाज के बाद इमाम ने खुत्बा पढ़ा। इसके बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगा ईद की मुबारकबाद दी। बच्चे बड़ों से मिलने वाली ईदी को लेकर काफी उत्सुक दिखे। खुश हुए, अपने मन की चीजें खरीदीं। ईदगाह और मस्जिदों के पास मेले लगे रहे। यह माहौल कुछ-कुछ कतील शिफाई के इस शे’र जैसा संदेश दे रहा था-‘गमों को दिल से भुलाओ कि ईद का दिन है/खुशी से बज्म सजाओ कि ईद का दिन है।’
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शनिवार को तय समय पर शहर की विभिन्न ईदगाहों और मस्जिदों में ईद उल फि त्र की नमाज अकीदत व एहतराम के साथ अदा की गई। नमाज के बाद इमाम ने खुत्बा पढ़ा। इसके बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगा ईद की मुबारकबाद दी। बच्चे बड़ों से मिलने वाली ईदी को लेकर काफी उत्सुक दिखे। खुश हुए, अपने मन की चीजें खरीदीं। ईदगाह और मस्जिदों के पास मेले लगे रहे। यह माहौल कुछ-कुछ कतील शिफाई के इस शे’र जैसा संदेश दे रहा था-‘गमों को दिल से भुलाओ कि ईद का दिन है/खुशी से बज्म सजाओ कि ईद का दिन है।’
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कब बीता दिन पता ही न चला
खुदा की इबादत का फैज लेकर लोग घर लौटे तो मेहमाननवाजी का दौर शुरू हुआ। सेंवई की मिठास से फजां को तर थी। तरह-तरह के व्यंजनों से आने वालों की आवभगत हुई। खुशी के इस माहौल में दिन कब गुजर गया, पता ही न चला। लोग एक दूसरे के घर आते रहे जाते रहे और खुशियों का पैगाम बांटते रहे।
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