{"_id":"59bbe6a04f1c1b8e688b4b23","slug":"151505486496-gorakhpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दर्शनशास्त्र विभाग की ओर से तीन दिवसीय संगोष्ठी का उद्घाटन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दर्शनशास्त्र विभाग की ओर से तीन दिवसीय संगोष्ठी का उद्घाटन
Updated Fri, 15 Sep 2017 08:11 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
गोरखपुर। गोरखपुर यूनिवर्सिटी के दर्शनशास्त्र विभाग में शुक्रवार को तीन दिवसीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष प्रो. एसआर भट्ट ने कहा कि यांत्रिकवाद और उद्देश्यवाद को पश्चिमी जगत में परस्पर विरोधी सिद्धांतों के रूप में स्वीकार किया जाता है, मगर भारतीय परंपरा में इन्हें पूरक के रूप में स्वीकार किया गया है। वैदिक अवधारणा में व्यवस्था और स्वातंत्र्य दोनों को समान महत्व दिया गया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व शिक्षक प्रो. डीएन द्विवेदी ने कहा कि बौद्ध काल से ही भारत में यांत्रिकवाद और प्रयोजनवादी विकासवाद की अवधारणा विद्यमान रही है।
उद्घघाटन सत्र की अध्यक्षता कुलपति प्रो. वीके सिंह ने की। संगोष्ठी में देश भर से आए प्रतिभागियों का स्वागत विभागाध्यक्ष प्रो. डीएन यादव ने किया। संचालन प्रो. सुशील तिवारी और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. द्वारकानाथ तिवारी ने किया। संगोष्ठी के पहले दिन दो अकादमिक सत्र संपन्न हुए।
उद्घघाटन सत्र की अध्यक्षता कुलपति प्रो. वीके सिंह ने की। संगोष्ठी में देश भर से आए प्रतिभागियों का स्वागत विभागाध्यक्ष प्रो. डीएन यादव ने किया। संचालन प्रो. सुशील तिवारी और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. द्वारकानाथ तिवारी ने किया। संगोष्ठी के पहले दिन दो अकादमिक सत्र संपन्न हुए।
विज्ञापन