{"_id":"59dd28ee4f1c1bd0538b6e42","slug":"141507666158-gorakhpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गीडा के किसानों ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गीडा के किसानों ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की
Updated Wed, 11 Oct 2017 01:39 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
गोरखपुर। तेनुहारी और पिपरा के किसानों ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल किया है। ऐसे में अगर इलाहाबाद हाईकोर्ट में गीडा द्वारा पिपरा और तेनुहारी गांवों के अधिग्रहण को चुनौती दी जाती है तो तेनुहारी और पिपरा के किसानों के पक्ष को भी सुना जाएगा। वहीं अब तक अधिग्रहण के खिलाफ गीडा प्रशासन की ओर से मांगे गए सुझाव पर शासन से कोई दिशा निर्देश नहीं आया है।
तीन महीने पहले अगस्त में हाईकोर्ट ने गीडा द्वारा पिपरा और तेनुआरी में आवंटित 270.35 एकड़ जमीन का अधिग्रहण रद्द कर दिया था। साथ ही तीन महीने के अंदर भू अधिग्रहण कानून 2013 के अनुसार जमीन का अधिग्रहण नए सिरे से करार करने का आदेश दिया था अन्यथा जमीन किसानों को वापस करने संबंधी शर्त रखी थी। इसे देखते हुए तेनुहारी और पितरा के किसानों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर दिया गया। तेनुहारी गांव के किसान कृष्ण मोहन सिंह ने कहा कि इसमें सभी 15 फाइलों को मर्ज कर दिया गया है। ऐसे में अगर प्रदेश सरकार या गीडा प्रशासन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी जाती है तो हमारा भी पक्ष सुना जाएगा।
यह है मामला
गीडा ने सेक्शन-4 के तहत पिपरा और तेनुआरी की जमीन का अधिग्रहण करने के साथ सेक्शन-5 के तहत सभी आपत्तियों का निस्तारण भी करा दिया। वहीं सेक्शन-5 के एक्सट्रीम अरजेंसी के तहत अधिग्रहण करने के दौरान किसानों को अपना पक्ष रखने का कोई मौका नहीं दिया गया। इसके बाद कृष्ण सोहन सिंह समेत काफी संख्या में किसान कोर्ट चले गए थे। अधिग्रहित जमीन से प्रभावित 80 प्रतिशत किसानों ने मुआवजा नहीं लिया था। साथ ही इस अधिग्रहण के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। आवंटित जमीन की वस्तुस्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट ने जमीन का नोटिफिकेशन रद्द कर दिया।
तीन महीने पहले अगस्त में हाईकोर्ट ने गीडा द्वारा पिपरा और तेनुआरी में आवंटित 270.35 एकड़ जमीन का अधिग्रहण रद्द कर दिया था। साथ ही तीन महीने के अंदर भू अधिग्रहण कानून 2013 के अनुसार जमीन का अधिग्रहण नए सिरे से करार करने का आदेश दिया था अन्यथा जमीन किसानों को वापस करने संबंधी शर्त रखी थी। इसे देखते हुए तेनुहारी और पितरा के किसानों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर दिया गया। तेनुहारी गांव के किसान कृष्ण मोहन सिंह ने कहा कि इसमें सभी 15 फाइलों को मर्ज कर दिया गया है। ऐसे में अगर प्रदेश सरकार या गीडा प्रशासन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी जाती है तो हमारा भी पक्ष सुना जाएगा।
विज्ञापन
यह है मामला
गीडा ने सेक्शन-4 के तहत पिपरा और तेनुआरी की जमीन का अधिग्रहण करने के साथ सेक्शन-5 के तहत सभी आपत्तियों का निस्तारण भी करा दिया। वहीं सेक्शन-5 के एक्सट्रीम अरजेंसी के तहत अधिग्रहण करने के दौरान किसानों को अपना पक्ष रखने का कोई मौका नहीं दिया गया। इसके बाद कृष्ण सोहन सिंह समेत काफी संख्या में किसान कोर्ट चले गए थे। अधिग्रहित जमीन से प्रभावित 80 प्रतिशत किसानों ने मुआवजा नहीं लिया था। साथ ही इस अधिग्रहण के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। आवंटित जमीन की वस्तुस्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट ने जमीन का नोटिफिकेशन रद्द कर दिया।
विज्ञापन