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दिव्यांग
Updated Sat, 03 Jun 2017 11:43 PM IST
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शिक्षा की प्रीत में प्रीती ने दिव्यांगता को दे दी ‘मात’
जन्म से ही दोनों हाथों और दाहिने पैर से दिव्यांग है कक्षा चार की छात्रा
बाएं पैर से लिखने के साथ ही चित्र भी बना लेती है प्रीती
शोभित कुमार पांडेय
संतकबीरनगर।
सर्वशिक्षा अभियान का नारा ‘शिक्षा है अनमोल रतन, पढ़ने का तुम करो जतन’ नौ साल की कक्षा चार में पढ़ने वाली प्रीती पर बिल्कुल सटीक बैठता है। शिक्षा से प्रीती को ऐसी प्रीत लगी है कि उसने जन्म से दोनों हाथ और दाहिने पैर की दिव्यांगता को मात देकर शिक्षा ग्रहण कर रही है। वह बाएं पैर से लिखती है और चित्र भी बनाती है। उसके इरादे देखकर मां-बाप भी उसके दिव्यांग होने का दर्द भुला चुके हैं।
पौली ब्लॉक लौकिहा गांव के प्रधान राजेंद्र की नौ वर्षीय बेटी प्रीती बचपन से ही दोनों हाथ और दाहिने पैर से दिव्यांग है। अपने मां-बाप की चौथे नंबर की संतान प्रीती सबकी दुलारी है। दिव्यांगता दूर कराने के लिए घरवालों ने काफी उपचार करारा पर कोई लाभ नहीं हुआ। गांव के प्राथमिक स्कूल में प्रीती कक्षा चार में पढ़ती है। प्रीती बाएं पैर से लिखने के साथ ही अपने कार्य भी खुद करती है। प्रीती के अनुसार, जब वह पहली बार स्कूल गई तो बच्चों ने उसकी हंसी उड़ाई कि वह कैसे लिखेगी। काफी प्रयास के बाद उसने बाएं पैर से लिखने में सफलता पाई। इसी पैर से वह चम्मच से भोजन, कंघा फंसा कर बाल झाड़ना जैसे कार्य कर लेती है। हेड मास्टर साहब भी उसका ध्यान रखते हैं।
पिता राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि उनके पास दो बेटे श्रवण(19), राजकुमार (12) और बेटी ज्योति (13) व प्रीती नौ वर्ष हैं। प्रीती जन्म से ही दोनों हाथ और दाहिने पैर से दिव्यांग है। पहले वह मुुंबई में मेहनत मजदूरी करके परिवार का पेट पालते थे। पंचायत चुनाव में वह गांव आए तो गांव वालों ने उन्हें प्रधान पद पर चुनाव लड़ा दिया और वह जीत गए। प्रीती का मुंबई से मुंबई से लेकर राजस्थान तक उपचार कराया पर कोई लाभ नहीं हुआ। पढ़ने की उसकी ललक के चलते उसे पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। वह जितना पढ़ना चाहेगी, उसे पढ़ाएंगे। मां कुसुम देवी बताती है कि उनकी तो ईश्वर से यही प्रार्थना है कि बेटी अपने मकसद में कामयाब हो। वहीं प्राथमिक स्कूल लौहिया के प्रधानाध्यापक चंद्रभान ने बताया कि प्रीती कक्षा चार में पढ़ने वाले छात्र- छात्राओं में सबसे तीव्र बुद्धि की है। उसकी पढ़ाई की ललक बताती है कि आने वाले समय में दिव्यांग बच्चों के लिए वह उदाहरण पेश करेगी।
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जन्म से ही दोनों हाथों और दाहिने पैर से दिव्यांग है कक्षा चार की छात्रा
बाएं पैर से लिखने के साथ ही चित्र भी बना लेती है प्रीती
शोभित कुमार पांडेय
संतकबीरनगर।
सर्वशिक्षा अभियान का नारा ‘शिक्षा है अनमोल रतन, पढ़ने का तुम करो जतन’ नौ साल की कक्षा चार में पढ़ने वाली प्रीती पर बिल्कुल सटीक बैठता है। शिक्षा से प्रीती को ऐसी प्रीत लगी है कि उसने जन्म से दोनों हाथ और दाहिने पैर की दिव्यांगता को मात देकर शिक्षा ग्रहण कर रही है। वह बाएं पैर से लिखती है और चित्र भी बनाती है। उसके इरादे देखकर मां-बाप भी उसके दिव्यांग होने का दर्द भुला चुके हैं।
पौली ब्लॉक लौकिहा गांव के प्रधान राजेंद्र की नौ वर्षीय बेटी प्रीती बचपन से ही दोनों हाथ और दाहिने पैर से दिव्यांग है। अपने मां-बाप की चौथे नंबर की संतान प्रीती सबकी दुलारी है। दिव्यांगता दूर कराने के लिए घरवालों ने काफी उपचार करारा पर कोई लाभ नहीं हुआ। गांव के प्राथमिक स्कूल में प्रीती कक्षा चार में पढ़ती है। प्रीती बाएं पैर से लिखने के साथ ही अपने कार्य भी खुद करती है। प्रीती के अनुसार, जब वह पहली बार स्कूल गई तो बच्चों ने उसकी हंसी उड़ाई कि वह कैसे लिखेगी। काफी प्रयास के बाद उसने बाएं पैर से लिखने में सफलता पाई। इसी पैर से वह चम्मच से भोजन, कंघा फंसा कर बाल झाड़ना जैसे कार्य कर लेती है। हेड मास्टर साहब भी उसका ध्यान रखते हैं।
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पिता राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि उनके पास दो बेटे श्रवण(19), राजकुमार (12) और बेटी ज्योति (13) व प्रीती नौ वर्ष हैं। प्रीती जन्म से ही दोनों हाथ और दाहिने पैर से दिव्यांग है। पहले वह मुुंबई में मेहनत मजदूरी करके परिवार का पेट पालते थे। पंचायत चुनाव में वह गांव आए तो गांव वालों ने उन्हें प्रधान पद पर चुनाव लड़ा दिया और वह जीत गए। प्रीती का मुंबई से मुंबई से लेकर राजस्थान तक उपचार कराया पर कोई लाभ नहीं हुआ। पढ़ने की उसकी ललक के चलते उसे पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। वह जितना पढ़ना चाहेगी, उसे पढ़ाएंगे। मां कुसुम देवी बताती है कि उनकी तो ईश्वर से यही प्रार्थना है कि बेटी अपने मकसद में कामयाब हो। वहीं प्राथमिक स्कूल लौहिया के प्रधानाध्यापक चंद्रभान ने बताया कि प्रीती कक्षा चार में पढ़ने वाले छात्र- छात्राओं में सबसे तीव्र बुद्धि की है। उसकी पढ़ाई की ललक बताती है कि आने वाले समय में दिव्यांग बच्चों के लिए वह उदाहरण पेश करेगी।
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